बिलासपुर
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 3 दिसंबर। सिविल लाइन थाने में पूर्व जिलाध्यक्षों विजय केशरवानी और विजय पांडेय के खिलाफ दर्ज एफआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस भवन से निकली रैली थाने पहुंची। महिलाएं, पदाधिकारी और कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए थाने के बाहर घंटों बैठे रहे। कांग्रेस का कहना है कि उनके नेताओं के विरुद्ध दर्ज एफआईआर जनहित आंदोलनों को दबाने की साजिश है।
कांग्रेस भवन से नवनियुक्त शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी और विजय पांडेय की अगुवाई में रैली निकाली गई। इसमें तखतपुर, सकरी, बिल्हा, तिफरा, सिरगिट्टी, बेलतरा, सीपत, मस्तूरी, रतनपुर, कोटा समेत कई क्षेत्रों से कांग्रेसजन शामिल हुए। सिविल लाइन पहुंचते ही रैली घेराव में बदल गई और कार्यकर्ता थाने के बाहर सड़क पर बैठ गए।
रैली की सूचना मिलते ही पुलिस ने सिविल लाइन थाने के बाहर भारी सुरक्षा तैनात कर दी थी। थाने का मुख्य गेट बंद कर पुलिस अफसरों, जवानों और महिला बल को मौके पर लगाया गया। थाने के आसपास का क्षेत्र जाम हो गया, हालांकि दो एंबुलेंस आने पर कार्यकर्ताओं ने खुद रास्ता खाली कराया।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि किसानों, बिजली बिल, जर्जर सड़क, रजिस्ट्री शुल्क और गरीबों के मकानों पर कार्रवाई जैसे जनहित मुद्दों पर चले शांतिपूर्ण आंदोलन से भाजपा सरकार घबरा गई है।
नेताओं का कहना है कि 27 नवंबर के कलेक्टोरेट घेराव में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी, फिर भी वाटर कैनन चलाकर और पोस्टर विवाद का बहाना बनाकर एफआईआर दर्ज की गई।
मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने आरोप लगाया कि समर्थन मूल्य और धान खरीदी में अव्यवस्था से किसान बेहद परेशान हैं। रैली के बीच पुलिस अफसरों की पहल पर विजय केशरवानी और विजय पांडेय खुद थाने पहुंचे और गिरफ्तारी दी। उन्हें मुचलके पर थाने से ही रिहा कर दिया गया। उनकी गिरफ्तारी तक कार्यकर्ता बाहर नारेबाजी करते रहे और विरोध दर्ज कराते रहे। सड़क, पानी, बिजली को लेकर पिछले सप्ताह किए गए प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के दोनों पूर्व जिला अध्यक्षों के विरुद्ध भाजपा नेताओं ने यह कहते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी कि आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।


