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भगवान राम ने जाति, धर्म, लिंग का भेद न कर सबके साथ समान व्यवहार रखने की दी सीख-चंद्राकर
10-Apr-2023 3:17 PM
भगवान राम ने जाति, धर्म, लिंग का भेद न कर सबके साथ समान व्यवहार रखने की दी सीख-चंद्राकर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 10 अप्रैल। रामायण की सबसे बड़ी सीख यह है कि हमें सबके साथ समान व्यवहार करना चाहिए। भगवान राम ने अपने पूरे जीवन काल में सभी के साथ समान व्यवहार किया। उन्होंने कभी भी लोगों को जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभावों से नहीं देखा, हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत बहुत गौरवपूर्ण है हमें अपने पूर्वजों के बताए मार्ग पर चलकर सभी के साथ सौहार्द्रता के साथ जीवन यापन करना चाहिए। उक्त बातें मंडी अध्यक्ष नीलम चन्द्राकर ने मानस मंच से कही।

कुरूद विधानसभा अंतर्गत ग्राम सेलद्वीप में त्रिदिवसीय राम कथा सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सभापति तारिणी कहा कि भगवान राम के चरित्र को साधारण भाषा में तुलसीदास ने रामचरित मानस में दर्शाया है वह अद्वितीय है, हमें  प्रयास  करना चाहिए की मानस की बातों को जीवन में उतार समस्या और तनाव से दूर हों, रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है बल्कि यह मनुष्य को सीख देता है। इसमें भगवान राम को पुरूषोत्तम कहा गया है, मां सीता की पवित्रता दर्शायी गई है। लक्ष्मण और भरत दोनों ही का अपने भाई के प्रति अथाह प्रेम दिखाया गया है। रामायण के हर चरित्र से कुछ न कुछ शिक्षा अवश्य प्राप्त होती है।

कृषि उपज मंडी समिति अध्यक्ष नीलम चंद्राकर ने कहा रामायण की सबसे बड़ी सीख है सबके साथ समान व्यवहार करना। भगवान राम ने अपने पूरे जीवन काल में सभी के साथ समान व्यवहार किया। उन्होंने कभी भी लोगों को जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभावों से नहीं देखा, उन्होंने सभी के साथ एक ही व्यवहार रखा। हमें धार्मिक रूप से एक होने की आवश्यकता है हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत बहुत गौरवपूर्ण है हमें अपने पूर्वजों के बताए मार्ग पर चलकर सभी के साथ सौहाद्रता के साथ जीवन यापन करना है, ग्रामीण समाज में किसी भी प्रकार का मनभेद नहीं होना चाहिए चाहे हम किसी भी समाज, धर्म या विचारधारा के लोग हों सभी का ध्येय सामाजिक एकजुटता के साथ गांव के विकास में भागीदार बनने का प्रयास करना चाहिए।

इस अवसर पर सरपंच पुष्पलता मणिराम साहू,  राजकुमार कंवर, नारायण साहू, चुरामन साहू, नेमचंद साहू, अवध साहू, झाडूराम, खुमान साहू, मुक्ता साहू, राधेश्याम, दानेश्वर, सोमन लाल साहू, तेजराम साहू, भूपेंद्र साहू, शेखन लाल, लालजी, पदम् साहू, गणपत ध्रुव, शोभाराम, उमेश साहू, बिट्टू साहू, लीलाराम, प्रदीप साहू, छत्रपाल कंवर, चित्रसेन यादव, प्रकाश साहू, भोजराज यादव, घनश्याम , गोपाल, पुरुषोत्तम साहू, भेषराम निषाद आदि उपस्थित थे।


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