बलौदा बाजार
7 हजार किसान नहीं बेच पाए धान, हड़ताल बता रहे वजह
इस साल 85 लाख 53 हजार, पिछले साल 87 लाख क्विंटल खरीदी हुई
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 3 फरवरी। धान की फसल को हर तरह से सपोर्ट मिला , जिले की औसत वर्षा 1030.5 मिली मीटर की तुलना में 1230.6 मिली मीटर का रिकॉर्ड तो बना ही, साथ ही धान खरीदी में बलौदाबाजार जिला प्रदेश में टॉप टेन में रहा।
जिले के 1 लाख 60 हजार 23 किसानों ने 129 सहकारी सेवा समिति के 166 केंद्रों में 85 लाख 53 हजार 960 क्विंटल धान बेचा है। जिसकी कीमत प्रति क्विंटल 2300 रुपये की दर से लगभग 1967 करोड़ रुपये है। पिछले साल लगभग 87 लाख क्विंटल खरीदी की गई थी, 1 लाख 67 हजार 814 पंजीकृत किसानों में से 7 हजार 791 किसानों ने धान समितियों की जगह अन्य जगह में बेचा है। बावजूद इसके धान खरीदी के मामले में बलौदाबाजार जिला टॉप टेन में शामिल है।
ज्यादा बारिश होने से शुरुआत में धान खरीदी कम हुई, साथ ही धान की अधिकांश फसल पकने में थोड़ी देर हुई। किसानों ने ऑनलाइन टोकन की सुविधा का फायदा उठाया।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पर्यवेक्षक सुरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि धान खरीदी के साथ साथ कस्टम मीनिंग के लिए निरंतर धान का उठाव किया जा रहा है। जिसके विरुद्ध मिल्स की ओर से 60 लाख 84 हजार 357 क्विंटल धान उठाव किया जा चुका है। शेष बचे 84 लाख 603 क्विंटल धान का उठाव जल्द कर लिया जाएगा।
समय-समय पर भुगतान से किसानों को राहत
सरकार द्वारा किसानों को धान खरीदी के एवज में समय पर भुगतान किया गया जिससे वे अगली फसल की तैयारी में जुट गए हैं 1967 करोड़ रुपये का भुगतान उनके खातों में सीधे ट्रांसफर किया गया जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
कस्टम मिलिंग के साथ तेजी से उठाव
कस्टम मिलिंग के लिए भी तेजी से धान का उठाव किया जा रहा है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पर्यवेक्षक सुरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि अब तक 60 लाख 84 हजार 357 क्विंटल धान का उपयोग किया जा चुका है जबकि शेष 24 लाख 69 हजार 603 क्विंटल धान का उठाव जल्द ही पूरा कर लेंगे
धान का बंपर उत्पादन
शुरू से ही अच्छी बारिश हुई नतीजा ये हुआ कि समय पर बोनी व रोपाई का काम पूरा हो गया मानसून आने के 40 दिन के भीतर ही कुल कोटो की 60 फ़ीसदी वर्षा हो चुकी थी धान के उत्पादन अच्छा होने के पीछे एक प्रमुख वजह प्रमाणित बीज व रासायनिक खाद की उपलब्धता भी रही कुछ कुछ मामलों को छोड़ दें तो अधिकांश इलाकों के किसानों को समय पर प्रमाणित बीज व रासायनिक खाद मिल गया जिसकी वजह से वे समय पर खेती के काम को कर सके और उनके धान की खेती बिछडऩे से बच गई समितियों की लापरवाही से कहीं-कहीं समस्याएं हुई, इस बार कीट पतंगो ने उस तरह धान की फसल पर हमला नहीं बोला
अव्यवस्था से किसानों को उठानी पड़ी परेशानी
धान खरीदी के दौरान कई बधाएं सामने आई, जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। राइस मिलर्स की हड़ताल के कारण धान के उठाव की प्रक्रिया प्रभावित हुई जिससे सोसाइटियों में धान रखने की जगह खत्म हो गई। जगह न होने के कारण कई किसानों को अपना धान वापस ले जाना पड़ा। इसके अलावा बारदानों की कमी भी किसानों के लिए मुसीबत बन गई। खरीदी केन्द्रों में पर्याप्त बोरे उपलब्ध न होने से धान भंडारण और परिवहन में समस्या आई इससे किसान फसल बेचने को लेकर परेशान दिखे।


