बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 15 दिसंबर। 10वीं 12वीं परीक्षा में इस बार कम अटेंडेंस वाले विद्यार्थियों को परीक्षा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करते हुए स्पष्ट किया है कि इससे कम उपस्थिति वाले किसी भी विद्यार्थी को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
निर्देश जारी होते ही शिक्षा अधिकारी संजय गुहे ने सभी स्कूलों से अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की पूरी सूची तत्काल उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए हैं।
ज्ञात हो कि स्कूलों में पहले इस तरह का कोई नियम नहीं था। निर्देशों में चेतावनी दी गई है कि यदि कोई संस्था अपात्र छात्रों के नाम छुपाती है यह 75 फीसदी से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र जारी हो जाते हैं तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्राचार्य की होगी।
इस संबंध में मंडल सचिव द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़े शब्दों में पत्र जारी किया गया हैं। ज्ञात हो कि इस बार 12वीं और 10वीं की परीक्षा 20 और 21 फरवरी से शुरू हो रही हैं।
जिले में इस वर्ष दसवीं के 13114 और 12वीं के 2018 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। पिछले वर्ष जिले में कुछ 119 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। आगामी बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू होगी। मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों को पत्र एवं पात्र विद्यार्थियों की सूची ईमेल के माध्यम से भेजनी होगी। जिससे प्राचार्य की प्रमाणित मोहर के साथ अनुमोदन करना अनिवार्य रहेगा। कुछ स्कूल अभी भी मैन्युअल अटेंडेंस पर निर्भर हैं, जिससे अनुपस्थिति की निगरानी प्रभावी तरीके से नहीं हो पाती। प्रशासनिक निर्देशों के बाद अब भी स्कूल तेजी से उपस्थित रिपोर्ट तैयार करने में जुड़ गए हैं ताकि पात्र और अपात्र छात्रों की सूची शीघ्र जारी की जा सके।
कम अटेंडेंस की यह है असली वजहें
जिले के अनेक स्कूलों में दसवीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों की उपस्थिति निर्धारित सीमा से नीचे पाई गई हैं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार बोर्ड परीक्षा नजदीक होने के बावजूद कई छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में नहीं आ रहे। विद्यार्थियों से बात करने पर पता चला कि कोचिंग और स्कूल के समय के टकराव के कारण वह उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते हैं। वहीं कुछ शिक्षण संस्थानों में विषयवार शिक्षकों की कमी के चलते कक्षाएं नियमित नहीं लग पा रही हैं। जिससे विद्यार्थी स्कूल आने में इच्छुक नहीं हैं। ज्ञात हो कि आजकल ऐसे चलन भी हो गए हैं कि बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे हैं, कभी स्कूल में पढ़ाई ठीक से नहीं होने के नाम पर तो कभी शिक्षकों की कमी हवाला देते हैं।


