दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 9 सितंबर। राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के द्वारा ’ विश्व साक्षरता दिवस’ के अवसर पर पैरालीगल वालिन्टिर्स के द्वारा साक्षरता शिविर आयोजन करने का निर्देश दिया गया। पैरालीगल वालिन्टियर्स के द्वाारा विभिन्न स्थानों में जाकर लोगों को विश्व साक्षरता दिवस के उद्देश्य को बताते हुए बताया कि शिक्षा अतीत वर्तमान और भविष्य के बीच का एक संवाद है। ताकि आने वाली पीढ़ी उसे प्राप्त कर सके और आगे बढा सके। लोगों के जीवन में शिक्षा महत्वपूर्ण स्थान स्थापित करती है।
साक्षरता दिवस उन लाखों महिलाओं पुरूषों और बच्चों को आशा देने का अवसर है जो अपना नाम तक पढ या लिख नहीं सकते। साक्षरता प्रकाश के समान अच्छा जीवन व्यतीत करने के लिए लोगों का साक्षर होना बेहद जरूरी है। देश का सबसे बडा अभिशाप निरक्षरता है। इस दिवस को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को शिक्षा के साथ जोडऩा है, जो अब तक इससे वंचित रहे है। गरीबी, अंधविश्वास, लिंग भेद, जनसंख्या बढोत्तरी जैसी समस्याओं से पार पाने के लिए लोगों को साक्षर होना आवश्यक है।
साक्षरता की दर को बढाने के लिए राज्यों में अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम को शिक्षा के अधिकार के रूप में स्थान दिया गया है। शिक्षा के स्तर को बढानें के लिए ही बालश्रम पर पूर्णत: रोक लगााया गया है। 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को मौलिक अधिकार दिया गया है। विश्व साक्षरता दिवस के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव के विशेष मार्गदर्शन में दो पैरालीगल वालिन्टियर्स के द्वारा विभिन्न स्थानों पर जाकर जनमानस को साक्षरता दिवस के तारतम्य में साक्षरता के महत्व को बताते हुए विभिन्न आवश्यक कानूनों के बारे में बताते हुए ‘सब पढ़े सब बढ़े‘ के नारे को सार्थक बनाने का एक अभिनव प्रयास करते हुए सर्व शिक्षा अभियान व बुजुर्गों को दी जाने वाली प्रौढ़ शिक्षा के बारे में भी जानकारी दी गई।
साथ ही साथ आगामी नेशनल लोक अदालत के माध्यम से होने वाले राजीनामा प्रकरणों की भी जानकारी दी गई।
और जनमानस को आज देश के हर क्षेत्र में बेटियो की बढ़ती भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ‘ की अपील भी की गई। सामान्य शिक्षा के साथ ही साथ विधिक शिक्षा का प्रसार करते हुए लगभग 580 लोगों को कानूनों की जानकारी देकर लाभान्वित किया गया।


