धमतरी

500 लोगों को नोटिस, अवैध निर्माण का नियमितीकरण कराने आगे नहीं आ रहे लोग
20-Feb-2023 4:00 PM
500 लोगों को नोटिस, अवैध निर्माण का नियमितीकरण कराने आगे नहीं आ रहे लोग

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 20 फरवरी।
अवैध निर्माण को नियमितीकरण करने की घोषणा के बावजूद शहर में लोग आगे नहीं आ रहे हैं। करीब 500 लोगों को नोटिस दिया था, लेकिन अब तक सिर्फ 40 लोगों ने नियमितीकरण के लिए आवेदन किया है, जबकि यहां अवैध निर्माणों की भरमार हैं।

करीब सवा लाख की आबादी वाले धमतरी नगर निगम के सभी 40 वार्डों में अवैध निर्माण की बाढ़ आ गई हैं। आवास और दुकान बनाने के समय लोगों ने नक्शा कुछ और स्वीकृत कराया है। मौके पर कुछ और ही निर्माण किया हैं। नक्शा के मुताबिक निर्माण न कर उससे कहीं ज्यादा जमीन में अवैध निर्माण कर लिया गया हैं। राज्य सरकार ने ऐसे अवैध निर्माणकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए निर्माण कार्यों को नियमितीकरण की घोषणा की है, इसके बावजूद धमतरी में लोग आगे नहीं आ रहे हैं।

विभागीय सामंजस्य नहीं
नगर निगम और नगर निवेश विभाग के बीच सर्वे में जाने को लेकर सामंजस्य नहीं बैठने से यह काम लंबित हैं। नगर निवेश क्षेत्र में अवैध निर्माणों का नियमितीकरण के लिए 40 आवेदन मिले हैं। इनमें सर्वे के बाद 20 प्रकरणों का निराकरण कर नियमितीकरण के लिए मंजूरी मिल गई है। इससे नियमितीकरण शुल्क के रूप में 13 लाख जमा होंगे।

..तो करोड़ों रुपए की होगी आमदनी
धमतरी शहर में 30 से ज्यादा अवैध कालोनियां हैं। कालोनाइजरों ने राज्य सरकार के नियमों को धत्ता बताकर प्लाटिंग की और भोले लोगों को झांसे में लेकर अवैध रूप से कालोनियां भी विकसित कर दिया है। सुंदरगंज वार्ड, बठेना, सरदार वल्लभभाई पटेल, आमापारा, अंबेडकर वार्ड, बनियापारा, बांसपारा, अधारी नवागांव, श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड, जालमपुर, कोष्टापारा, ब्राह्मणपारा आदि वार्डों में स्थित इन कालोनियों का नियमितीकरण नहीं होने से आज भी यहां रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा हैं। यदि इन कॉलोनियों को नियमितीकरण कर दिया जाए तो शासन के खजाने में लाखों रुपए मिलेगा।

90 फीसदी आवास निर्माण नक्शा के अनुरूप नहीं
शहर में करीब 90 फीसदी आवास नक्शा के अनुरूप नहीं बना हैं। नियमितीकरण के रूप में अब उन्हें भारी भरकम राशि पेनाल्टी के रूप में जमा करना पड़ेगा। सदर बाजार हो या नेशनल हाइवे और शहर के अंदरूनी बस्तियां, हर जगह अवैध निर्माण की भरमार हैं।
यही वजह है कि लोग नियमितीकरण के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।


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