दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 8 फरवरी। महापौर अलका बाघमार के मार्गदर्शन और सांस्कृतिक पर्यटन, मनोरंजन एवं विरासत संरक्षण समिति की प्रभारी हर्षिका संभव जैन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्यों ने आगामी 15 फरवरी को होने वाली महाशिवरात्रि, विभिन्न वार्षिक सांस्कृतिक आयोजनों तथा बजट प्रस्तावों पर विस्तृत विमर्श किया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि का मुख्य आयोजन शिवनाथ सरोवर में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। आयोजन में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, झांकियों एवं जनसहभागिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके साथ-साथ शहर के सभी वार्डों में मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक मरम्मत, रंग-रोगन, प्रकाश व्यवस्था एवं साफ-सफाई को अभियान के रूप में किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। शहर सुंदरता अभियान को मिलेगी गति समिति सदस्यों ने यह स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ शहर की सुंदरता और विरासत संरक्षण भी प्राथमिकता में रहेगा। इस संदर्भ में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी शहर के चौक-चौराहों पर स्थापित मूर्तियों की साफ-सफाई, मरम्मत और संरक्षण किया जाएगा। शहर के सभी उद्यानों, गार्डन और सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी।
मंडई मेले में छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को मंच उपलब्ध कराया जाएगा जिससे स्थानीय कलाकारों को बढ़ावा मिले। इन प्रयासों से नगर निगम न केवल शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना चाहता है बल्कि आम नागरिकों को स्वच्छ, आकर्षक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध वातावरण प्रदान करना चाहता है। बैठक में यह सुझाव दिया गया कि शहर के प्रत्येक वार्ड में पुस्तकालय की स्थापना की जाए, जिससे बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों को ज्ञानवर्धक संसाधन उपलब्ध हों। यह पहल शहर को एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायक होगी। सालभर होने वाले प्रमुख आयोजनों के बजट पर गहन चर्चा समिति ने वर्षभर आयोजित होने वाले कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के बजट पर भी विस्तृत चर्चा की। इनमें प्रमुख रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह,दुर्ग आइडल (स्थानीय प्रतिभाओं को मंच), महाशिवरात्रि उत्सव, दुर्ग मंडई, सावन मेला, तीजा-पोला महोत्सव शामिल हैं। इन सभी आयोजनों का उद्देश्य दुर्ग की सांस्कृतिक धरोहर, लोककला, परंपराओं और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाना है। बैठक में प्रमुख रूप से युवराज कुँजम, मनीष कोठारी, प्रतिभा गुप्ता, लोकेश्वरी ठाकुर, सरस निर्मलकर, लता यादव, विकल निर्मलकर उपस्थित रहे।


