बिलासपुर
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 20 जनवरी। छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों से होने वाले सड़क हादसों और फसलों के नुकसान को लेकर राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हलफनामे के साथ जानकारी दी है। सरकार ने बताया कि फिलहाल प्रदेश के विभिन्न जिलों में 46 अस्थायी पशु आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 4,160 मवेशियों को रखा गया है।
सरकार ने स्थायी समाधान की दिशा में 36 गौधाम (स्थायी गौशालाएं) बनाने को प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इन गौधामों में पशुओं के लिए शेड, पेयजल और बिजली जैसी मूल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 मवेशियों को रखने की क्षमता होगी।
सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की है।
सुनवाई के दौरान पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव ने बताया कि फसलों की सुरक्षा के लिए कई गांवों में ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी पशु आश्रय बनाए गए हैं। फसल कटाई के बाद इन मवेशियों को उनके मालिकों को सौंप दिया जाता है या इच्छुक ग्रामीणों में बांटा जाता है। बेलतरा और सुकुलकारी ग्राम पंचायतों में यह मॉडल सफल रहा है।
सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप गृह विभाग, एनएचएआई और सड़क सुरक्षा एजेंसी के साथ समन्वय कर सड़कों पर मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के रजिस्ट्रार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पशु चिकित्सकों को गौशालाओं का नियमित निरीक्षण कर पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण, चारे और पानी की उपलब्धता पर मासिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।


