धमतरी

भखारा के कृष्ण कुंज में दूसरी बार लगी आग, हजारों पेड़ पौधे जले
03-May-2026 9:30 PM
भखारा के कृष्ण कुंज में दूसरी बार लगी आग, हजारों पेड़ पौधे जले

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरूद, 3 मई।
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर वन विभाग द्वारा हर बरस करोड़ों रुपए खर्च कर जहाँ तहाँ पौधे लगाने का काम किया जा रहा है। इनके संरक्षण के नाम पर भी लाखों रुपए फूंका जा रहा है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ अलग ही कहानी बंया कर रही है। ऐसा ही एक मामला नगर पंचायत भखारा का है जहाँ विभागीय लापरवाही के चलते लाखों की लागत से तैयार कृष्ण कुंज जलकर राख हो गया है।
कुरुद विधानसभा अंतर्गत नगर पंचायत भखारा में वित्तीय वर्ष 2022-23 में पूरे तामझाम और क्षेत्र का तापमान दो डीग्री कम रखने के इरादे से कृष्ण कुंज की स्थापना किया गया था। जिसके तहत बड़े भूभाग में लाखों रुपए खर्च कर हजारों पौधे लगाएं गए थे। पौध संरक्षण के नाम पर हर बरस बड़ी धन राशि यहाँ खर्च की जा रही है। लेकिन रखरखाव और देखरेख के अभाव में यहाँ लगे पेड़ पौधे नष्ट हो रहें हैं। भखारा में स्थित कृष्ण कुंज में लगातार दूसरे वर्ष हुई आगजनी की घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हरियाली बचाने के बड़े-बड़े दावे करने वाला तंत्र इस बार भी आग के आगे बेबस नजर आया, और देखते ही देखते सैकड़ों छोटे-बड़े पेड़-पौधे जलकर राख हो गए। पूर्व में राज्य शासन द्वारा हरियाली बढ़ाने एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से कृष्ण कुंज योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर यहाँ मिश्रित छायादार, फलदार, पौधों का रोपण कराया गया था। लेकिन मेंटेनेंस पर खर्च के बावजूद जमीनी स्तर पर सुरक्षा और देखरेख की भारी कमी उजागर हो रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सूखी घास, झाडिय़ों की सफाई नहीं होने से कुंज में लगातार दो साल से आग लग रही है, जिसके चलते पूरी हरियाली आग की लपटों में समा गई। कई पेड़ पूरी तरह जल गए, थोड़े बहुत बचे पौधे भी बुरी तरह झुलस गए। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण नुकसान को रोका नहीं जा सका।
लगातार आगजनी होने से गुस्साये क्षेत्रवासियों का कहना है कि साफ-सफाई के नाम पर लाखों खर्च होते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं दिखता। अगर समय पर झाडिय़ों की सफाई होती, तो आग इतनी नहीं फैलती। सिर्फ कागजों में काम होता है, लगातार दो साल से आग लगने के बाद भी कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है। लोगों ने सवाल उठाया है कि राशि खर्च होने के बावजूद सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई है ? समय रहते सूखी घास और झाडिय़ों की सफाई कर पौधों को आग से बचाने का ठोस उपाय क्यों नहीं किया गया है ?
इस संबंध में कुरूद डिप्टी रेंजर एरावत सिंह मधुकर ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास किया। गत वर्ष की भांति इस बार भी खेतों में पराली जलाने के कारण कुंज में आग लगी। पहले भी संबंधित किसान को चेतावनी दी गई और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने ठोस कदम उठाने का भरोसा दिलाया है।।


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