‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 12 जुलाई। जिला साहू संघ धमतरी के द्वारा सामाजिक कार्यशाला समीक्षा बैठक आहुत कर समस्त तहसील अध्यक्ष, परिक्षेत्र अध्यक्ष एवं जिला पदाधिकारियों की उपस्थिति में एक जिला एक समान सामाजिक नियम का संकल्प लिया। साहू समाज द्वारा विभिन्न रचनात्मक कार्यों, सामाजिक नियमावली पर कार्यशाला का आयोजन कर समाज में व्याप्त कुरीतियों, विकृतियों एवं आडंबर पर रोक लगाते हुए सनातन संस्कृति के अनुरूप प्रत्येक संस्कार को सम्पन्न करने का निर्णय लिया।
जन्मदिन, सगाई, विवाह एवं अन्य सभी कार्यक्रमों पर केक काटना प्रतिबंधित किया गया। सगाई में केवल अंगूठी रस्म होगा, जय माला पहनाना या अन्य आभूषण देना प्रतिबंधित किया गया द्य विवाह में कपड़ा बांटना बंद किया गया द्य केवल निकटतम रिश्तेदार को ही उपयोगी कपड़ा दिया जाएगा। मृत्यु भोज को शांति भोज के नाम से जाना जाएगा, जिसमें केवल चावल, दाल, सब्जी ही परोसी जाएगी।
सामाजिक कार्यशाला से मिले आम सहमति /फीडबैक एवं 09जुलाई के बैठक में जिला कार्यकारिणी, तहसील अध्यक्षों, परिक्षेत्र अध्यक्षों से मिले सुझाव के आधार पर तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ संशोधित एकीकृत सामाजिक नियमावली संस्करण वर्ष 2023 के अध्याय- 2 सामाजिक आचार संहिता नियमावली का परिपालन कड़ाई से करने हेतु निर्देशित किया जाता है।
1. जन्म / जन्मोत्सव संस्कार
घर में नया मेहमान आने की सूचना ग्रामीण अध्यक्ष और पार -पांघर अध्यक्ष को देना अनिवार्य होगा। सामान्य प्रसव में छ_ी कार्यक्रम 6 दिवस के भीतर और सिजेरियन प्रसव में 1 माह में कराया जाए। छ_ी कार्यक्रम में माँ और बच्चे को साड़ी /कपड़े के जगह में उनके सुखद भविष्य मे आर्थिक सहयोग किया जाए।
आशीर्वाद स्वरुप मिले राशि का बैंक में डिपॉजिट कर जानकारी पांघर अध्यक्ष दी जाए। जन्मोत्सव कार्यक्रम में पश्चिमी संस्कृति का प्रतीक केक को पूर्णत: प्रतिबंधित किया जाता है। काँके पानी पीना अनिवार्य किया जाता है। केक काटना जन्म, जन्मोत्सव, सगाई, विवाह, वर्षगाँठ और भी अन्य कार्यक्रम में प्रतिबंध किया जाता हैं। छ_ी में रामायण कार्यक्रम आयोजन पर पारंपरिक सोहर मंगल गीत हो, फूहड़ता वाले गीत ना करें।
2. सगाई
अध्याय.2 के अनु.1 के परिपालन में सगाई का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। रिश्ता तय होने के समय दोनों परिवार, पांघर पदाधिकारियों /सदस्यों की उपस्थिति में सगाई संपन्न कराने की संपूर्ण बातचीत कर ली जावे (बाराती संख्या, विधि विधान /रस्म)। सगाई रस्म केवल अंगूठी पहना कर की जाए। सगाई में जयमाला पहनाना एवं केक काटना पूर्णत: प्रतिबंधित किया जाता है। सगाई में मंगलसूत्र व अन्य गहना देना प्रतिबंधित किया जाता हैं। प्री वेडिंग फोटोशूट एवं प्री वेडिंग शॉपिंग प्रतिबंध किया जाता है। सगाई कार्यक्रम यथासंभव दिन में करने का प्रयास करें।
3.विवाह संस्कार
विवाह गोधूलि बेला में संपन्न करने का प्रयास करें। विवाह में जयमाला के समय वर-वधू को ऊपर उठाना एवं जयमाला के समय वर-वधू का नाचना प्रतिबंधित किया जाता है। नेंग की राशि के लिए अनावश्यक दबाव नहीं किया जाए। वर पक्ष द्वारा दी गई राशि को सहर्ष से स्वीकार किया जाए। सामाजिकजनों की उपस्थिति में दोनों परिवार के द्वारा वैवाहिक रस्मों के संबंध में संपूर्ण बातचीत कर ली जाए। विवाह में जूता छिपाने का नेग पूर्णत:प्रतिबंधित किया जाता है। जीजा के गोद में साली को बिठाना पूर्णत: प्रतिबंधित किया जाता है। केवल निकटतम रिश्तेदार को ही उपयोगी कपड़ा दिया जाए।
4.शोक / मृत्यु संस्कार
अध्याय 2 के अनुच्छेद 16, 17 के परिपालन में शव में कफन केवल नजदीकी रिश्तेदार देंगे बाकी सभी पुष्पांजलि या स्वेच्छा से अर्थदान करेंगे। अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दिन केवल एक ही व्यक्ति द्वारा श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया जायेगा। शोकाकुल परिवार में विधवा माता का चूड़ी उतारने का कार्य सम्मानपूर्वक घर में की जाए।
तालाब का कार्यक्रम 12 बजे तक संपन्न करने का प्रयास करें। जलांजलि के समय तालाब में केवल 5 वस्तु चावल, दाल,तिल,जवा,गुड / दही ही रखे अन्य पर प्रतिबंध किया जाता हैं। तालाब में किसी भी प्रकार का कपड़ा भेंट ना करें। घर में श्रद्धांजलि वाले जगह में केवल मायके पक्ष से कपड़ा भेंट किया जावे बाकी सभी अपनी श्रद्धा सुमन भेंट करें। शांति भोज में केवल दाल, चावल, सब्जी की ही व्यवस्था की जाए। नाश्ता एवं कलेवा को पूर्णत: प्रतिबंधित किया जाता है। नियम उल्लंघन होने पर ग्रामीण साहू समाज द्वारा जिला साहू संघ धमतरी को आवेदन दिया जाए।
अन्य सभी ग्रामीण साहू समाज दिन में बैठक आहूत करे जिससे महिलाओं की उपस्थिति हो सके। एवं प्रकरणों की विवेचना मर्यादित रूप से की जाए। माह के प्रत्येक 1 तारीख को अपने अपने ग्राम में कर्मा आरती करें और सामाजिक, धार्मिक चर्चा करे। प्रत्येक गांवो में महिला प्रकोष्ठ,युवा प्रकोष्ठ का गठन अनिवार्य रूप से करे। सामाजिक कार्यक्रमों में अतिथियों का स्वागत- अभिनंदन, चंदन का टीका लगा कर करे और भेंट स्वरुप कपड़ा/फेटा को देना प्रतिबंधित किया जाता है। विधवा बहन, माताओं को सभी मांगलिक कार्यक्रमों में शामिल होने का अधिकार दिया जाता हैं। विधवा विवाह को आदर्श विवाह के रूप में मान्यता दिया जाता हैं।