बेमेतरा
अंतिम दिन अव्यवस्था से हुई परेशानी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 31 जनवरी। बेमेतरा जिले में धान खरीदी के अंतिम दिन प्रशासनिक अव्यवस्था और लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए जिला प्रशासन ने गुरुवार रात अचानक किसानों को फोन कर टोकन जारी किए। रातों-रात मिली सूचना के बाद किसान सुबह केंद्रों पर तो पहुंच ग़ए, लेकिन वहां उन्हें भारी कुप्रबंधन ,लंबी कतारे और समय पर तौल न होने की समस्या से जूझना पड़ा। अंतिम दिन तक जिले में 15 हजार से अधिक किसानों ने धान खरीदी शेष थी। ऐसे में रात में टोकन जारी करने की इस प्रक्रिया को किसान ‘प्रशासनिक खेल ’ करार दे रहे हैं। टोकन मिलने की शुरुआती खुशी जल्द ही हताशा में बदल गई।
11,225 किसान धान
बेचने से वंचित
जिले में धान बिक्री के लिए 1,65,082 किसानों ने पंजीयन कराया था, लेकिन अंतिम समय तक केवल 1,53,857 किसान ही अपना धान भेज पाए। रिकॉर्ड के अनुसार इस बार 11,225 किसान धान बेचने से वंचित रह गए, जिनमें 10,993 छोटे- मंझौले और 232 बड़े किसान शामिल है। अंतिम दिन करीब 7 हजार किसानों को टोकन जारी किए गए। लेकिन सीमित संसाधनों और समयाभाव के कारण बड़ी संख्या में किसान केंद्रों के चक्कर काटते ही रह गए। अब इन किसानों के सामने अपनी उपज खपाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
तकनीकी त्रुटियां ने बढ़ाई दिक्कत
तकनीकी और लिपकीय गलतियों ने भी किसानों को परेशान किया। खाती उपार्जन केंद्र के किस लालाराम निषाद पिछले चार दिनों से टोकन में हुई गलत प्रविष्टि सुधारने के लिए भटकते रहे। भौतिक सत्यापन और नोडल अधिकारी की टीप के बावजूद वे 56 क्विंटल धान नहीं बेच सके। यह मामला दर्शाता है कि कागजी कार्यवाही और आश्वासनों के बाद भी अंतिम समय पर सिस्टम पूरी तरह विफल रहा।
घंटों धूप में खड़े रहे किसान
धान खरीदी केंद्रों पर हालात बेहद खराब रहे। लोलेसरा केंद्र पहुंचे किसान ईश्वरी वर्मा और मनराखन साहू ने बताया कि वह सुबह 6 बजे ट्रैक्टर-ट्राली लेकर लाइन में लगे थे, लेकिन शाम 4 बजे तक उनका नंबर नहीं आया। कतेली, झाल, जिया और जेवरा जैसे केंद्रों पर भी यही स्थिति रहे, जहां वाहनों की लंबी कटारी लगी रहे। वरिष्ठ किसान अवधेश वर्मा का कहना था कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में धान बिक्री के लिए ऐसी व्यवस्था कभी नहीं देखी। कई किसानों को 8 से 10 घंटे इंतजार के बाद तौल करानी पड़ी, जिससे शारीरिक थकावट के साथ आर्थिक नुकसान भी बढ़ा।
नोडल अधिकारी आरके वारे ने बताया कि जिले के सभी 129 केन्द्रों पर टोकन लेकर आने वाले किसानों से नियमानुसार धान खरीदी की गई है।


