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5000 पर्सनलाइज्ड कैंसर ट्रीटमेंट का महत्वपूर्ण मील का पत्थर डॉ. रवि और समर्पित टीम ने किया हासिल
06-Jan-2026 2:55 PM
5000 पर्सनलाइज्ड कैंसर ट्रीटमेंट का महत्वपूर्ण मील का पत्थर डॉ. रवि और समर्पित टीम ने किया हासिल

उपचार की सोच बदल रहा रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल

रायपुर, 6 जनवरी। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल ने बताया कि वर्षों तक स्टेज 4 कैंसर का नाम सुनते ही डॉक्टर के कमरे में एक गहरी चुप्पी छा जाती थी। यह ऐसा निदान माना जाता था, जिसके आगे कोई रास्ता नहीं दिखता था। लेकिन आज ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में एक शांत लेकिन प्रभावशाली बदलाव हो रहा है।

हॉस्पिटल ने बताया कि बइस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं प्रसिद्ध मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रवि जायसवाल और उनकी समर्पित टीम, जिन्होंने हाल ही में 5,000 पर्सनलाइज़्ड कैंसर ट्रीटमेंट का महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। इस उपलब्धि का महत्व केवल मरीजों की संख्या में नहीं, बल्कि उस सोच में है, जिसने कैंसर उपचार की परंपरागत सीमाओं को तोड़ दिया है।

डॉ. जायसवाल ने बताया कि बड़ा सवाल-जब कैंसर अलग हैं, तो इलाज एक जैसा क्यों? अक्सर मरीज यह सवाल पूछते हैं अगर किसी को फेफड़ों का कैंसर है और किसी को स्तन कैंसर, तो दोनों को एक ही दवा क्यों दी जा रही है? इसका जवाब कैंसर इलाज की नई दिशा में छिपा है। पहले कैंसर का इलाज इस आधार पर किया जाता था कि वह शरीर के किस अंग से शुरू हुआ है। लेकिन आज उपचार मॉलिक्यूलर लेवल पर तय किया जाता है।

हॉस्पिटल ने बताया कि डॉ. जायसवाल की टीम उस ड्राइवर म्यूटेशन की पहचान करती है, यानी वह जेनेटिक कारण जो कैंसर को बढऩे की ताकत देता है। अगर दो अलग-अलग अंगों में हुए कैंसर का जेनेटिक कारण एक जैसा हो, तो उन्हें नियंत्रित करने का तरीका भी एक हो सकता है। यही कारण है कि आज इलाज सभी के लिए एक जैसा नहीं, बल्कि हर मरीज के जेनेटिक प्रोफाइल के अनुसार तय किया जाता है। आधुनिक उपचार के दो मजबूत स्तंभ-5,000 मरीजों तक सफल इलाज की यह यात्रा आधुनिक चिकित्सा की दो क्रांतिकारी तकनीकों पर आधारित है

डॉ. जायसवाल ने बताया कि टार्गेटेड थेरेपी-यह पारंपरिक कीमोथेरेपी से अलग है। जहां कीमोथेरेपी शरीर की तेजी से बढऩे वाली सभी कोशिकाओं को प्रभावित करती है, वहीं टार्गेटेड थेरेपी केवल कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास प्रोटीन या जीन पर असर डालती है। इससे इलाज अधिक प्रभावी होता है और साइड इफेक्ट भी कम होते हैं।

डॉ. जायसवाल ने बताया किइम्यूनोथेरेपी-यह इलाज कैंसर पर सीधे हमला नहीं करता, बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। यह कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में मदद करता है, ताकि शरीर खुद उन्हें नष्ट कर सके। अब हम सिर्फ बीमारी से लड़ नहीं रहे, बल्कि शरीर को खुद लडऩे के लिए सक्षम बना रहे हैं। ट्यूमर की मॉलिक्यूलर पहचान समझकर हम कई मामलों में एक गंभीर बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित किया जा सकने वाला रोग बना पा रहे हैं।

हॉस्पिटल ने बताया कि डॉ. जायसवाल और उनकी टीम का सबसे बड़ा योगदान स्टेज 4 कैंसर को लेकर सोच में बदलाव है। आज के दौर में स्टेज 4 को अब मौत की सज़ा नहीं माना जाता।


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