दन्तेवाड़ा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दंतेवाड़ा, 18 जनवरी। आदिवासी संस्कृति के प्रचार - प्रसार के उद्देश्य से दंतेवाड़ा में ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन किया जा रहा है। जिले के चारों विकासखंडों —दंतेवाड़ा, गीदम, कुआकोण्डा एवं कटेकल्याण में विगत् शुक्रवार और शनिवार को विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गई। इनमें पारंपरिक लोकनृत्य, गीत-संगीत, खान-पान, वेशभूषा एवं अन्य सांस्कृतिक विधायें प्रमुख रूप से शमिल थी। उक्त विधाओं में प्रतिभागियों नें अपनी कला का प्रदर्शन किया।
उक्त आयोजन न केवल बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करता है बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन रहा है। विगत दिवस प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा दंतेवाड़ा जिले से ही बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का भी विमोचन किया गया। इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतियोगिता में कुल 12 विधाएँ शामिल की गई हैं।
विकासखंड स्तरीय समापन कार्यक्रम में विधायक चैतराम अटामी ने कहा कि बस्तर पंडुम हमारी सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। इस आयोजन में समूचे जिले के प्रतिभागियों ने 12 विधाओं में भाग लेकर अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इन सभी विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी जिला स्तर पर हमारे प्रतिनिधि बनकर आगे बढ़ेंगे।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए नई पीढ़ी में गर्व और उत्साह का संचार करते हैं तथा समाज में एकता और सहभागिता को भी बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा नें पारंपरिक व्यंजनों को चखकर देखा और उनकी सराहना करते हुए कहा कि बस्तर के व्यंजनों में स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और परंपरा की अनोखी झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल कला और संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समुदाय को अपनी जड़ों से जोडऩे में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री नाहटा ने प्रतिभागियों के उत्साह और आयोजन की भव्यता की प्रशंसा करते हुए सभी को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने हेतु बधाई दी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि, अधिकारी एवं प्रतिभागी मौजूद थे।


