धमतरी

पाश्चात्य सभ्यता से उपजी आसुरी शक्तियों का समाधान सनातन से-भगवताचार्य
19-Jan-2026 3:59 PM
पाश्चात्य सभ्यता से उपजी आसुरी शक्तियों का समाधान सनातन से-भगवताचार्य

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 19 जनवरी। पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से समाज में एक ऐसे वर्ग का उदय हुआ है, जो भारतीय संस्कृति को विकृत करने में तुला है। आज का युवा नशा कर मंदिर, मस्जिद,  गिरजाघर जाना भूल गया है। घर, गृहस्थी सम्हालने की जगह अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर अराजकता और नफरत फैला माता-पिता एवं रिश्तेदारों पर बोझ बनते जा रहे है। सभी धर्मों के जनक सनातन धर्म का क्या हाल हो रहा है ? उक्त बातें चर्रा में भगवताचार्य शिवानंद महाराज ने कथा सुनाते हुए कही।

कुरुद जनपद अंतर्गत सांसद आदर्श ग्राम चर्रा  के साहू पारा में आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह के  व्यासपीठ से भगवताचार्य शिवानंद महाराज ने समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि सनातन धर्म में विकार बढऩे से देव संस्कृति कमजोर और असुरी प्रवृत्ति बलवान होने लगी, तब देवताओं के गुरु बृहस्पति और असुरों के गुरु शुक्राचार्य के परामर्श से दानव और देवताओं ने समुद्र मंथन किया। मंथन से जब अमृत कलश निकला तो असुर-देवता आपस में लडऩे लगे। तब भगवान विष्णु ने मोहनी रूप धारण कर देवताओं को पहले अमृतपान कराने लगे। राहू-केतू नाम के दो दानव ने देवताओं के पंक्ति में बैठ अमृतपान कर चन्द्रमा को ही निगलने लगे। उसी वक्त सुदर्शन चक्रधारी ने उनका गला काट दिया। आज भी राहु-केतू रूपी असुर सनातन रूपी मानवधर्मी को निगलने पर तुले हुए हंै। आचार्य शिवानंद ने वर्तमान संदर्भ का कई उदाहरण देते हुए बताया कि पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव में पड़ समाज का एक वर्ग भारतीय संस्कृति को विकृत करने में तुला हुआ है। नशापान की बढ़ती प्रवृत्ति से समाज और पारिवारिक जीवन में क्लेश बढने लगा है। आज का युवा नशे के करीब और मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर से दूर हो घर गृहस्थी संभालने में असफल हो रहे हैं। हताशा में वे अपराध और नफरत के जाल में फंस आत्महत्या के कगार तक पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म जो सभी धर्म की जननी है आज इसका क्या हाल हो रहा है। समाज में चोरी, डकैती, नफरत, हिंसा, नशाखोरी, जातपात जैसे सामाजिक कुरीतियां बढ़ रही है, नक्सलवाद, आतंकवाद जैसे असुरी शक्तियां सनातन धर्म और देश के विकास में बाधक बनकर खड़ी है। इस पर धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक संगठनों को समय रहते सचेत होने की जरूरत है। कथा सुनने प्रतिभा अजय चन्द्राकर, सरपंच कमलेश्वरी ध्रुव, एलपी.गोस्वामी, बसंत सिन्हा, कृपाराम यादव, भानु बैस, टीकाराम ध्रुव, ललिता यादव, रामनाथ साहू, नंदनी साहू, खिलावन देवांगन, उत्तम बैस, प्रेमलाल, रामकुमार, खिलावन, लोकसिंह साहू, तोरण साहू सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।


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