बेमेतरा
करमन में अमरूद की खेती में आई कमी, किसान अन्य फसलों की ओर बढ़े
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 29 जनवरी। बेमेतरा जिले के नवागढ़ विकासखंड के हाफ नदी तट पर स्थित ग्राम करमन अमरूद की खेती के लिए जाना जाता रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, एक समय गांव में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में अमरूद के बगीचे थे और क्षेत्रीय बाजारों में करमन के अमरूद की नियमित आपूर्ति होती थी। वर्तमान में गांव में अमरूद की खेती का रकबा घटकर सीमित रह गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बीते वर्षों में पानी की उपलब्धता, खेती से मिलने वाले लाभ, प्रोत्साहन और अन्य व्यावहारिक कारणों के चलते किसानों ने अमरूद के बगीचे हटाकर धान, अरहर, गेहूं और चने जैसी फसलों की ओर रुख किया है। किसानों के अनुसार इन फसलों से वर्ष में एक से अधिक बार आय प्राप्त होने की संभावना रहती है।
ग्राम करमन के किसान गजराज ने बताया कि वर्तमान में गांव में लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में ही अमरूद के बगीचे बचे हैं। उनके अनुसार, पहले कई परिवारों के पास अमरूद की खेती थी, जो अब नहीं रही। उन्होंने कहा कि अमरूद उत्पादक किसानों को पानी, खाद और प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं पर्याप्त नहीं मिल पाईं।
ग्रामीणों के अनुसार दिलीप, राजेश, शिवकुमार, धनसाय, मोहित और खेलन सहित कई किसान पहले अमरूद की खेती करते थे, जबकि अब वे इसे बाजार से खरीदते हैं।
नवागढ़ बाजार के व्यापारी छन्नू सोनी ने बताया कि वे पिछले कई दशकों से करमन के अमरूद को बाजार में बिकते देखते आए हैं। उनके अनुसार इस वर्ष बाजार में करमन के अमरूद की आपूर्ति नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि धान की खेती से अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिलने के कारण क्षेत्र के कई गांवों में बगीचे हटाए गए हैं।
कुछ किसान अब भी कर रहे मिश्रित खेती
गांव के युवा किसान महेंद्र भार्गव ने बताया कि वे अपने बगीचे में कुछ अमरूद के पौधों के साथ टमाटर, करेला, धनिया और सेमी की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार जल संकट, स्थायी देखरेख की आवश्यकता और उत्पादन में कमी जैसे कारणों से कई किसानों ने अमरूद के पौधे हटाए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गांव में आम के पेड़ भी हैं, लेकिन किसान अब फलोद्यान की ओर कम रुचि दिखा रहे हैं। महेंद्र भार्गव ने कहा कि उनके जानकारी में अब तक अमरूद उत्पादक किसानों से मिलने कोई विभागीय अधिकारी गांव नहीं आया है।
उद्यानिकी विभाग के उप संचालक हितेंद्र मेश्राम ने कहा कि वर्तमान में राज्य स्तर पर ऐसी कोई विशेष योजना नहीं है, जिसके तहत अमरूद उत्पादक किसानों को सीधे सहयोग दिया जा सके। उन्होंने बताया कि यदि किसान विभाग से संपर्क करते हैं तो उपलब्ध योजनाओं के तहत सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह विषय राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन से जुड़ा हुआ है और फील्ड स्टाफ के माध्यम से जानकारी ली जाएगी।


