बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 7 फरवरी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के प्राचार्य जे.के. घृतलहरे के मार्गदर्शन में चल रहे द्वितीय चरण के बालवाड़ी प्रशिक्षण के दूसरे दिवस का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण की शुरुआत कारेसरा की शिक्षिकाओं मिथिला अहिरवार, कामती ठाकुर और गोपेश्वरी साहू द्वारा मां शारदे की वंदना से की गई। इसके बाद अमोरा के शिक्षक श्याम कुमार सोनी ने प्रेरणा गीत प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन वाचन मोहलई स्कूल की शिक्षिका लक्ष्मी साहू ने किया।
सत्र की शुरुआत में डाइट प्राचार्य जे.के. घृतलहरे ने प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे गीतों और कहानियों के माध्यम से बच्चों में भाषा विकास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था की यह अवधि बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है।
प्राचार्य घृतलहरे ने जानकारी दी कि जिले में कुल 347 बालवाड़ी संचालित हैं। दो चरणों के प्रशिक्षण के बाद भी 96 बालवाड़ी शिक्षक अब तक प्रशिक्षण से वंचित हैं। उनके लिए तृतीय चरण का प्रशिक्षण 9 फरवरी से 11 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इसके लिए चारों विकासखंडों के बीईओ और बीआरसी को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि छूटे हुए सभी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण में शामिल कराया जाए।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रतिनिधि साकेत बिहारी ने बताया कि बालवाड़ी के अंतर्गत 5 से 6 वर्ष के बच्चों को कक्षा एक के लिए तैयार करने का कार्य किया जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि ईसीसीई कार्यक्रम के अंतर्गत शून्य से 8 वर्ष तक के बच्चों की समग्र देखभाल, विकास और शिक्षा पर ध्यान दिया जाता है। इस आयु वर्ग में बच्चों के व्यक्तिगत, सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक विकास की नींव रखी जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार बच्चों का लगभग 85 प्रतिशत मस्तिष्क विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है।
साकेत बिहारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ढांचे 5+3+3+4 और बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) के लक्ष्यों पर भी जानकारी दी। मास्टर ट्रेनर विधि शर्मा ने बच्चों के व्यवहार, पारिवारिक पृष्ठभूमि तथा अधिगम की तीन शैलियों—श्रवण, दृष्टि और करके सीखना—के बारे में जानकारी दी।
मास्टर ट्रेनर शीतल बैस द्वारा याददाश्त बढ़ाने से संबंधित गतिविधियां कराई गईं तथा विकास के विभिन्न आयामों—शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक और भाषाई विकास—पर चर्चा की गई। प्रशिक्षार्थियों को समूहों में बांटकर गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुति देने का अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षण के दूसरे दिवस का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। इस प्रशिक्षण के प्रभारी वरिष्ठ व्याख्याता जी.एल. खुटियारे हैं। कार्यक्रम में गोपेश्वरी साहू, लक्ष्मी साहू, कामती ठाकुर, सुमनलता साहू, कीर्ति एक्का, अर्चना राजपूत, मिथिला अहिरवार, सुभाष पाटिल, अरुण मरकाम, जयप्रकाश पात्रे, रामेश्वर प्रसाद नेताम, दिलीप कुमार, पोषण कुमार, यशोमती डोंगरे, ध्रुव कुमार साहू, सोनल नामदेव, अंजू देवांगन, देवकी नवरंग सहित अन्य प्रशिक्षार्थी उपस्थित रहे।


