बलौदा बाजार

बच्चे की मौत के बाद सामने आया रेत चोरी का मामला
14-Oct-2024 2:18 PM
बच्चे की मौत के बाद सामने आया रेत चोरी का मामला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 14 अक्टूबर।
बलौदाबाजार पलारी ब्लॉक के ग्राम मुडियाडीह में सागौन के जंगल को काटकर अवैध रेत खनन चला रहा। लेकिन खनिज विभाग आंखें मूंदे बैठा रहा। यहां घाट स्वीकृत नहीं है। यह मामला तब सामने आया जब 7 अक्टूबर को पास के ही खैरी गांव में रेत से भरे ट्रैक्टर से एक बच्चे की मौत हो गई। लोग आक्रोशित हो गए मुडियाडीह में रेट घट स्वीकृत नहीं है और बारिश के मौसम के दौरान 15 अक्टूबर तक रेत खनन पर प्रतिबंध रहता है। 

इसके बावजूद गांव के कुछ लोगों ने 15 दिन पहले ही रेत खनन और परिवहन शुरू कर दिया। यहां से रोज करीब 200 ट्रैक्टर निकल गए 800 प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से रोज 1.50 लाख की रेट चोरी की गई। जिम्मेदार भले ही कह रहे हैं कि इस बार हम अवैध खनन का पता नहीं चला, लेकिन खनिज विभाग ने यहां खदान की एनओसी देने के लिए वन विभाग में आवेदन लगाया है। इसे ही मिली भगत का संदेश जन्म ले रहा है। पिछले साल भी ग्रामीण रेत चोरी कर बेचते रहे। वहीं दूसरी ओर का एक रेत ठेकेदार इस रास्ते से रेत निकाल कर बेच रहा था इसे छत्तीसगढ़ में खबर छपने के बाद खानिज विभाग ने बंद कराया था और रेम तोड़ा था। मगर इस साल गांव वाले पुराने रेत खदान से करीब एक किलोमीटर दूर दूसरा रेत घाट बना लिया है क्योंकि पहले वाले रेत घाट में अब रेत नहीं बचा है। 

रेत माफिया जंगल के सागौन पेड़ों को काटकर एक गुप्त रास्ता बनाकर अवैध रेत का परिवहन करते थे। इससे न केवल जंगल का नुकसान हुआ बल्कि वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया। तस्करी से बचने के लिए उन्होंने जंगल के रास्ते का इस्तेमाल किया। जिससे वन संपदा भी क्षतिग्रस्त हो गई है। 

ग्रामीणों का कहना है की रेत माफिया की गतिविधियों के चलते एक बच्चे की मृत्यु हो गई। जिससे उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। वे चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाए। कसडोल विधायक संदीप साहू ने खनिज विभाग और वन विभाग के लोगों पर मिली भगत का आरोप है।

वहीं खनिज अधिकारी कुंदन बंजारे ने कहा कि उक्त घाट स्वीकृत नहीं है। पिछली बार एक ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस बार अवैध खनन और परिवहन की जानकारी नहीं हुई। वहीं उनके विभाग के लोगों के लिप्त होने के सवाल पर कहां की उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

डीएफओ मयंक अग्रवाल ने कहा कि खनिज विभाग ने संबंधित जगहों पर रेत खदान के लिए एनओसी मांगी है जो हम नहीं देंगे। इससे जंगल का नुकसान होगा। 
वहीं इस घटना के बाद डीएफओ मयंक अग्रवाल ने संबंधित फॉरेस्ट गार्ड को तत्काल मुख्यालय अटैच कर दिया है। और जंगल के रास्ते को जेसीबी से कटवा दिया है। ताकि यहां रेत का अवैध परिवहन ना हो और जंगल को सुरक्षित किया जा सके। 
 


अन्य पोस्ट