धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरूद, 6 सितंबर। अन्य राज्यों की तरह प्रदेश के सामाजिक-आर्थिक विकास के साधन के रूप में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने की नेक नियत से सरकार ने राज्य गठन के दो साल बाद छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की स्थापना की थी। देश विदेश के टूरिस्ट को आकर्षित करने यहाँ के पर्यटक स्थलों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, प्रचार प्रसार जैसे बुनियादी कामों की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को दी गई। इसी के तहत कुरुद-भांठागाव में आधुनिक साज सज्जा युक्त मोटल का निर्माण कराया गया था। जो अब रख रखाव के अभाव में कबाड़ खाना में तब्दील हो गया है।
ज्ञात हो कि बस्तर एवं गंगरेल बांध में आने वाले पर्यटकों को रास्ते में ठहरने के लिए सर्व सुविधा युक्त आवसीय व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तत्कालीन पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कुरुद से चार किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे भाठागांव में करीब एक करोड़ से अधिक की लागत से मोटल का निर्माण कराया था। तब के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने अगस्त 2008 में अपने सहयोगी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, अजय चन्द्राकर, राजेश मूणत आदि की मौजूदगी में इसका उदघाटन किया था।
शुरुआत में तो इसका संचालन मंडल द्वारा किया जा रहा था। फिर सरकार ने इन केंद्रों को निजी क्षेत्र को सौपने का निर्णय लिया। भाठागांव सडक़ किनारे करीब तीन एकड़ भूमि के मध्य में बने शानदार मोटल की हालत आज भूत बंगले जैसे हो गई है। रख रखाव के आभाव में शानदार फर्नीचर, एसी एवं किमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कबाड़ में बदल गए हैं। कभी आगंतुकों को विलासिता का अहसास दिलाने वाले खुबसूरत शोफे टेबल खुले आसमान तले अपने भाग्य को कोस रहे हैं। कमरों में दरारें, शीलन, पलंग और दरवाजों को दीमक चट कर रही हैं। मेंटनेंस का आलम यह है कि लोकार्पण शीलालेख भी दो टुकड़ों में विभाजित होकर कचरे के ढेर में पड़ा है। पहले मोटल को किराये पर दिया गया था, तब मोटल पर शराबखोरी और अय्याशी का अड्डा होने की तोहमत लगी थी। अब तो पिछले दस सालों से यह बंद पड़ा है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि एक बार फिर से किसी भाटिया ग्रुप को इसे किराये पर दिया गया है। उनके द्वारा मोटल में छिटपुट मरम्मत का काम कराया जा रहा है।




