धमतरी

हाथियों के दल को पहाड़ से नीचे उतारने छोड़े गुड़-महुआ के लड्डू, ताकि बेहोश कर इलाज शुरू हो सकें
13-Nov-2024 1:18 PM
हाथियों के दल को पहाड़ से नीचे उतारने छोड़े गुड़-महुआ के लड्डू, ताकि बेहोश कर इलाज शुरू हो सकें

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 13 नवंबर।
शिकार के लिए लगाए पोटाश बम की चपेट में आकर घायल हुए हाथी का इलाज नहीं हो पाया है। जंगल सफारी से बुलाए डॉक्टरों की टीम भी मौजूद रही, पर 48 घंटे बाद भी हाथी को एंटी डोज नहीं दिया जा सका। अभी भी 30 से ज्यादा हाथियों का दल बांसी डोंगरी पहाड़ी पर मौजूद है। पहाड़ी से नीचे आने का इंतजार है। रेस्क्यू ऑपरेशन को 3-4 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया। 

पहाड़ी के नीचे संभावित विचरण क्षेत्र में जगह-जगह दवाइयों का एंटी डोज बनाकर रखा जा रहा है। इसे गुड़ और महुआ के साथ मिलाकर दवा लड्डू बनाकर कई स्थानों पर रख दिया गया है, ताकि महुआ की गंध से हाथी पहाड़ी से नीचे उतरेंगे। इसके बाद घायल शावक को एंटी डोज दिया जाएगा।

ज्ञात हो कि पोटाश बम के विस्फोट से एक शावक हाथी घायल हो गया। उसके जबड़े और पैर में गंभीर चोट आई है। रायपुर से जंगल सफारी से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को भी बुलाया गया है। 

11 नवंबर को दिनभर सिकासेर दल तक पहुंचकर घायल हाथी को उपचार देने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें वे सफल नहीं हुए। हाथियों का यह दल दूसरे दिन भी वन कक्ष क्रमांक 324 के बासीडोंगरी पहाड़ी में मौजूद रहा। पहाड़ी की ऊंचाई करीब 400 फीट है, जहां हाथियों का दल घायल शावक हाथी को घेरकर रखा हुआ है। ऐसी स्थिति में मंगलवार को भी इलाज सुविधा नहीं दे सके।

रेस्क्यू अभियान 4 दिन स्थगित
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरूण जैन ने बताया कि रेस्क्यू टीम एक बार हाथियों के नजदीक भी पहुंच गया था। रेस्क्यू टीम से सिकासेर हाथी दल करीब 150 से 200 मीटर दूरी पर था, लेकिन हाई रेंज होने के कारण डार्ट गन का इस्तेमाल नहीं कर सके। इस गन को चलाने के लिए 30 से 40 फीट का रेंज चाहिए होता है। ऐसे में रेस्क्यू अभियान को 3-4 दिन बाद फिर से शुरू करेंगे।  


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