बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 24 जून। जिले में इस वर्ष प्री मानसून की बारिश ने निराश किया है। एक से 15 जून के बीच मात्र 25 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई जो पिछले 10 वर्ष के औसत के मुकाबले लगभग 50 फीसदी कम है। इस कारण न केवल खरीफ फसल की तैयारी प्रभावित हुई है बल्कि जल संकट और स्वास्थ्य समस्याएं भी बढऩे लगी हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार मानसून भले ही समय से पहले पहुंचा हो, लेकिन अब तक उसका असर जमीन पर नहीं दिख रहा हैं।
हर साल जून के पहले पखवाड़े में होने वाली बारिश को प्री मानसून सिस्टम का हिस्सा माना जाता है, जो खेती की तैयारी के लिहाज से बेहतर बेहद कम होती है। इस दौरान खेतों की जुताई और बोनी की शुरुआत की जाती है। इस बार सिस्टम कमजोर रहा, जिससे किसानों की तैयारी अधूरी रह गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्री मानसून सिस्टम से यदि अच्छी बारिश होती तो बोनी की प्रक्रिया लगभग पूरी हो जाती।
मानसून की समय से पहले दस्तक भी बेअसर
हालांकि राज्य में मानसून की एंट्री निर्धारित समय से 13 दिन पहले ही हो चुकी है, लेकिन जिले में इसका कोई ठोस असर दिखने को नहीं मिल रहा है न तो कोई मजबूत द्रोणिका बन रही है न ही चक्रवती परिसंचरण जैसी कोई ठोस प्रणाली सक्रिय हो पाई हैं। इससे क्षेत्र में बारिश की संभावनाएं कमजोर पड़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण बिहार और उसके आसपास एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है लेकिन उसका असर बलौदाबाजार जिले पर नहीं दिख रहा हैं।
तापमान में उतार-चढ़ाव उमस ने बढ़ाई परेशानी
बीते दिनों तापमान में लगभग 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई थी लेकिन अब दोबारा बढ़ोतरी शुरु हो चुकी हैं। रविवार को अधिकतम तापमान 33 एवं न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उमस की स्थिति लगभग बनी हुई है जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग के संकेत दिए हैं कि अगले कुछ दिनों तक तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
जुलाई में बेहतर बारिश की उम्मीद-मौसम विशेषज्ञ
मौसम विशेषज्ञ के डॉ. एन पी थॉमस का कहना है कि जुलाई में वर्षा की गतिविधियां अधिक सक्रिय होगी। जिले की औसत बारिश वर्ष बारिश 1050 मिली मीटर मानी जाती है। और इस बार 106त्न बारिश की संभावनाएं बताई गई हैं।
कम बारिश से दो बड़े संकट
खेती का असर खरीफ फसल की तैयारी में प्री मानसून बारिश की अहम भूमिका होती है। इस बार खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। कुछ हिस्सों में हुई हल्की बारिश खेतों के लिए पर्याप्त नहीं है, इससे भूमिका में देरी हो रही है जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जल संकट की आहट
जिले के कई हिस्सों में भूजल स्तर पहले से ही नीचे जा चुका है। शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए प्रमुख जलाशय छुईहा में जल भंडारण सीमित मात्रा में बचा है। अन्य जलाशय में भी स्थिति चिंताजनक है। यदि शीघ्र अच्छी बारिश नहीं हुई तो गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता हैं।


