बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 5 अक्टूबर। सूदखोरी मामले में बलौदाबाजार से रायपुर तक पत्रकारों की हुंकार गूंजी। प्रार्थी हेमंत कन्नौजे एवं कुछ अन्य पीडि़त सहित प्रेस क्लब के पत्रकारों ने रायपुर के आईजी से शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस सूदखोरों को जेल जाने से बचा रही है।
ज्ञात हो कि बलौदाबाजार जिले में हनी ट्रैप से भयादोहन के बाद दूसरी भयादोहन भी अब सर्वविदित है। जिसमें सूदखोरी के आड़ में भयादोहन का खतरनाक जाल बिछाकर न केवल निर्दोष लोगों की जि़ंदगी तबाह की जा रही है, बल्कि सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों को भी टारगेट किया जा रहा है।
हाल ही में पीडि़त हेमंत कनौजे द्वारा उजागर किए गए मामले ने पूरे जिले को हिला दिया है। ब्लैंक चेक और स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवाकर जरूरतमंदों को फँसाना, मनमाने ब्याज दरों पर वसूली करना, विरोध करने वालों को झूठे मुकदमों की धमकी देना—यह सब सुनियोजित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है।
पीडि़त शिकायत दर्ज कराने चक्कर लगा रहे थे , तब पीडि़त अपनी व्यथा लेकर प्रेस क्लब बलौदाबाजार पहुँचे। प्रेस क्लब के पत्रकारों ने न केवल पीडि़त की आवाज़ समाचारो में उठाया बल्कि इसे जनहित का मुद्दा मानकर कलेक्टर, एसपी और कोतवाली थाना प्रभारी आदि तक ज्ञापन भी सौंपा।
प्रेस क्लब बलौदाबाजार के लामबंदी एवं कलेक्टर दीपक सोनी के दबाव बढऩे पर पुलिस ने आखिरकार आरोपी पिंकी सिन्हा और उसके पति हेमलाल सिन्हा के विरुद्ध धारा 420, 506, 34 के तहत अपराध दर्ज किया, लेकिन आज तक गिरफ्तारी नहीं की गई ।
प्रार्थी हेमंत कन्नौजे एवं कुछ अन्य पीडि़त सहित प्रेस क्लब के पत्रकारों के साथ मुलाकात के दौरान रायपुर के आईजी अमरेश मिश्रा ने पुलिस के नए विवेकाधिकार के संबंध में बताया कि 7 साल के सजा वाले धारा में पुलिस को अपना अधिकार है गिरफ्तार करें या न करें।
वहीं उक्त संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र श्रीवास्तव से पूछे जाने पर बताया कि चूंकि केस पुरानी संहिता भादस की धारा 420 में रजिस्टर्ड हुआ है, जो सात साल की सजा वाला संज्ञेय एवं गैर जमानतीय हैं, ऐसी स्थिति में एफआईआर होने के बाद पुलिस को अपराधी को शीघ्र गिरफ्तार करना चाहिए। ऐसा किसी भी शीर्ष न्यायालय का कोई निर्देश नहीं है कि गिरफ्तार करना पुलिस की इच्छा पर है।


