बिलासपुर
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 21 जनवरी। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को पेंशन विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने स्पष्ट किया कि सभी रिटायर्ड प्रोफेसरों को सातवें वेतनमान के अनुरूप पेंशन देने का निर्णय ले लिया गया है। इस जानकारी के बाद कोर्ट ने अवमानना याचिका को समाप्त कर दिया।
दरअसल, रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अंतर्गत सेवानिवृत्त हुए करीब 20 प्रोफेसरों को सेवा काल के अंतिम दिन तक सातवां वेतनमान दिया जा रहा था। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जब पेंशन निर्धारण किया गया, तो उसे छठवें वेतनमान के आधार पर तय कर दिया गया। इससे असंतुष्ट होकर प्रोफेसरों ने हाई कोर्ट का रुख किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए राकेश मोहन पांडेय ने आदेश दिया था कि सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को 120 दिनों के भीतर सातवें वेतनमान के अनुसार पेंशन दी जाए। निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं होने पर याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका दायर की।
अवमानना याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश की अनदेखी को गंभीर मानते हुए उच्च शिक्षा सचिव एस. भारतीदासन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को सचिव स्वयं हाई कोर्ट में उपस्थित हुए और स्थिति से अवगत कराया।
सुनवाई के दौरान सचिव ने कोर्ट को बताया कि सभी सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को सातवें वेतनमान के अनुरूप पेंशन देने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसके साथ ही वित्त विभाग ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब पेंशन भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी।
राज्य शासन की ओर से दी गई जानकारी पर संतोष व्यक्त करते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पेंशन की राशि बिना विलंब जारी की जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने अवमानना याचिका को निराकृत कर दिया।


