धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नगरी, 11 अक्टूबर। अठाईस गाँव के सर्व आदिवासी समाज ने एकजुट होकर लगाया नारा स्कूल सरकारी हे नांव के, असल म हे हमर गाँव के, जी हाँ यह नारा गुंजा है। अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए अठाईस गांव से आये सैकड़ों सर्व आदिवासी समाज के महिला पुरुष के बीच। यहाँ पालकों में बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंता भी दिखी, जोश भी दिखा और संवाद कर कुछ समाधान भी निकाला गया।
स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट विद्यालय सिंगपुर, मगरलोड में जब से माँ भी स्कूल आएगी एवं युवा वर्ग शैक्षिक संवाद कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है, तब से यहाँ के पालकों में शिक्षा के प्रति गजब की जागरूकता आई है। अब पालक अपने अपने घरों में बच्चों से स्कूली गतिविधियों पर बातचीत करने लगे हैं। प्रतिदिन कोई न कोई पालक विद्यालय आकर शिक्षक तथा प्राचार्य से मिलते हैं। पालकों की जागरूकता से अब इस विद्यालय का शैक्षिक वातावरण बदल रहा है जिसका परिणाम आगामी दिनों में अवश्य दिखाई देगा। अब यहाँ के पालकों को यह बात समझ आ गई है कि पालकों की सक्रियता एवं सहयोग के बिना केवल विद्यालयीन प्रयास से बच्चों का भला नहीं हो सकता। जब भी शिक्षा में भागीदारी की बात आती है तो आदिवासी समाज की ओर शासन प्रशासन का ध्यान जाता है।
शासन की मंशा भी यही है कि आदिवासी समाज ज्यादा से ज्यादा सक्रिय होकर अपने विद्यालय को प्रत्यक्ष सहयोग दे। कहना न होगा कि स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट विद्यालय द्वारा पालकों से लगातार संवाद किये जाने से सिंगपुर क्षेत्र के अठाईस गाँव के सर्व आदिवासी समाज ने भी इस बात को भली भांति समझा है। यही कारण है कि सिंगपुर क्षेत्र के ध्रुव समाज,कंवर समाज एवं कमार समाज के प्रमुखों ने इस अंचल की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने का मन बनाया। इस हेतु सबसे पहले समाज के मुखिया लोगों ने आपस में दो दौर की बैठक की। बैठक हेतु अ_ाइस गांव के ध्रुव समाज के सचिव गोकुलराम ध्रुव, मगरलोड विकासखण्ड के मीडिया प्रभारी टिकेश्वर कुंजाम,बूढ़ादेव मंदिर के पुजारी रोहित ध्रुव,कंवर समाज के मुखिया कौशल दीवान,बसन्त दीवान, खड़मा ग्राम पंचायत के उप सरपंच गजेंद्र दीवान तथा कमार समाज से लाल साय पहारिया,राकेश पहारिया, खम्मन बाई ने मोर्चा संभाला। ध्रुव समाज के सचिव गोकुल ध्रुव ने पूरे अठाईस गांव में आमंत्रण भिजवाया जिसका परिणाम रहा महिला एवं पुरुषों की समान भागीदारी।
सिंगपुर के बूढ़ादेव मंदिर परिसर में सर्व आदिवासी समाज द्वारा आयोजित इस अनूठे रचनात्मक संवाद कार्यक्रम में रामभुवन मरकोले व्याख्याता ने संवाद की शुरुआत की। उन्होंने संवाद के दौरान इस बात पर जोर दिया कि माता पिता की सक्रियता से ही बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है। अत: प्रत्येक माता पिता को अत्यधिक सक्रिय होकर विद्यालयीन गतिविधियों से जुडऩे की जरूरत है। उन्होंने अपनी माँ का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी माँ अनपढ़ होते हुए भी पढऩे के लिए सदैव प्रेरित करती थीं। मैं जब तक पढ़ता था तब तक मेरी मां रात्रि जगती थी। आज मैं जो भी हूँ उस निरक्षर माँ के कारण हूँ। संवाद के अगले क्रम में स्वामी आत्मानन्द के प्राचार्य डॉ व्ही पी चन्द्रा ने उपस्थित पालकों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों में भी सामान्य वर्ग के बच्चों जैसे ही दिमाग होता है। जन्मजात जाति आधार पर कम या ज्यादा दिमाग किसी के पास नहीं होता। जिन्हें अवसर मिलता है उनका दिमाग स्वत: बढ़ते जाता है। इसके लिए एक्सपोजर विजिट जरूरी है।
अवसर देने के आधार पर ही बच्चे सफल और असफल होते हैं। आज देश में हजारों आदिवासी बच्चे कठिन से कठिन परीक्षा को पास कर रहे हैं। इस तरह की परीक्षा में सफलता के पीछे शिक्षक से ज्यादा कहीं माता-पिता का योगदान रहता है। आज नागालैंड का आदिवासी समाज शिक्षा पर अपनी आय का अस्सी प्रतिशत खर्च करता है।
उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता शिक्षा है। अभी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में शिक्षा नहीं है इसी कारण हम न तो शिक्षा के लिए कोई योजना बनाते हैं और न ही शिक्षा के लिए बड़ा इन्वेस्ट करते हैं,जबकि शत प्रतिशत यह सत्य है कि शिक्षा से ही आदिवासी समाज तरक्की कर सकता है। इसके अलावा कोई दूसरा बेहतर रास्ता नहीं है। बच्चों की शिक्षा दीक्षा में सबसे ज्यादा भूमिका माँ की होती है।
प्राचार्य द्वारा पालकों को आह्वान किया गया कि वे आज और अभी से ही विद्यालयीन गतिविधियों को प्रभावी बनाने हेतु विद्यालय से जुड़ें। शिक्षकों से संवाद करें। पालक और विद्यालय दोनों मिलकर बच्चों की शिक्षा दीक्षा को बेहतर बना सकते हैं। इस शैक्षिक संवाद कार्यक्रम को टिकेश्वर कुंजाम द्वारा आभार प्रकट करने के बाद विराम दिया गया।पालकों ने इस अवसर पर पुन: दुहराया की इस तरह के संवाद कार्यक्रम प्रति माह अनिवार्यत: किये जायेंगे। स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त शिक्षकों के निवेदन पर सर्व आदिवासी समाज के लिए आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में मुख्यत: आदिवासी समाज के रघुराम ठाकुर, सुंदरलाल कुंजाम, अर्जुन ध्रुव, गुहाराम, यजमान गंगासागर, विदेशी राम नेताम, शिवचरण कुंजाम, चमन सोरी, टकेश्वर नेताम, हरिराम मरकाम, रमेश कंवर, हेमू मंडावी, रोहित ध्रुव, श्रीमती उतरा दीवान, सरिता मरकाम, तुलसी कंवर, लीलाबाई, सुरुज बाई, ईश्वरी, जगबाई, दूजबाई, सबत बाई, चैतीबाई, ज्ञान बाई, सुंदरी बाई, मानकी ध्रुव, डी पी बागड़े तथा विद्यालय के शिक्षकों में से रामकृष्ण साहू, प्रेमलाल साहू, कल्याण कौशल, टिकेश्वर साहू, गोविंद नेताम, वेदराम सिन्हा, हीरालाल ध्रुव, राधेश्याम साहू, शारदामणि साहू, रीना ध्रुव, मोनिका रावटे, दुलेश्वरी ध्रुव आदि उपस्थित थे।


