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वैश्विक विशेषज्ञों ने रायपुर में संजीवनी कैंसर केयर फाउंडेशन के प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय सर्जिकल ऑन्कोलॉजी सम्मेलन को सराहा
10-Feb-2026 2:56 PM
वैश्विक विशेषज्ञों ने रायपुर में संजीवनी कैंसर केयर फाउंडेशन के प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय सर्जिकल ऑन्कोलॉजी सम्मेलन को सराहा

500+ विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता

रायपुर, 10 फरवरी। इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ने बताया कि राष्ट्रीय सम्मेलन दिनांक 7 एवं 8 फरवरी को छत्तीसगढ़ आंकोलॉजी एसोसिएशन, क्षेत्रीय कैंसर संस्थान रायपुर एवं संजिवनी कैंसर केयर फाउंडेशन, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

एसोसिएशन ने बताया कि सम्मेलन के दूसरे दिन भी देश-विदेश से आए 500 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कैंसर विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। विशेष रूप से गैस्ट्रिक एवं कोलोरेक्टल कैंसर सर्जरी में हो रहे नवीनतम वैश्विक नवाचारों पर गहन अकादमिक चर्चा हुई। दक्षिण कोरिया की वरिष्ठ कोलोरेक्टल सर्जन प्रो. ह्ये-जिन किम ने दो महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सत्रों को संबोधित किया।

एसोसिएशन ने बताया कि उन्होंने रेक्टल कैंसर में लैटरल पेल्विक लिम्फ नोड डिसेक्शन कब और कैसे विषय पर सटीक संकेतों, एनाटॉमी की स्पष्ट समझ एवं सर्जिकल निर्णय प्रक्रिया को विस्तार से प्रस्तुत किया।

एसोसिएशन ने बताया कि साथ ही उन्होंने फ्लोरेसेंस गाइडेड सर्जरी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तकनीक रीयल-टाइम विज़ुअलाइज़ेशन के माध्यम से सर्जरी की सटीकता और रोगी सुरक्षा को नई ऊंचाई दे रही है। दक्षिण कोरिया के ही प्रतिष्ठित विशेषज्ञ प्रो. सिउंग हो सॉन्ग ने कोलोरेक्टल कैंसर सर्जरी में तकनीक आधारित नवाचारों पर अपने अनुभव साझा किए।

एसोसिएशन ने बताया कि उन्होंने रेक्टल कैंसर सर्जरी के बाद संभावित जटिलताओं के मशीन लर्निंग आधारित जोखिम मूल्यांकन को प्रस्तुत किया, जिससे सर्जरी पूर्व योजना और रोगी प्रबंधन को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने लैप्रोस्कोपिक बनाम रोबोटिक सहायक सर्जरी के निष्कर्षों पर भी विस्तृत चर्चा की।

डॉ. यूसुफ मेमन, फाउंडर संजीवनी कैंसर केयर फाउंडेशन ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारतीय सर्जनों को वैश्विक अनुभव और नवीनतम तकनीकों से जोड़ते हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संवाद से न केवल सर्जिकल कौशल का विकास होता है, बल्कि आधुनिक तकनीकों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का मार्ग भी प्रशस्त होता है, जिससे अंतत: कैंसर रोगियों के उपचार परिणाम बेहतर होते हैं।


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