बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 30 नवंबर। सेवा सहकारी समिति खाती में डीएपी खाद के वितरण के दौरान किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शासन ने समिति को मात्र 500 बोरी डीएपी भेजी थी, जबकि सोसायटी के अंतर्गत अलग-अलग सात गांवों के 1500 पंजीकृत किसान आते हैं। खाद की भारी कमी के कारण किसान आक्रोशित हो गए और आपस में विवाद की स्थिति बन गई।
मेन रोड खम्हरिया पर चक्काजाम
खाद नहीं मिलने से नाराज किसानों का जमवाड़ा मेन रोड खम्हारिया पर लगा, जहां नाराज किसानों ने चक्काजाम कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मौके पर थाना प्रभारी चंद्रदेव वर्मा, नायब तहसीलदार प्रदीप तिवारी, सोसायटी अध्यक्ष दुखित राम साहू और ग्राम खाती के उपसरपंच नेमीचंद साहू पहुंचे। उन्होंने किसानों को शांतिपूर्वक समझाया और शासन से जल्द ही और खाद मंगाए जाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसान वापस लौटे।
फसलों का होगा नुकसान, उत्पादन होगा कम
किसानों में अनुजराम सिन्हा, प्रकाश शर्मा, गौतम साहू, नारद चौहान, पीलूराम साहू, शंकर साहू, नानकू राम, अवधराम, सीताराम, कन्हैया, बिसनाथ, सनत साहू, संतराम, ढेलाउ, भूपेंद्र, दीनबंधु, रोहित, विनोद पटेल, श्यामलाल, तिरलोकी, भगवती, प्रेमलाल सहित कई किसान ने बताया कि जिस तरह से डीएपी की किल्लत है। उससे फसल को भारी नुकसान होगा। अनुमान से कम उत्पादन हो सकता है। अभी तो फिलहाल फसल को खड़ा करने के लिए खाद की बहुत जरूरत है।
डीएपी खाद न मिलने से किसानों को नुकसान
अशोक कुमार ने बताया कि फसल की शुरुआत में डीएपी से पौधों के विकास के लिए आवश्यक फास्फोरस और नाइट्रोजन मिलता है। रबी की बुआई के समय इसका उपयोग फसल की जड़ों को मजबूत करने और शुरुआती वानस्पतिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
नगद खरीदना पड़ेगा
किसानों ने बताया कि समितियों में उन्हें नियमित के अनुसार खाद मिल जाता है। वहीं इस वक्तवह धान नहीं बेच पाए हैं इसलिए नकद उनके पास नहीं है, जिससे बाजार से खाद नहीं खरीद पा रहे हैं और जैसे तैसे कर खाद खरीदने की तैयारी करते हैं तो काम भी देना पड़ता है। इस तरह से हम किसान दोहरी समस्या का शिकार हो रहे हैं।


