बलौदा बाजार

समय पर गैस डिलीवरी न मिलने की शिकायतें, कार्रवाई की मांग
10-Jan-2025 3:00 PM
समय पर गैस डिलीवरी न मिलने की शिकायतें, कार्रवाई की मांग

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 10 जनवरी।  जिला मुख्यालय हो या ग्रामीण क्षेत्र में गैस डिलीवरी की समस्या ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी न मिलने की शिकायतें बढ़ रही हैं। यह समस्या केवल विलंब तक सीमित नहीं है, बल्कि कई उपभोक्ता आरोप लगा रहे हैं कि उनके नाम से बुक गैस सिलेंडरों को किसी और को बेचा जा रहा है।

भाटापारा क्षेत्र के ग्राम कडार के निवासी केशव राम साहू ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। साहू ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी पुष्पलता साहू के नाम से उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लिया था। उन्होंने क्रमश: 17 अक्टूबर, 6 नवंबर और 30 दिसंबर 2024 को गैस बुकिंग की, लेकिन अब तक एक भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हुई।

साहू का आरोप है कि इंडेन ग्रामीण वितरक द्वारा उनके नाम से बुक किए गए सिलेंडरों को अन्य लोगों को बेच दिया गया। इस लापरवाही के कारण उनके परिवार को घर में भोजन बनाने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अवैध गैस बिक्री का भी आरोप

केवल विलंबित डिलीवरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से गैस सिलेंडरों की बिक्री का मामला भी सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि कुछ वितरक निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए गैस सिलेंडर अवैध रूप से बेच रहे हैं। इससे आम जनता को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

साहू ने बताया कि उन्होंने पहले भी अपनी शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बार उन्होंने कलेक्टर से यह गुहार लगाई है कि दोषी वितरक पर कठोर कार्रवाई की जाए और उनके लाइसेंस को रद्द किया जाए। उन्होंने कहा, हमारे जैसे आम नागरिक इस भ्रष्टाचार के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन को जल्द से जल्द इस पर ध्यान देना चाहिए।

ज्ञात हो कि बलौदाबाजार जिले में गैस डिलीवरी की यह समस्या कोई नई बात नहीं है। लेकिन हाल के दिनों में उपभोक्ताओं की शिकायतों में तेजी आई है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें महीनों इंतजार करने के बावजूद गैस सिलेंडर नहीं मिल पाता।

यह समस्या न केवल उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि उज्ज्वला योजना जैसे सरकारी कार्यक्रमों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।


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