बलौदा बाजार
महिला प्रसाधन नहीं, सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही
ट्रैफिक बेतरतीब तालाबों की भी सफाई नही
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 21 मार्च। पिछले लंबे समय से नगर पालिका के चुनाव को लेकर चल रही रंगत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद थम गई है स्थिति सामान्य हो गई है। 30 साल पुरानी नगर पालिका में फिर नई सरकार बनी है। वार्डवार पार्षद और नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में जनता ने अपना नुमाइंदा चुन लिया है। अब जिम्मेदारों की भारी है। अभी से यह सवाल किये जा रहे हैं कि विकास के आईने में कुछ नया दिखा पाएगी या पूर्व की भांति परंपरागत कार्यों के निर्वहन तक ही पूरी दौड़ रहेगी।
बहरहाल, शहर में नाली, पानी, बिजली, सडक़, शौचालय, जल निकासी जैसे जरूरी सुविधाओं को मुहैया कराने की जादोजहद खत्म नहीं हुई है। अव्यवस्थित सब्जी बाजार मुख्य मार्ग का अतिक्रमण गंदगी से अटे पड़े शहर की प्रमुख तालाब पार्किंग का अभाव महिला प्रधान जैसी कई मूलभूत सुविधाओं के लिए पालिका की ओर से कोई प्रयास नजर प्रयास नहीं नजर आ रहा है।
पहले से बने पार्कों की अनदेखी
शहर में आमजन की सुविधा और शहर के सौंदरीकरण को लेकर एक भी उद्यान या पार्क का निर्माण नहीं किया गया है। पहले जो पार्क बनाए गए हैं, वह भी इन दिनों अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे हैं। इस संबंध में अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में आमजन को नवनिर्वाचित अध्यक्ष से उम्मीद है कि महिलाओं तथा बच्चों के लिए पार्क का निर्माण करवाया जाए
शहर में कहीं पार्किंग नहीं, सडक़ पर गाडिय़ां
शहर के भीड़ वाले इलाकों में पार्किंग व्यवस्था न होने से दो पहिया वाहन चालकों के साथ राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन की ओर से शहर में पार्किंग जोन बना दिए जाएं तो यातायात व्यवस्था में सुधार हो सकता है। शहर के मुख्य मार्ग में दर्जन भर से अधिक बैंक हैं लेकिन किसी भी पार्किंग की सुविधा नहीं है। शहर में तीन से चार मंजिला इमारत में दुकान वह होटल तो बन गए हैं लेकिन पार्किंग की सुविधा नहीं है।
8 महीने पहले ही बनाए थे
45 चबूतरे आवंटन भी
मुख्य बाजार के सब्जी विक्रेता भी अपने चबूतरो की बजाय सडक़ों पर ही दुकान लगाने लगे हैं। नगरी प्रशासन ने अपनी पैनी पसारी योजना के अंतर्गत 30-35 और चबूतरे बनाये आठ माह पहले ही और लगभग 45 चबूतरे बनाये, इस तरह कुल चबूतरों की संख्या लगभग 200 के पास पहुंच गयी, मगर अभी हालत यह है कि चबूतरे फिर से खाली पड़े हैं और सडक़ों पर व्यापारी दिख रहे हंै। सभी चबूतरा का आवंटन भी कर दिया गया है।
नगर पालिका को आय का स्रोत बनाने की जरूरत
नगर पालिका के पास आमदनी का ठोस कोई ठोस स्रोत नहीं है। पुरानी व्यवस्था के तहत गृहकर, जलकर ही आमदनी का मुख्य साधन है। नगर पालिका अपने कर्मचारियों को हार मान वेतन के रूप में 25 लाख रुपए खर्च करती है। इसमें सफाई कर्मियों से लेकर सीएमओ तक शामिल है। वहीं अगर नगर पालिका की कमाई का हिसाब लिया जाए तो सालाना आमदनी औसतन 2 करोड़ की है। उसे आय का स्रोत बढ़ाने की जरूरत है।
अतिक्रमण से अटा है मुख्य मार्ग
कुछ माह पहले ही नगर पालिका ने पैदल मुसाफिरों के लिए हो पौने दो करोड़ की लागत से पाथवे बनवाया मगर लगता है यह पाथवे भी उन अतिक्रमणकारियों को थाली में सजाकर सौंप दिया हैं। रंग बिरंगी लाइटों से सजी आइसक्रीम की बड़ी-बड़ी गाडिय़ां 10 से 15 फीट तक फैले फलों सब्जियों और कपड़ों के लंबे चौड़े स्टॉल फुटपाथ पर लगे हैं।
योजनाओं पर जल्द काम शुरू करेंगे -अध्यक्ष अशोक जैन
इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन ने बताया कि शहर की प्रमुख समस्याओं जैसे तालाबों की सफाई मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण सब्जी बाजार की व्यवस्था पब्लिक टॉयलेट और पार्किंग की सुविधा को लेकर कार्य योजना तैयार की गई है। जल्द ही इस योजनाओं पर अमल शुरू किया जाएगा।


