दुर्ग
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग बना संकट का साथी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 8 फरवरी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने निभाई अभिभावक की भूमिका न्याय सब के लिए के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। एक 16 वर्षीय नाबालिग रेप पीडि़ता, जिसकी गर्भावस्था चिकित्सकीय रूप से जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी, के संपूर्ण उपचार एवं सुरक्षित पुनर्वास में प्राधिकरण ने ‘अभिभावक’ की भूमिका निभाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला दुर्ग निवासी नाबालिग बालिका रेप की घटना के पश्चात गर्भवती हो गई थी। चिकित्सकीय परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि उक्त गर्भावस्था उसकी शारीरिक एवं मानसिक स्थिति के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण है। इस कठिन परिस्थिति में पीडि़ता के परिजन मानसिक रूप से टूट चुके थे और उचित मार्गदर्शन के अभाव में परेशान थे।
सूचना प्राप्त होते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने त्वरित कार्यवाही करते हुए पीडि़ता एवं उसके परिजनों को नि:शुल्क विधिक सहायता प्रदान की तथा संबंधित न्यायालय से समन्वय स्थापित किया। तत्पश्चात महिला पैरा-लीगल वॉलेंटियर को जिला अस्पताल भेजकर पीडि़ता की संपूर्ण देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई। महिला पैरा-लीगल वॉलेंटियर ने अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया से लेकर उपचार तक पीडि़ता का निरंतर साथ दिया। चिकित्सकों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की गईं तथा आवश्यकता पडऩे पर रक्त आपूर्ति की भी पूर्ण तैयारी रखी गई। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम, 1971 (संशोधित अधिनियम, 2021) के अंतर्गत स्थानीय शासकीय अस्पताल में विधिवत एवं सफलतापूर्वक चिकित्सीय गर्भपात कराया गया। गर्भपात पश्चात पीडि़ता के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखी गई तथा आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं के साथ उसे परिजनों सहित सुरक्षित घर भेजने की व्यवस्था की गई।


