बेमेतरा

धान खरीदी को लेकर किसानों की समस्याओं पर उठे सवाल
01-Feb-2026 7:00 PM
धान खरीदी को लेकर किसानों की समस्याओं पर उठे सवाल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 1 फरवरी। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर किसानों से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। राज्य में धान खरीदी की शुरुआत वर्ष 2000 के बाद हुई थी। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने धान और उससे जुड़ी नीतियों को चुनावी मुद्दा बनाया था।

धान खरीदी की शुरुआत के लगभग 25 वर्ष बाद भी किसानों और जनप्रतिनिधियों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि खरीदी के लिए एक समान और स्पष्ट मापदंड अब तक तय नहीं हो पाया है। इस वर्ष भी कई किसानों द्वारा धान खरीदी से वंचित रहने की बात कही जा रही है।

 खरीदी प्रक्रिया में आई दिक्कतों का उल्लेख

किसानों के अनुसार, इस वर्ष मानसून समय से पहले आने के बाद जुलाई-अगस्त में खाद की उपलब्धता को लेकर समस्या रही। कुछ किसानों ने खुले बाजार से खाद खरीदने की बात कही है।

धान पकने से पहले रकबा सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान भी कई किसानों ने आपत्ति दर्ज कराई और दावा किया कि उनकी उपज का आंकलन सही नहीं किया गया। किसानों ने सुधार के लिए आवेदन देने और संबंधित विभागों के चक्कर लगाने की जानकारी दी।

इसके अलावा, धान खरीदी केंद्रों में प्रतिदिन की खरीदी सीमा और टोकन व्यवस्था को लेकर भी किसानों ने असंतोष जताया। किसानों का कहना है कि तय सीमा के कारण वे समय पर अपना धान नहीं बेच पाए। कुछ किसानों ने यह भी कहा कि धान की जांच प्रक्रिया से वे असहज हुए।

31 जनवरी को कई क्षेत्रों से यह जानकारी सामने आई कि बड़ी संख्या में किसान धान खरीदी से वंचित रह गए।

 कर्ज अदायगी को लेकर किसानों की चिंता

धान न बिक पाने के कारण किसान बैंक ऋण की अदायगी को लेकर चिंता जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने धान बिक्री की उम्मीद में फसल ऋण लिया था और अब भुगतान को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ किसानों के अनुसार, इससे बैंकों की वसूली प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

जनप्रतिनिधियों के बयान

धान खरीदी से वंचित होने को लेकर भाजपा नेता जितेंद्र सिंह भुवाल ने कहा कि धान खरीदी प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक का असर शासन पर पड़ेगा। अधिकारियों को इस व्यवस्था पर ध्यान देने की आवश्यकता है। एक-एक दाना खरीदी का दावा इस बार पूरा नहीं हो सका।

जिला पंचायत सदस्य सुशीला जोशी ने कहा कि धान खरीदी के दौरान किसानों को कई स्तरों पर परेशानियों का सामना करना पड़ा। नीति और क्रियान्वयन में खामियों के कारण किसानों को समिति, तहसील और कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाने पड़े। अब किसान अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।

स्थिति पर उठ रहे सवाल

धान खरीदी से जुड़े मामलों में किसानों और जनप्रतिनिधियों द्वारा खरीदी की योजना, टोकन व्यवस्था, परिवहन और प्रशासनिक समन्वय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए स्पष्ट और समान मापदंड तय किए जाने की आवश्यकता है।


अन्य पोस्ट