धमतरी

भाठागांव शीत केन्द्र में रोज दो लाख का दूध हो रहा तैयार
02-Sep-2024 4:07 PM
भाठागांव शीत केन्द्र में रोज दो लाख का दूध हो रहा तैयार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 2 सितंबर।
आधुनिक टेक्नोलॉजी और एआई के इस दौर में मानव श्रम की घटती मांग को ध्यान में रख लोगों को स्वरोजगार से जोडऩे का जतन क्षेत्र में कामयाब होता नजर आ रहा है। क्षेत्रिय नेतृत्व की ईच्छाशक्ति से तैयार कौशल उन्नयन के केन्द्र बुनकर, मछली, मुर्गी पालन, बढ़ाई, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रॉनिक, पलम्बर, पेंटिंग एवं दुग्ध उत्पादन जैसे कामों के लिए मानव संसाधन तैयार कर सैकड़ों लोगों को रोजगार दिलाने में सफल हुए है। 

कुरुद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भाठागांव में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्या. द्वारा संचालित दुग्ध शीत केन्द्र की भूमिका को लेकर की गई पड़ताल से पता चला कि यहाँ से प्रतिदिन 5 हजार लीटर से अधिक दूध संग्रहित, उपचारित कर राजधानी भेजा जाता है। जिसके चलते क्षेत्र के 15 सौ लोगों को रोजगार और 2 लाख रुपये की आवक रोज होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इजाफा हो रहा है। 

विधायक अजय चन्द्राकर के प्रयास से शुरू हुए इस मिल्क चिलिंग प्लांट में फिलहाल 5 हजार लीटर क्षमता के बीएमसी लगे हैं। जहाँ क्षेत्र की तीन दर्जन ग्रामीण समितियों के माध्यम से 4 से 6 हजार लीटर दूध की आवक हो रही है। 
बताया गया कि कुरुद विधानसभा के ग्राम मोंगरा, कातलबोड़, चर्रा बंजारी, राखी, बगौद थूहा, कोलियारी, नवागॉव, मौरीकला, नारी, कठौली, गोजी, खर्रा, परस_ी, धूमा, दर्रा, सोनपुर, आलेखुटा, कोडेबोड  चिंवरी, रावनगुड़ा, संकरी कोड़ापार, खुसरेंगा, मुरा, सिरसिदा, चारभाठा, गुदगुदा, परेवाडीह, भेंडरी, गिरौद, सौंगा, अरौद, बोडऱा, राकाडीह, नवागांव,भोथीडीह, बूढ़ेनी, परसूटठी, अमलीभाठा, परेवाडीह, मोहरेंगा, करेली, हरदी, बेलौदी, धौराभाठा, कुंडेल, खैरझिटी, मेघा, करेली छोटी, सांकरा, कुर्रा आदि के पशुपालकों से समितियों के माध्यम से संग्रहित दूध को शीत केन्द्र में लाकर गर्वर मशीन, लैक्टो मीटर एवं ईमेंट मशीन की सहायता से जांचा परखा जाता है। फिर दूध को 4 घंटे तक 4 अंश सेंटिग्रेड में ठंडा कर मिल्क वाहन से दुग्ध महासंघ रायपुर भेजा जाता है। 

सुपर वाईजर रेवाराम साहू ने बताया कि भखारा क्षेत्र के लिए सेमरा में भी मिनी प्लांट लगाया गया है। ज्ञात हो कि सिचाई विभाग के पुराने भवन में 2015 मंत्री अजय चन्द्राकर ने भाठागांव में शीत केन्द्र की स्थापना की थी। लेकिन आज भी यहाँ कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। समुचित भवन, स्टाफ क्वाटर, बाउंड्री वाल, नियमित कर्मचारियों की कमी के चलते यह केन्द्र अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा है। रामलला यादव, गंगाराम साहू, पुणिया बाई आदि पशुपालको ने बताया कि पहले केन्द्र सरकार द्वारा प्रति लीटर दूध के आधार पर पशु पोषण आहार के लिए पौने चार रुपये का अनुदान दिया जाता था लेकिन विगत 3-4 सालों से उसे बंद कर दिया गया है। बहरहाल क्षेत्र में बुनकर समितियों के बाद पशुपालकों ने भी अधोसंरचना विकसित होने का लाभ उठातें हुए खुद को स्वरोजगार से जोड़ा है। साथ ही औरों को भी इस दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया है।


अन्य पोस्ट