बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 16 दिसंबर। जिला न्यायालय में वर्ष की अंतिम नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें सरोज नंद दास, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश,अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दीप प्रज्जवलन कर लोक अदालत का शुभारंभ कर कार्यक्रम में उपस्थित न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण व न्यायिक कर्मचारीगण को अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण करने हेतु प्रोत्साहित कर शुभकामनाएं दी गई।
अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लोक अदालत की विशेषता बताते हुए कहा कि पक्षकारों के मन में पुराने समय से चल रही वैमनस्यता को दूर करने के लिए लोक अदालत बहुत अच्छा माध्यम है। यह एक राष्ट्र के प्रति सेवा है। जिसमें हने बढ़ बढक़र अपनी सहभागिता देनी चाहिए तथा न्यायालय में लंबित मामलों के अधिक से अधिक निराकरण कर सौहाद्रपूर्ण वातावरण का निर्माण कर राष्ट्र के विकास में सहयोग प्रदान करना चाहिए।
3 करोड़ 5 लाख 66 हजार रूपये अवार्ड राशि का हुआ वितरण
जिले के 9934 प्री-लिटिगेशन व लंबित प्रकरणों को निराकरण हेतु रखा गया था, जिसमें से राजस्व प्रकरण, विद्युत विवाद बैंक प्रकरण व बीएसएनएल प्रकरणों का निराकरण कर कुल 68,43.086 रूपये की वसूली की गई। न्यायालय में लंबित 25 अपराधिक प्रकरण, 28 सिविल प्रकरण, 15 पारिवारिक प्रकरण, 12 एनआई एक्ट धारा 138 प्रकरण, 20 मोटर दुर्घटना दावा च 2731 अन्य प्रकरण का निराकरण कर कुल 2.37,23,601 रूपये का अवार्ड पारित कर जिलें में रिकॉर्ड अनुसार 3,05,66,687 रूपये की समझौता राशि वसूली गई।
लोगों को किया जागरूक
नेशनल लोक अदालत में नालसा एवं सालसा योजनाओं एवं अभियानों की व्यापक प्रचार-प्रसार करने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा योजनाओं,अभियानों एवं कानूनी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में न्याय वृक्ष एवं द्वार तोरन बनाकर प्रदर्शनी के माध्यम से नेशनल लोक अदालत में आये पक्षकारों को नालसा एवं सालसा द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी तथा न्याय सबके लिए संदेश देते हुये बाल विवाह एवं बलात्कार पीडि़ता के गर्भ का चिकित्सीय समापन, मोटर यान अधिनियम, हिट एन रन, साइबर काईम, नि:शुल्क विधिक सहायता एवं सलाह व अन्य विधिक विषयों से संबंधित पाम्पलेट का वितरण किया गया।
पक्षकारों को पौधों का वितरण
नेशनल लोक अदालत में आये पक्षकारों को नि:शुल्क पौधा वितरण डेस्क से फलदार, छायादार पौधों का वितरण कर प्रोत्साहित किया गया। साथ ही पक्षकारों के लिए सेल्फी जोन भी रखा गया। समझौता करने वाले पक्षकरों को न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा तुलसी का पौधा भेंट कर प्रोत्साहित किया। यातायात जागरूता एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत् जागरूकता शिविर का आयोजन।
न्यायाधीश ने समझाईश देकर कराया राजीनामा -
नेशनल लोक अदालत में पति, जेठ, जेठानी, सास व ससुर गाली गलौज देते हुए मारपीट कर शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशान करने का प्रकरण पेश हुआ था जिसे न्यायिक मजिस्ट्रेट, मो. जहांगीर तिगाला द्वारा रिश्तो की अहमियत को बतातें हुए समझाईश दिये जाने पर दोनों पति एवं पत्नि का विवाद बिना किसी डर, दबाव एवं भय के स्वतंत्र सहमति के आधार पर आपसी राजीनामा किया गया। वही दूसरे प्रकरण बेटा बहू को डीजे में परधा रहे थे, जिसमें चाचा भतीजा नाचते नाचते आपस में धक्का मुक्का एवं हाथ में पहने हुए चूड़ा से मारपीट कर एक दूसरे को जान से मारने की धमकी देकर मारपीट करने का मामला पेश किया गया था। जहां पीठासीन अधिकारी द्वारा दोनों पक्षो के मध्य आपसी सहमति से राजीनामा कराया गया।
दो पक्षों के बीच हुए विवाद में हुए राजीनामा
पीठसीन अधीकारी श्रुति साहू के न्यायालय में दो पक्षों के बीच हुए विवाद के विरुद्ध धारा-294,323 सहपठित धारा-34 एवं 506 भाग-2 भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत मामला पेश किया गया था। उक्त प्रकरण में दोनों पक्षों द्वारा बिना किसी डर, दबाव व प्रलोभन के स्वेच्छापूर्वक अभियुक्तगण के साथ राजीनामा किया गया है।
परिवार न्यायालय में 13 मामलों को हुआ निराकरण तथा 6 परिवार हुए एक
कुटुम्ब न्यायालय में आज कुल 13 प्रकरणों का निपटारा हुआ जिनमें न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय नीलिमा सिंह बह बेल द्वारा विशेष प्रयास कर 9 दंपत्तियों को एक साथ सुलह-समझौता कर घर भेजा गया। एक प्रकरण में दम्पत्ति के 7 एवं 5 वर्ष के दो छोटे बच्चे हैं, जो कि इस ठंड में भी माता-पिता के साथ न्यायालय आये थे, इनका विवाह वर्ष 2017 में हुआ था एवं विवाह के पश्चात्त से पति-पत्नी के आपसी लड़ाई के कारण पत्नि पिछले कई वर्ष से अपने मायके में रह रही थी।


