बेमेतरा

फसल नुकसान के बाद भी धान की बंपर आवक से प्रशासन चौकन्ना, सत्यापन के बाद ही होगी खरीदी
24-Nov-2025 3:28 PM
फसल नुकसान के बाद भी धान की बंपर आवक से प्रशासन चौकन्ना, सत्यापन के बाद ही होगी खरीदी

 बाहर से धान खपाए जाने की आशंका

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 24 नवंबर। जिले में धान खरीदी को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। मानसून सीजन में कम बारिश और अक्टूबर में बेमौसम वर्षा से फसलों को हुए नुकसान के दावों के बावजूद खरीदी केंद्रों पर धान की आवक ने प्रशासन को संदिग्ध धान खपाए जाने की आशंका के चलते चौकन्ना कर दिया है। इसी क्रम में मुआवजा और राहत राशि की मांग करने वाले किसानों को अब अपनी उपज बेचने से पहले पटवारियों व ग्राम सहायक से रकबे का सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

जिले के नवागढ़ तहसील में राजस्व विभाग ने ऐसे करीब 1500 से अधिक किसानों की सूची समिति प्रबंधक को जारी किया है, जहां पर फसल खराब होने का दावा किया था। साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारी विभिन्न समितियों में पहुंचकर धान बेचने वाले किसानों के फसल संबंधित आंकड़ों का मिलान कर रहे हैं। कम बारिश के कारण फसल उत्पादन में कमी और बेमौसम वर्षा से नुकसान के बाद भी फसल बीमा का लाभ लेने वाले किसानों के केंद्रों में धान की पर्याप्त आवक हो रही है।

7030 किसान 4 लाख 21000 क्विंटल से अधिक धान बेच चुके हैं

जिले की 9 तहसीलों के 7030 किसान 4,21,966 क्विंटल धान बेच चुके हैं। सर्वाधिक 2,462 किसानों ने बेमेतरा तहसील में 94,504 क्विंटल धान बेचा है, जबकि थानखम्हरिया में 953 किसानों ने 59,706 क्विंटल और बेरला में 2,142 किसानों ने 72,698 क्विंटल धान बेचा है। जिले के 129 धान खरीदी केंद्रों पर कुल 1,69,206 किसानों ने पंजीयन कराया है। प्रशासन की यह कार्यवाही खरीदी के प्रारंभ में ही संदिग्ध धान की आवक को रोकने के उद्देश्य से की जा रही है।

उपार्जन केंद्र प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश

उपार्जन केंद्र प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्र के किसानों का धान पटवारी एवं ग्राम सेवकों से सत्यापन के बाद ही लिया जाए। संबंधित किसानों की सूची भी समितियों को सौंप दी गई है।धान की आवक में तेजी आने और कम उत्पादन के बावजूद पूर्ण फसल बेचने के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों पर अब प्रशासन की कड़ी नजर है।

नवागढ़ ब्लॉक के 13 धान उपार्जन केंद्रों के लिए 1589 किसानों की सूची जारी की गई है, जिन्हें अपना धान बेचने से पहले सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। नवागढ़ के अलावा, बेमेतरा, बेरला, देवकर, दाढ़ी, भिभौरी, थानखम्हरिया और नांदधाट तहसीलों में भी फसल नुकसान का दावा करने वाले किसानों की सूची तैयार करने की जानकारी मिली है। जिले में इस वर्ष धान खरीदी संकट के दौर से गुजर रही है।

 

10 साल के औसत की अपेक्षा 61 फीसदी बारिश

 गौरतलब है कि बेमेतरा जिले में इस मानसून सीजन के दौरान दस साल के औसत की अपेक्षा केवल 61.5 प्रतिशत बारिश हुई है। जिले का 10 साल का औसत 906 एमएम है, जबकि इस सीजन में मात्र 558 एमएम बारिश दर्ज की गई। बेमेतरा में 41 प्रतिशत, दाढ़ी में 54 प्रतिशत और भिभौरी में 48 प्रतिशत जैसी बेहद कम बारिश हुई है। वहीं, थानखम्हरिया में 90 प्रतिशत और नांदघाट में 73 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के इस संकट के बाद अक्टूबर में हुई असमय वर्षा ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया था, जिसके बाद अब धान बेचने के लिए उन्हें राजस्व विभाग के कड़े सत्यापन की प्रक्त्रिस्या से गुजरना पड़ेगा बहरहाल धान बेचने के लिए किसानों को इस बार अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व में कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से लेकर से परेशान किसानों को धान बेचने में दिक्कत हुई है। इसके बाद टोकन को लेकर परेशान है। इस बीच अब बीमा का दावा करने वाले किसानों को सत्यापन के दौर से गुजरना होगा।

पटवारी और ग्राम सहायक करेंगे सत्यापन

तहसीलदार विनोद कुमार बंजारे 1कहा फसल नुकसान का बीमित राशि प्राप्त करने वाले किसान धान बेचने के लिए धान खरीदी केंद्र आते हैं तो उन्हें उत्पादन व क्षति की जानकारी का सत्यापन पटवारी व ग्राम सहायक से करना होगा। उपसंचालक कृषि के प्राप्त सूची के अनुसार नोटिस जारी किया गया है।


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