बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 20 फरवरी। धान की खरीदी की तर्ज पर ओन्हारी (रवि) फसलों चना, सरसों, मसूर, अरहर, मूंगफली और सोयाबीन की सरकारी खरीद की प्रक्रिया शुरू की गई है। शासन की पीएम आशा योजना के तहत किसानों को उनके उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए जिले के चारों ब्लॉक में कुल 9 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं हालांकि केंद्रों की दूरी और बाजार भाव के उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसानों में मिला-जुला उत्साह देखने को मिल रहा है।
चारों ब्लॉक में 9 उपार्जन केंद्र बनाए
प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए बेमेतरा ब्लाक में दाढ़ी व खरसारा, साजा ब्लॉक में थानखम्हरिया , ठेलका, साजा व परपोड़ी, नवागढ़ ब्लॉक में नवागढ़ तथा बेरला ब्लॉक में बेरला एवं देवरवीजा को केंद्र बनाया है। इन केंद्रों पर फसल बेचने के लिए अब तक 8731 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। पंजीयन की प्रक्रिया 1 दिसंबर से शुरू हो चुकी है जो 28 फरवरी तक चलेगी।
सरसों और अरहर में मुनाफे की उम्मीद
कृषि विभाग का मानना है कि इस बार सरसों और अरहर की खरीदी अच्छी होगी। क्योंकि सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य बाजार भाव से अधिक है। अरहर 8 हजार रुपए व सरसों 6,200 रुपए प्रति क्विंटल है। जिले में सरसों की खेती लगभग 2000 एकड़ से में की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बेहतर दाम मिलने के कारण किसान केंद्रों तक पहुंचेंगे।
चना और मसूर को बाजार भाव की चुनौती
जहां सरसों में उत्साह है, वहीं चना और मसूर को लेकर संशय बना हुआ है। जिले में चने की खेती 51,155 हेक्टेयर और मसूर की 3,930 हेक्टेयर में हो रही है। चना 5,875 रुपए और मसूर 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन फसलों की बाजार भाव सरकारी दर से ऊपर जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसान सरकारी केंद्रों की बजाए खुले बाजार में उपज बेचना पसंद कर सकते हैं।
खरीदी कब होगी
फसलों की प्रकृति और कटाई के समय को देखते हुए अलग-अलग तिथियां निर्धारित की गई है। मूंग, उड़द, मूंगफली व सोयाबीन 15 दिसंबर से 28 फरवरी तक होगी। सरसों व अरहर 15 फरवरी से खरीदी प्रारंभ कर 15 मार्च तक। चना व मसूर 1 मार्च से 30 मई तक रखी गई है।
परिवहन और दूरी पर किसानों की चिंता
योजना में सबसे बड़ी बाधा केंद्रों की दूरी है। जिला मुख्यालय बेमेतरा में कोई केंद्र ना होने के कारण स्थानिय किसानों को 20 से 25 किलोमीटर दूर दाढ़ी, खंडसरा जाना पड़ेगा। किसान रामकुमार साहू के अनुसार लंबी दूरी के कारण परिवहन में और समय की बर्बादी होगी जिससे बचने के लिए कई किसान स्थानी मंडी हो या व्यापारी को ही कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर हो सकते हैं नवागढ़ ब्लाक में भी केवल एक केंद्र होने से किस पर दबाव बढ़ेगा।
विभागीय दावे , अपील
उपसंचालक कृषि एमडी डड़सेना ने बताया कि विभाग पूरी मुस्तादी से कम कर रहा है। किसानों को एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए उनसे लगातार संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरसों और अरहर की आवक इस बार रिकॉर्ड स्तर पर होगी और किसानों को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा। सरकार की यह पहल सराहनीय है लेकिन केंद्रों की संख्या बढ़ाने और गुणवत्ता मानको में लचीलापन लाने से ही पीएम आशा योजना का वास्तविक लाभ छोटे किसानों तक पहुंच पाएगा।


