धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नगरी,29 दिसंबर। मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं सिहावा विधायक डॉ.लक्ष्मी ध्रुव ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा जुलाई 2022 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिए जा रहे आरक्षण को निरस्त किए जाने पर राज्य सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण विधेयक पूर्ण बहुमत के आधार पर पारित किया गया है। इस विधेयक को विधानसभा में लाने महामहिम राज्यपाल स्वयं राज्य सरकार को निर्देशित की थी, कि आदिवासियों के 32फीसदी आरक्षण को उच्च न्यायालय ने कम कर दिया है। आज की स्थिति में आरक्षण शून्य है। राज्य सरकार ने दिसम्बर में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण बिल को पास कर जिसमें जनसंख्या के आधार पर आदिवासियों को 32 फीसदी अनुसूचित जाति को 13फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग को 27फीसदी एवं सामान्य वर्ग अति गरीब वर्ग को 4 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव पास कर राज्यपाल के समक्ष उसी दिन रात को मंत्रीमण्डलीय सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे राज्यपाल ने अध्ययन करने की बात कहकर रोक लिया।
उन्होंने कहा, राज्यपाल को विधानसभा में पारित विधेयक को रोकने व उस पर टीका टिप्पणी करने का संवैधानिक प्रावधान नहीं है। आज सभी विभागों में भर्तियां रूकी हुई है लोक सेवा आयोग के विज्ञापन में आरक्षण का प्रावधान नहीं रखा गया है। शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। राज्यपाल द्वारा उठाये गए 10 बिन्दुओं का जवाब दे दिया गया है। इसके बाद भी अनुमोदन नहीं होता है तो आरक्षित वर्ग के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। समाज कई साल पीछे चला जायेगा। मेरा राज्यपाल से सादर अनुरोध है कि समाजहित में शीघ्र निर्णय लेकर अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करें।


