बलौदा बाजार

निजी अस्पताल ने वसूले 10 हजार, मरीज का नहीं किया इलाज
29-Aug-2025 4:38 PM
निजी अस्पताल ने वसूले 10 हजार, मरीज का नहीं किया इलाज

मरीज को मेकाहारा रिफर किया गया था-डॉक्टर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार , 29 अगस्त। जिले में सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। दरअसल, पलारी विकासखंड के ग्राम सीतापार निवासी राजा ध्रुव एक सडक़ हादसे का शिकार हुए। डॉ. अशोक वर्मा के अनुसार, बलौदाबाजार जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उन्हें रायपुर मेकाहारा रेफर किया गया। लेकिन परिजनों के अनुसार, जिला अस्पताल में ही एक एंबुलेंस ड्राइवर ने उन्हें ओंकार नाम के निजी अस्पताल पहुंचा दिया। यहां परिजनों से 10 हजार रुपये वसूले गए, साथ ही इलाज भी नहीं किया।

रविवार को राजा ध्रुव आदिवासी समाज के एक जिला स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने बलौदाबाजार आए थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद लौटते वक्त सडक़ हादसे का शिकार हुए। हादसे में राजा का हाथ टूट गया, सिर और चेहरे पर गंभीर चोट आई। परिजनों ने उन्हें फौरन बलौदाबाजार जिला अस्पताल लेकर आए।

हम जिला अस्पताल लेकर आए थे लेकिन यहां थोड़ी सी पट्टी करने के बाद डॉक्टर वसीम ने कहा कि यहां ईलाज नहीं होगा, दूसरे जगह ले जाओ- परिजन

रेफरल सिस्टम का खेल

मेकाहारा रेफर करने के नाम पर राजा ध्रुव को एंबुलेंस में बैठाया गया। इस बीच रास्ते में एंबुलेंस ड्राइवर ने परिजनों को विश्वास में लिया और कहा मेकाहारा में बहुत समय लग जाएगा, वहां भीड़ ज्यादा है। ओंकार अस्पताल में तुरंत इलाज मिलेगा। गरीब और घबराए परिजन झांसे में आ गए।

परिजनों के मुताबिक, ओंकार अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती के नाम पर 10 हजार रुपये वसूले और इलाज शुरू नहीं किया।

मरीज के पिता ने कहा कि अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड के बाद भी कुछ फीस लगेगी कहा।

 परिजनों का यह भी आरोप है कि जो जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर वसीम रजा ही निजी अस्पताल में भी थे। पिता ने कहा कि जो डॉक्टर जिला अस्पताल में‘इलाज नहीं होगा कह रहे थे, वही प्राइवेट अस्पताल में इलाज के पैसे मांग रहे थे।

इस मामले में जब जिला अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा गया तो सिविल सर्जन ने कहा कि, हमारे यहां से मेकाहारा ही रेफर करते हैं. आगे की जानकारी नहीं है। 24 तारीख को एक मरीज राजा ध्रुव को जिला अस्पताल लेकर आये थे। प्राइमरी ट्रीटमेंट किया गया जिसके बाद मरीज को हमने हायर सेंटर भेज दिया था- डॉ. अशोक वर्मा, जिला अस्पताल सिविल सर्जन

प्राइवेट अस्पताल ने नहीं दिया कोई जवाब- इस मामले में ओंकार अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई लेकिन वर्जन देने से इनकार कर दिया गया। साथ ही पत्रकारों से बदसलूकी करने और धमकी देने का भी आरोप है।

इस मामले में जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश अवस्थी से बात करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि, आप डॉ. अशोक वर्मा को ही बताएं, मैं कुछ नहीं जानता।

मैं मुख्य कार्यपालन अधिकारी नहीं इनडायरेक्ट अधिकारी हूं। पहले जब मैं वहां सिविल सर्जन था तब मैं था, अब सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा हैं. वही डायरेक्टर अधिकारी हैं, वही सैलरी निकालते हैं. आप उनसे बात कीजिए.

 


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