धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 9 अगस्त। जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर रांवा आयोजित हुआ, जिसमें 158 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें से अधिकांश आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर लिया गया। बाकी आवेदनों के निराकरण के लिए समय-सीमा दी गई है।
विधायक धमतरी ओंकार साहू ने कहा कि जिला प्रशासन आपके द्वारा पर आया है। आप अपनी समस्याओं, शिकायत और मांगों को अधिकारियों के समक्ष रखें। अधिकारियों से कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने का प्रयास करें। जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर रांवा में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पशुधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, उद्यानिकी, खाद्य, जल संसाधन, राजस्व, विद्युत, श्रम, वन, मत्स्य विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। शिक्षा विभाग की ओर से सरस्वती सायकल योजना के तहत 10 बालिकाओं को साइकिल वितरित किया गया। वहीं स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद विभाग द्वारा चिकित्सा शिविर भी लगाया गया था, जिसमें बीपी, शुगर, सिकलीन, बुखार, सर्दी-खांसी के 175 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर नि:शुल्क दवाईयां दी गयी। इसके साथ ही साफ-सफाई और गरम एवं ताजा भोजन सेवन करने की सलाह दी। आयुर्वेद विभाग द्वारा भी सुप्रजा कार्यक्रम के तहत गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी। साथ ही आयुर्विद्या, काढ़ापान और पोषण के संबंध में भी जानकारी दी गई। 158 मरीजों का भी आयुर्वेद पद्धति से उपचार किया।
अटल टिंकरिंग लैब में विद्यार्थियों के विज्ञान मॉडल को देखा
कलेक्टर नम्रता गांधी ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रांवा का निरीक्षण किया। स्कूल के अटल टिंकरिंग लैब में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विज्ञान, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मॉडल्स को देख प्रसन्नता व्यक्त की। अटल टिंकरिंग लैब में बच्चों द्वारा ऑटोमेटिक रिएक्सीस एंटीना, एंटी थीप सिस्टम, रैन अलर्ट विंडो, ओवर टेकिंग अलर्ट सिस्टम, मिनी रोबोट, स्मार्ट रेलवे स्टेशन इत्यादि तैयार किया गया था।
इस अवसर पर कलेक्टर ने गोपिका साहू, भूमिका साहू, सुभाषिणी साहू, गोपेन्द्र आदि विद्यार्थियों से चर्चा की और थ्री डी प्रिंटर सहित लैब में रखे आवश्यक उपकरणों की जानकारी ली। कलेक्टर ने इन बच्चों को जल संरक्षण और ई-वेस्ट का बेहतर प्रबंधन कर रोचक मॉडल तैयार करने कहा। अटल टिंकरिंग लैब का उद्देश्य है कि बच्चों को नए इन्वेंटर्स के रूप में विकसित करना। इन लैब्स के ज़रिए युवाओं में जिज्ञासा, रचनात्मकता, और कल्पना को बढ़ावा दिया जाता है. साथ ही, इन लैब्स में डिज़ाइन मानसिकता, कम्प्यूटेशनल सोच, अनुकूली शिक्षा, भौतिक कंप्यूटिंग जैसे कौशल भी विकसित किए जाते हैं. इन लैब्स में गतिविधि आधारित शिक्षा दी जाती है, जिससे युवा दिमाग सामाजिक समस्याओं के लिए अपने विचारों को आकार दे सकते हैं. इन लैब्स में बच्चे अलग-अलग वैज्ञानिक विचारों के साथ प्रयोग कर सकते हैं, सीख सकते हैं, विकसित कर सकते हैं और अवधारणाएं बना सकते हैं। इन लैब्स में रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, विज्ञान, 3 डी प्रिंटर, सेंसर जैसे उपकरणों से जुड़ी स्वयं-करें किट भी दी जाती हैं।


