बेमेतरा

बेमेतरा पुलिस को मिले 10 प्रशिक्षु उपनिरीक्षक
03-Jun-2026 6:43 PM
बेमेतरा पुलिस को मिले 10 प्रशिक्षु उपनिरीक्षक

डीआईजी ने दिये सेवा और अनुशासन के मंत्र
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 3 जून।
जिला पुलिस बल को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा बेमेतरा जिले को 10 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों का जिला व्यवहारिक प्रशिक्षण के लिए लगभग एक वर्ष की अवधि हेतु पदस्थ किया गया है। इन प्रशिक्षु अधिकारियों के आने से जिले की पुलिसिंग व्यवस्था को नई ऊर्जा और कार्यक्षमता मिलने की उम्मीद है।
प्रशिक्षुओं ने राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी रायपुर से अपना बुनियादी प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इसके पश्चात उन्हें जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ किया गया है, जहां से कानून-व्यवस्था, अपराध विवेचना सहित पुलिस कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।

इस अवसर पर पुलिस उप महानिरीक्षक रामकृष्ण साहू ने पुलिस कार्यालय में जिले को प्राप्त 10 प्रशिक्षु अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें जिला पुलिस की कार्यप्रणाली, कानून-व्यवस्था संधारण एवं पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने उपस्थित अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया तथा कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डीआईजी रामकृष्ण साहू ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी आम नागरिकों को न्याय दिलाना और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ निराकरण करना है। उन्होनें प्रशिक्षुओं को अपराध विवेचना, मर्ग संच, शिकायत एवं आवेदन की निष्पक्ष और गंभीर जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही फरियादियों एवं आवेदकों के साथ शालीन, सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
 प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों सुरेश चौहान, सतवन सिंह, सुरेन्द्र कुमार, सूरज प्रकाश, जितयेन्द्र कुमार, निधि गुप्ता, कल्पना महंत, गीतांजली, चंचल पांडेय, ईश्वरी कुमारी डुप्ले को कानून-व्यवस्था ड्यूटी के साथ-साथ थाना स्तर के विभिन्न् कार्यों की बारीक जानकारी दी जाएगी। इसमें प्रधान आरक्षक मोहर्रिर कार्य, गश्त एवं रात्रि पेट्रोलिंग, सीसीटीएनएस संचालन, कोर्ट मोहर्रिर, संत्री ड्यूटी, मुलजिम पेशी, न्यायालयीन कार्यवाही तथा बीट आरक्षक के दायित्व शामिल हैं। यह प्रशिक्षण वरिष्ठ अधिकारियों एवं अनुभवी पुलिस कर्मियों द्वारा दिया जाएगा।
 

जिला व्यवहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों को जनसंपर्क, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन की वास्तविक कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा। इससे भविष्य में वे एक सक्षम, अनुशासित और जनोन्मुखी पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।


अन्य पोस्ट