धमतरी
दीयों की बिक्री बढ़ाने जिला प्रशासन ने की तैयारी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 10 अक्टूबर। पीएम के वोकल फॉर लोकल वाले आह्वान से प्रेरित होकर जिला प्रशासन ने इस बार दीपावली स्वदेशी भावना और परंपरागत संस्कृति के साथ मनाने के लिए ग्रामीण कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीयों को प्रमोट करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले के सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया है कि दिवाली बाजार में मिट्टी के दीयों की बिक्री में किसी प्रकार की बाधा न हो तथा उनसे किसी प्रकार का शुल्क न वसूला जाए।
स्वदेशी अपनाएं परंपरा सजाएं वोकल फॉर लोकल से जगमगाए हर आंगन का खुबसूरत स्लोगन देकर धमतरी कलेक्टर ने कहा कि ये पारंपरिक कारीगर हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं और उनके हस्तनिर्मित दीये हमारी लोककला और परंपरा की पहचान हैं। ऐसे में प्रशासन का दायित्व है कि उन्हें प्रोत्साहन मिले और उनका उत्साह बढ़े। इसके लिए उन्होंने नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में मिट्टी के दीयों की बिक्री करने वाले ग्रामीणों एवं कुम्हारों को करमुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।
ज्ञात हो कि पिछले कुछ सालों में होली दीवाली आदि त्योहारों में विदेशी रंग पिचकारी, रंगबिरंगी झालर बत्ती, पटाखे एवं गिफ्ट आइटमों से बाजार पटा जा रहा है। जिसके चलते घरेलू लघु उद्योग एवं पारम्परिक कारीगर संकट में आ गए। इसी को देखते हुए कुछ समय पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पड़ोसी देशों से आयातित सामानों का उपयोग करने की जगह स्वदेशी उत्पाद का इस्तेमाल करने का आह्वान देशवासियों से किया था।
नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति भानु चन्द्राकर एवं भखारा नपं अध्यक्ष ज्योति हरख जैन ने जिला प्रशासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हम अपने बाजारों में स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए सभी तरह की व्यवस्था उपलब्ध करवायेंगे। उन्होंने सभी लोगों से दीपावली पर्व हर्षोल्लास और सौहार्द के साथ मनाया का आह्वान करते हुए नागरिकों को मिट्टी के दीयों से अपना घर रौशन करने एवं अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुएं अपनाने की बात कही है।
कुरुद एसडीएम नभसिंह कोसले, तहसीलदार दुर्गा साहू, भूपेश चन्द्राकर ने भी जिला प्रशासन के इस रचनात्मक पहल को सफल बनाने आम नागरिकों से अपील की है कि वे चीनी या प्लास्टिक से बने कृत्रिम प्रकाश उत्पादों की बजाय मिट्टी के दीये जलाएं, जिससे स्थानीय कुम्हारों को आर्थिक सहयोग मिले और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। ऐसा करने से ही वोकल फॉर लोकल की भावना को भी बल मिलेगा।


