बलौदा बाजार

फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं, अधूरा पाठ्यक्रम और शिक्षक उपलब्धता को लेकर स्कूलों में चिंता
30-Nov-2025 3:43 PM
फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं, अधूरा पाठ्यक्रम और शिक्षक उपलब्धता को लेकर स्कूलों में चिंता

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 30 नवंबर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं का टाइम-टेबल जारी कर दिया है। इस बार परीक्षाएँ पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 10 दिन पहले होंगी।

12वीं की परीक्षा 20 फरवरी से 18 मार्च तक होगी जबकि दसवीं की परीक्षा 21 फरवरी से 13 मार्च तक। पहले यह परीक्षाएं 1 मार्च से 28 मार्च के बीच होती थी। समय में इस बदलाव के कारण छात्रों के पास तैयारी का अतिरिक्त समय अब काम हो गया हैं।

जिले में पाठ्यक्रम अधूरा, शिक्षक संख्या कम

जिले के कई स्कूल अभी भी पाठ्यक्रम पूरा करने में लगे हैं। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार—छात्रों की संख्या: लगभग 3.5 लाख,  स्वीकृत शिक्षक संख्या-13,082,  कार्यरत शिक्षक-9045 हैं, वहीं 4037 पद रिक्त हैं।

स्कूल प्रबंधन के अनुसार केवल 65 से 70 फीसदी पाठ्यक्रम ही पूरा हो पाया है। कई शिक्षक प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों, विशेषकर एसआईआर सर्वे और मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य) में लगाए गए हैं, जिनकी वजह से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

प्रायोगिक परीक्षा 1 से 20 जनवरी तक

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने प्रायोगिक परीक्षाओं की तिथि भी घोषित की है। प्रायोगिक परीक्षाएँ 1 जनवरी से 20 जनवरी तक दो पालियों में होंगी। इससे शिक्षकों पर नियमित कक्षाओं और प्रायोगिक परीक्षाओं, दोनों का समन्वय करने का अतिरिक्त दायित्व बढ़ेगा।

 

विशेष कक्षाएँ आयोजित करने के निर्देश

कलेक्टर ने 10वीं और 12वीं के कमजोर छात्रों के लिए विशेष तैयारी कक्षाएँ 20 दिसंबर से आरंभ करने के निर्देश दिए हैं।

एसडीएम और डीईओ को— स्थल चयन,  भोजन की व्यवस्था,  लेक्चर चयन जैसे दायित्व सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

छात्रों और अभिभावकों की चिंता

समय में बदलाव और पाठ्यक्रम अधूरा होने से छात्रों और अभिभावकों में परीक्षा तैयारी को लेकर चिंता है। कई स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सीमित होने से नियमित शिक्षण प्रभावित हुआ है, जिससे छात्र दबाव महसूस कर रहे हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी संजय गुहे ने कहा—शिक्षक स्कूल में पढ़ाई कराने के साथ ही एसआईआर सर्वे और बीएलओ कार्य भी कर रहे हैं। दोनों कार्यों के समन्वय से यह प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।


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