बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 29 अगस्त। बलौदाबाजार के गांव मरदा में गलियों और सडक़ों की हालत ऐसी है कि चलना दूभर है, वहीं कीचड़ इतना की चार पहिया वाहनों को निकलने में तकलीफ होती है और टोचन देकर उन्हें बाहर लाया जाता है।
इस समस्या का सामना केवल बड़े बूढ़े ही नहीं बल्कि स्कूली बच्चों को भी करना पड़ रहा है। छात्रों को स्कूल तक पहुंचने और वापस घर जाने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि खराब सडक़ों की प्रमुख वजह रेत का अवैध और ओवरलोड हाईवा वाहनों का परिवहन है, जिसमें सडक़ के भार सहने की क्षमता से कहीं अधिक रेत भरकर परिवहन किया जाता है, वहीं शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
गांव की कीचड़ भरी गलियों में भी चलना दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है, जब कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। ऐसे में बीमार को अस्पताल ले जाने में भी काफी तकलीफ होती है। लोग इन रास्तों पर चलते-चलते कीचड़ में गिर जाते हैं, उनके कपड़े गंदे और खराब हो जाते हैं। इतना ही नहीं, कीचड़ में चलने के लिए उन्हें अपने जूते-चप्पल भी हाथ में उठाकर चलना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इन परेशानिय़ों को लेकर वे कई बार पंचायत में और विधायक के पास शिकायत की है और मूलभूत सुविधा को लेकर मांग की है। इसके बाद भी कोई जनप्रतिनिधि या प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।


