धमतरी

कुछ ने घर पर और कईयों ने सामूहिक रूप से खाया बोरे बासी
01-May-2023 2:59 PM
कुछ ने घर पर और कईयों ने सामूहिक रूप से खाया बोरे बासी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 1 मई । अपने भूपेश कका के आह्वान पर मजदूर दिवस के दिन हर खासोआम ने बोरे बासी खाकर मेहनतकश श्रमिकों के प्रति सम्मान प्रकट किया। हालांकि इस बार बेवक्त की बारिश के चलते मौसम बासी खाने लायक नहीं है, फिर भी कांग्रेसी नेताओं ने रात की बोरे बासी खाकर सुबह फोटो अपने स्टेटस में लगाने में देर नहीं की।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति,लोक परम्परा को बढ़ावा देने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले बरस 1 मई मजदूर दिवस के दिन बोरे बासी खाकर श्रम का सम्मान करने का अनुरोध किया था। पहले साल लोगों ने इसका जमकर स्वागत किया। इस बार सामूहिक रूप से बोरे बासी खाने के लिए सोमवार को अलग अलग इंतजाम किया गया।

 ब्लॉक कांग्रेस कुरुद एवं भखारा की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक बासी खाकर मजदूर दिवस मनाने का कार्यक्रम बनाया गया है। मंडी अध्यक्ष नीलम चंद्राकर ने मंडी परिसर में रेजा हमाल मजदूरों के संग बासी खाई। इस मौके पर उन्होंने बताया कि मजदूर दिवस के दिन छत्तीसगढिय़ा मुख्यमंत्री ने बोरे बासी खाने की परंपरा शुरू कर श्रमिकों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का मान बढ़ाया है ।

 जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष भरत नाहर ने बासी खाते अपनी फोटो शेयर कर कहा कि छत्तीसगढ़ में बासी की परम्परा सदियों पुरानी है, इसे मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों के सम्मान से जोडऩे का काम हमारे कका ने किया है।  नपं अध्यक्ष तपन चंद्राकर ने बताया कि मुझे बचपन से सिलपटी चटनी, चेंच भाजी, प्याज के साथ बोरे बासी खाना बेहद पसंद है।

भखारा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कोसरे ने माना कि छत्तीसगढिय़ा अस्मिता के प्रतीक बन चुके सीएम बघेल ने मजदूर भाइयों के सम्मान और छत्तीसगढ़ के संस्कृति की पहचान के तौर पर बोरे बासी खाने की परंपरा डाली, जिससे आज सूट-बूट धारी अफसर भी चाव से बासी खाने लगे हैं।

कुरुद कांग्रेस अध्यक्ष आशीष शर्मा ने बताया कि इस बार हमने ग्राम पंचायत कुहकुहा में मजदूर सम्मान समारोह एवं बासी खाने का प्रोग्राम बनाया है, जिसमें पार्टी नेता ग्रामीण मजदूरों के साथ बैठकर बासी खाएंगे।

सरपंच संघ उपाध्यक्ष थानेश्वर तारक का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बासी खा और खिलाकर बता दिया कि सही मायने में वे ही छत्तीसगढ़ संस्कृति के पैरोकार हैं।

जनपद अध्यक्ष शारदा साहू ने बताया कि मुख्यमंत्री जो करते और कहते हैं उसका छत्तीसगढिय़ा जनमानस में गहरा प्रभाव पड़ता है। मजदूर दिवस के दिन बोरे बासी खाने का असर गांव गांव में नजर आ रहा है।

नपं उपाध्यक्ष मंजू प्रमोद साहू ने बताया कि ठेठ छत्तीसगढिय़ा सीएम श्री बघेल छत्तीसगढिय़ा संस्कृति को स्थापित कर, लोक उत्सव, तीज त्यौहारों में स्थानीयता को बढ़ावा देने के साथ साथ बासी एवं पारम्परिक व्यंजनों पर फोकस कर रहे हैं।


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