बलौदा बाजार

पुल जर्जर, जगह-जगह गड्ढे, लोहे की छड़े बाहर निकली, हादसों को न्यौता
24-Aug-2025 5:48 PM
पुल जर्जर, जगह-जगह गड्ढे, लोहे की छड़े बाहर निकली, हादसों को न्यौता

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 24 अगस्त। बलौदाबाजार कसडोल रोड पर स्थित डोंगरीडीह घाट का 630 मीटर लंबा पुल हादसों को आमंत्रण दे रहा है। महानदी पर इस पुल पर निर्माण 1986 में गेमन इंडिया कंपनी ने किया था। रखरखाव के अभाव में अब यह जर्जर हालत में पहुंच चुका हैं। जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं, जिससे लोहे की छड़े बाहर झांक रही हैं। पुल की यह स्थिति हादसों को खुला न्यौता दे रही हैं।

यह पुल बलौदाबाजार को कसडोल, बिलाईगढ़, बिलासपुर, जांजगीर चंपा और रायगढ़ जैसे पड़ोसी जिलों से जोड़ता हैं। बीते कुछ वर्षों से इस पुल का कोई भी नियमित मेंटेनेंस नहीं किया गया हैं। पहले इसका रखरखाव लोक निर्माण विभाग के सेतु शाखा द्वारा किया जाता था लेकिन जब से यह मार्ग नेशनल हाईवे में शामिल हुआ है तब से पुल की मरम्मत और देखरेख का काम लगभग बंद हो गया हैं। पुल पर स्ट्रीट लाइट नहीं हैं। बरसात के समय मौसम में शाम ढलते ही पुल पर अंधेरा छा जाता हैं। ऐसे में वहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं हैं। खासकर दो पहिया वाहन चालकों के लिए यह सफर जानलेवा साबित हो रहा हैं। पुल की सतह से लोहे की छड़े और चैनल के टुकड़े बाहर निकल आए हैं जो अंधेरे में नजर नहीं आते।

 स्थानीय लोगों के अनुसार शाम को अंधेरे में इन लोहे के टुकड़ों से कई बार बाइक और कार चालक दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। पिछले एक महीने में ही 7 से 8 छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इस पुल की सतह पर दो दर्जन से भी अधिक गड्ढे बन चुके हैं। कुछ समय पहले तक पुल पर दो तीन बड़े गड्ढे थे लेकिन अब इनकी संख्या बढक़र 30 से 40 हो चुकी हैं। कई गड्ढे इतनी गहरी हो गए हैं कि अगर कोई दो पहिया वाहन चालक अनजाने में इसे गुजरता है तो गिरना तय हैं। बड़ी बात यह है कि पुल के कई हिस्सों में स्लैब की छड़ें और लोहे के चैनल ऊपर निकल आए हैं। बरसात में जब सडक़े गीली रहती है तब ये छड़े और गड्ढे और भी ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं।

अफसरों की उदासीनता से बढ़ी जनता की चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी पुल की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ना स्ट्रीट लाइट लगाई गई जा रही है ना गड्ढों की मरम्मत हो रही है और ना ही जर्जर हिस्सों को दुरुस्त किया जा रहा हैं। पुल के वर्तमान हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता हैं। जब तक यह पुल पीडब्ल्यूडी के अधीन था तब तक इसकी समय-समय पर मरम्मत होती रही।

 लेकिन अब यह एनएचए के अंतर्गत आ गई हैं। विभाग की उदासीनता का ही नतीजा है कि इतने महत्वपूर्ण पुल की हालत बद से बदतर होती जा रही है।

हर दिन गुजरते हैं 2000 से ज्यादा लोग

यह पुल ना सिर्फ बलौदाबाजार के ग्रामीण इलाकों के लिए बल्कि आसपास के हजारों लोगों के लिए रोजमर्रा की आवाजाही का जरिया हैं। अनुमान है कि प्रतिदिन लगभग 5000 से ज्यादा लोग इस पुल से गुजरते हैं। वहीं 2000 से अधिक छोटे बड़े वाहन स्कूल से आवाजाही करते हैं। लेकिन पुल की हालत ऐसी हो गई है कि वाहन चालक रोजमर्रा के इस सफर में भी डर के साए में चलते हैं। महानदी पर बना यह पुल वर्ष 1986 में तैयार हुआ था। उस वक्त गेमन इंडिया जैसी भारत की प्रमुख निर्माण कंपनी ने इसे तैयार किया था। इस कंपनी ने देश में सिर्फ दो ही जगह पर महानदी का पुल बनाएं एक उड़ीसा और दूसरा डोंगरीडीह में 3 साल की मेहनत के बाद बना यह पुल अब मरम्मत के अभाव में टूटने की कगार पर हैं।

शैलेश सूर्यवंशी एसडीओ,  एनएचएआई का कहना है कि डोंगरीडीह महानदी पुल में कई स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। मेंटेनेंस करवाया गया है, लेकिन बारिश की वजह से पेचवर्क उखड़ जाता हैं। कुछ दिनों पहले फिर से मेंटेनेंस वर्क का टेडर लगा हैं। जल्द ही महानदी पुल का मेंटेनेंस कराया जाएगा।


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