दन्तेवाड़ा

बैलाडीला की पहाड़ी पर खदान खुलने का विरोध
05-Jan-2026 11:29 PM
बैलाडीला की पहाड़ी पर खदान खुलने का विरोध

कांग्रेस ने निकाली पहाड़ बचाओ यात्रा, भाजपा छोडक़र अन्य सियासी दलों का भी समर्थन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दंतेवाड़ा, 5 जनवरी। जल- जंगल और ज़मीन को बचाने के संकल्प के साथ दंतेवाड़ा में कांग्रेस पार्टी ने पहाड़ बचाओ यात्रा निकाली। इस रैली में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा को छोडक़र अन्य सियासी दलों के युवाओं ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी प्रदर्शित की।

दंतेवाड़ा से राजा बांगला तक निकाली गई इस यात्रा में सैकड़ों युवा बाइक से पगडंडी और पथरीले रास्तों को पार करते हुए पहुंचे। राजा बंगला क्षेत्र बैलाडीला डिपॉजिट-4 में स्थित है, जिसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा रखा जाता है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बहुराष्ट्रीय एनसीएल कंपनी खनन की पूरी तैयारी कर चुकी है। आगामी 10 जनवरी को करीब एक दर्जन पंचायतों के साथ लोक जन सुनवाई प्रस्तावित है। इसी के विरोध में यह पहाड़ बचाओ रैली निकाली गई।

इस आंदोलन का नेतृत्व झीरम घाटी हमले में शहीद महेंद्र कर्मा के पुत्र और कांग्रेस नेता छविंद्र कर्मा ने किया। रैली के दौरान युवाओं ने जमकर नारेबाज़ी की और खनन के खिलाफ एकजुटता दिखाई। छविंद्र कर्मा ने कहा कि जल, जंगल और ज़मीन की रक्षा के लिए उनके पूर्वजों ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि अब बाहरी उद्योगपतियों को इस क्षेत्र में खनन की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

उन्होंने इस पहाड़ को आदिवासियों का जीता-जागता वरदान बताते हुए कहा कि यहां आदिवासी संस्कृति, सभ्यता, वन्यजीव और जैव विविधता मौजूद है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस क्षेत्र में उडऩ गिलहरी के साथ-साथ बाघों का विचरण क्षेत्र है। नैसर्गिक झरने और दुर्लभ औषधियां पाई जाती हैं। इसके फलस्यवरूप यह क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध है। अंधाधुंध प्राकृतिक संसाधनों का दोहन जैव विविधता को नष्ट करेगा। इस दौरान कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे।

 पहाड़ चलो अभियान उग्र रूप लेगा-जिला कांग्रेस महामंत्री

दंतेवाड़ा में कांग्रेस पार्टी का पहाड़ चलो अभियान आगामी समय में उग्र रूप अख्तियार करेगा। जिससे अभियान को नई दिशा मिलेगी। उक्त घोषणा जिला कांग्रेस पार्टी के महामंत्री विमल सलाम ने ‘छत्तीसगढ़’ से विशेष चर्चा में की।

महामंत्री ने आंदोलन की रूपरेखा पेश करते हुए कहा कि दंतेवाड़ा जिले की सीमा के उस पार बीजापुर जिला अंतर्गत भी आंदोलन का प्रसार किया जाएगा। जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शिरकत करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को कौडिय़ों के दाम लूट नहीं होने दी जाएगी। भाजपा सरकार द्वारा उद्योगपतियों को बढ़ावा दिया जा रहा हैं, इनमें गौतम अडानी और मुकेश अंबानी प्रमुख रूप से शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी पूंजीपतियों की सरकार है। आम जनता की परेशानियों से भाजपा की सरकार को कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस की मुहिम अनवरत् जारी रहेगी।

 

गूंजे ‘जंगल-जमीन बचाओ’ के नारे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बचेली, 5 जनवरी। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में बैलाडाला पर्वत श्रृंखला स्थित डिपॉजिट नंबर-4 राजा बांगला पहाड़ को खनन के लिए खोले जाने के विरोध में अब आक्रोश खुलकर सडक़ों से निकलकर पहाड़ों तक पहुंच गया है। जल, जंगल और जमीन को बचाने के संकल्प के साथ स्थानीय युवा, आदिवासी समाज और विभिन्न संगठनों ने पहाड़ पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए खनन के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका।

खनन के विरोध में युवाओं ने पहले बाइक रैली निकाली और फिर कई किलोमीटर पैदल चलकर राजा बांगला पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचकर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यदि पहाड़ों में खुदाई शुरू हुई तो इसका सीधा असर पर्यावरण, वन्यजीवों और पूरे बस्तर की पारिस्थितिकी पर पड़ेगा।

युवाओं ने चेतावनी दी कि सरकार की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। यह सिर्फ पहाड़ नहीं, हमारी जिंदगी है।

युवा नेता राहुल महाजन ने आरोप लगाया कि यह पूरा इलाका दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है और बस्तर को यहीं से ऑक्सीजन मिलती है। उन्होंने कहा कि आज भी वन्यजीवों का नियमित विचरण होता है। यह प्रकृति के साथ सीधा खिलवाड़ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन शुरू होते ही जलस्रोत सूख जाएंगे, जंगल उजड़ जाएंगे और आदिवासी अस्तित्व संकट में आ जाएगा।

राजनीतिक दलों का समर्थन

इस आंदोलन को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, और सीपीआई का भी समर्थन मिला। बड़ी संख्या में लोग पहाड़ पर बैठकर धरने में शामिल हुए और जंगल-जंगल-जमीन बचाओ के नारे लगाए।

कांग्रेस नेता छविंद्र कर्मा ने कहा— बस्तर के जंगल और पहाड़ ही यहां के लोगों को जीवन देते हैं। यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। हृरूष्ठष्ट–हृष्टरु की खदान क्रमांक-4 से लेकर 13 तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने ऐलान किया कि खदान क्रमांक-13 तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

उग्र जनआंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने जबरन खनन थोपने की कोशिश की, तो यह आंदोलन जनआंदोलन में बदल जाएगा।

स्थानीय आदिवासी समाज का कहना है कि राजा बांगला पहाड़ उनके इतिहास, संस्कृति और आत्मा से जुड़ा है, और इसे किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा।


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