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एचएनएलयू में अंतरराष्ट्रीय कोलोक्वियम आयोजित
रायपुर, 8 फरवरी। एचएनएलयू ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कोलोक्वियम के मुख्य अतिथि, प्रो. जेम्स नेडुमपरा ने समकालीन व्यापार प्रथाओं में ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (एमएफएन) सिद्धांत के पालन में बढ़ते क्षरण के प्रति चेतावनी दी। उन्होंने वैश्विक व्यापार के वर्तमान परिदृश्य में उभर रहे विभिन्न मुद्दों पर भी प्रकाश डाला।
एचएनएलयू ने बताया कि कोलोक्वियम का उद्घाटन करते हुए प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, कुलपति, एचएनएलयू ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तीन दशकों के विकासक्रम का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्राप्त उपलब्धियाँ निर्धारित संरचनात्मक लक्ष्यों के अनुरूप नहीं रहीं।
एचएनएलयू ने बताया कि उन्होंने यह भी कहा कि भारत डब्ल्यूटीओ संबंधी विमर्श में सतर्कता की अवस्था से आगे बढक़र केंद्रीय भूमिका में आ गया है। अपने सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ एवं डब्ल्यूआईपीओ स्टडीज़, स्कूल ऑफ लॉ एंड टेक्नोलॉजी के माध्यम से, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के डब्ल्यूटीओ चेयर्स प्रोग्राम के अंतर्गत, डब्ल्यूटीओ यंग ट्रेड लीडर्स प्रोग्राम तथा सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल), आईआईएफटी के सहयोग से वैश्विक व्यापार में करियर, डब्ल्यूटीओ की 30-वर्षीय विरासत और भावी दिशाएँ विषय पर एक दिवसीय प्री-समिट अंतरराष्ट्रीय कोलोक्वियम का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
एचएनएलयू ने बताया कि इस कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सहभागिता की, जिनमें प्रो. जेम्स नेडुमपरा, प्रमुख, सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ, आईआईएफटी; सुश्री अमीता वर्मा दुग्गल, संस्थापक भागीदार, डीजीएस एसोसिएट्स; तथा सुश्री आरुषि श्रीवास्तव, यंग ट्रेड लीडर (भारत), डब्ल्यूटीओ, एवं ग्लोबल काउंसल में औद्योगिक नीति विश्लेषक शामिल थीं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली से जुड़ी प्रमुख चिंताओं के साथ-साथ भावी मार्गों पर भी प्रकाश डाला गया। आरुषि श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संस्थानों और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं से प्रारंभिक चरण में जुड़ाव के महत्व पर बल दिया।


