धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 18 अप्रैल। मकानों की नंबरिंग करने के साथ ही राज्यभर में जनगणना की अधिकृत शुरुआत हो गई है। दुसरे चरण में प्रगणकों के प्रशिक्षण का कार्य जारी है। कुरुद तहसील के लिए करीब 250 लोगों की 5 टीम बनाई गई है, शहरी क्षेत्र के लिए एक अलग दल बनाया गया है। जिसमें शिक्षक और पटवारियों को नम्बरिंग हो चुके मकान दुकानों के सुचीकरण का दायित्व सौंपा गया है।
धमतरी जिला में राष्ट्रीय जनगणना 2026 के अंतर्गत स्व-गणना को बढ़ावा देने कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वयं ऑनलाइन स्व-गणना फॉर्म भरकर संदेश दिया कि जनगणना केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जो देश के समग्र विकास की नींव तय करती है। कलेक्टर ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए स्व-गणना के इस डिजिटल विकल्प का उपयोग कर आम नागरिक द्धह्लह्लश्च://ह्यद्ग.ष्द्गठ्ठह्यह्वह्य.द्दश1.द्बठ्ठ पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में अपनी एवं परिवार की जानकारी स्वयं भर सकते हैं। यह प्रक्रिया सरल, सुरक्षित और समय की बचत करने वाली है।
इसी क्रम में कुरुद नगर एवं तहसील क्षेत्र में भी जनगणना से जुड़े काम युद्धस्तर पर जारी है। तहसीलदार सूरज बंछोर ने बताया कि 15 से 17 अप्रैल तक सेजस कुरुद में करीब150 प्रगणकों को प्रशिक्षण दिया गया। 22 से 24 अप्रैल तक दुसरे चरण में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र हेतु इतने ही चयनित कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। संबंधित क्षेत्र में मकान नंबरिंग का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। अब प्रगणक डोर-टू- डोर जाकर मकान दुकान का वेरिफिकेशन करेंगे। इस हेतु 800 से 1000 की आबादी के अनुपात में एक एरिया चिन्हित किया गया है। इसके लिए प्रगणक व पर्यवेक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रत्येक एरिया के लिए एक चार्ज अधिकारी भी तैनात किया गया है। मकान नंबरिंग के आधार पर जनगणना कर्मचारी घरों तक पहुंचेंगे। इस बार के जनगणना में मकान मालिकों को 33 सवालों के जवाब देने हैं। जिसमें उनका घर, फर्श, दीवार किस सामग्री से बनी है, रेडियो, टीवी, इंटरनेट जैसी सुविधाएं हैं या नहीं, घर में कितने लोग रहते हैं, कौन-कौन सी गाडिय़ों का उपयोग करते हैं, बिजली-पानी की सुविधा है या नहीं, किचन में खाना किससे बनता है, लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल, स्मार्ट फोन में क्या उपयोग करते हैं जैसे कई प्रश्नों के जवाब देने होंगे।
तहसीलदार ने बताया कि एक प्रगणक को औसतन 150 से 200 घरों से 800-1000 लोगों का डेटा डिजिटल रूप से दर्ज करना होगा। इसके लिए कर्मचारियों को मोबाइल एप और पोर्टल से रियल-टाइम डेटा अपलोड करने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। तीन दिन के प्रशिक्षण पश्चात प्रगणकों द्वारा घर घर जाकर जनगणना का डेमो किया गया।
एसडीएम नभसिंह कोसले ने कहा कि पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल मोड में हो रही है, हर घर से विस्तृत सामाजिक-आर्थिक डेटा संग्रह किया जाएगा, इस काम में कोई भी कर्मचारी ड्यूटी से बचने या लापरवाही की कोशिश न करें।


