बलौदा बाजार

लटूवा सोनबरसा जंगल का जालीतार टूटा, वन्यजीव और फसल को खतरा, ग्रामीण परेशान
15-Dec-2024 2:43 PM
लटूवा सोनबरसा जंगल का जालीतार टूटा, वन्यजीव और फसल को खतरा, ग्रामीण परेशान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 15 दिसंबर।
जिला मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर दूर स्थित लटूवा सोनबरसा जंगल इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। जंगल के चारों ओर लगाए गए जालीतार कई स्थानों पर टूट चुके हैं, जिससे न केवल जंगली जानवर गांवों में घुस रहे हैं, बल्कि लकड़ी माफिया भी जंगल में बेधडक़ प्रवेश कर रहे हैं।

जंगली जानवर कर रहे फसलों को नुकसान
लटूवा सोनबरसा जंगल के आसपास के गांव जैसे देवरी, ढ़ाबाडीह, सलौनी, भाठागांव, नायकटार झोंका, कंसडबरी, और मोहतरा के किसानों ने अपनी फसल बचाने के लिए कई बार प्रशासन को सूचित किया है। टूटे हुए जालीतार के कारण हिरण, बारहसिंघा, जंगली सुअर और अन्य जानवर खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुछ दिन पहले एक चीतल जंगल से भागकर ग्राम पंचायत राजपुर पहुंच गया था। ग्रामीणों ने इसे पकडक़र पुलिस स्टेशन करहीमेकरी में सूचना दी।

लकड़ी माफिया सक्रिय, वन संपदा को नुकसान
जंगल के टूटे घेरों का फायदा उठाकर लकड़ी माफिया जंगल में प्रवेश कर रहे हैं। वे कीमती लकडिय़ां काटकर ले जा रहे हैं, जिससे जंगल की वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

खतरनाक खदानों से जंगली जानवरों को खतरा
लटूवा सोनबरसा जंगल के आसपास चार बड़ी पत्थर खदानें हैं, जिनमें किसी भी प्रकार का सुरक्षा घेरा नहीं है। ये खदानें बेहद गहरी हैं, जिससे जंगली जानवरों के गिरने और घायल होने का खतरा है।

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के लिए उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन इस समस्या पर तुरंत ध्यान नहीं देगा, तो इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जंगली जानवरों का मानव बस्तियों में प्रवेश ग्रामीणों की जान को भी खतरे में डाल सकता है। वहीं, वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा भी बाधित हो रही है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से लटूवा सोनबरसा जंगल के चारों ओर मजबूत जालीतार और ब्रांडट्टी-वाल लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे वन्यजीवों और मानव के बीच टकराव कम होगा और जंगल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

कलेक्टर दीपक सोनी से अपील की गई है कि वे इस मामले को प्राथमिकता दें और वन विभाग को निर्देशित करें कि टूटे हुए जालीतार की मरम्मत तुरंत की जाए। साथ ही, जंगल की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की सक्रियता ही पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के इस गंभीर संकट को हल कर सकती है।
 


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