102 वर्षीय की रामकृष्ण केयर में सफल सर्जरी
रायपुर, 1 मई। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल ने बताया कि 102 वर्ष की उम्र में, जब अधिकांश लोग शारीरिक कमजोरी को जीवन का हिस्सा मान लेते हैं, तब रायपुर की पुष्पा देवी (नाम परिवर्तित) ने साहस, दृढ़ता और चिकित्सा संभावनाओं की एक नई मिसाल पेश की। उन्होंने एक जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक करवाई, जिसे कई लोग दशकों पहले भी करवाने से हिचकिचाते।
हॉस्पिटल ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से वह सुप्राअम्बिलिकल हर्निया (नाभि के ऊपर होने वाला हर्निया) के साथ जीवन जी रही थीं। सपोर्ट बेल्ट की मदद से उन्होंने अपनी स्थिति को संभाला और सक्रिय एवं स्वतंत्र जीवन जीती रहीं। उनकी दिनचर्या लगभग सामान्य थी, जब तक कि यह समस्या गंभीर रूप नहीं ले बैठी। हर्निया धीरे-धीरे बढ़ता गया और अंतत: अवरुद्ध (ऑब्स्ट्रक्टेड) हो गया, जिससे उन्हें तेज दर्द होने लगा और यह उनकी जान के लिए तत्काल खतरा बन गया।
हॉस्पिटल ने बताया कि इसी दौरान उन्हें पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में पथरी की भी समस्या का पता चला, जिससे चिकित्सकीय स्थिति और जटिल हो गई। 102 वर्ष की उम्र में सर्जरी का निर्णय बिल्कुल आसान नहीं था। तभी रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल की टीम आगे आई।
डॉ. संदीप दवे, डायरेक्टर रोबोटिक सर्जरी, के नेतृत्व में डॉ. सिद्धार्थ तमस्कर विभागाध्यक्ष, मिनिमल एक्सेस सर्जरी, डॉ. जव्वाद नक़वी, डॉ. विक्रम शर्मा और डॉ. शमीक डेव की टीम ने इस मामले को अत्यंत सावधानी और सटीक योजना के साथ संभाला। मरीज की उम्र को देखते हुए प्री-ऑपरेटिव जांच, एनेस्थीसिया प्रबंधन और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल—हर पहलू पर विशेष सतर्कता बरती गई।
हॉस्पिटल ने बताया कि हालांकि, असली प्रेरणादायक पहलू उनकी रिकवरी रही। मरीज को केवल चार दिनों में डिस्चार्ज कर दिया गया और एक सप्ताह के भीतर वह अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आईं—चलना-फिरना, लोगों से मिलना-जुलना और उसी उत्साह के साथ जीवन जीना, जिसने उन्हें एक सदी तक आगे बढ़ाया।
डॉ. संदीप डेव ने बताया कि वृद्ध मरीजों में सर्जरी का निर्णय हमेशा बहुत सोच-समझकर लिया जाता है। यह केवल उम्र का सवाल नहीं होता, बल्कि मरीज की कार्यक्षमता, स्थिति की गंभीरता और जोखिमों को प्रभावी ढंग से संभालने की क्षमता पर निर्भर करता है। इस मामले में समय पर हस्तक्षेप और समन्वित टीम प्रयास ने बड़ा अंतर पैदा किया। सर्जरी और एनेस्थीसिया देखभाल में प्रगति के साथ, केवल उम्र उपचार देने में बाधा नहीं बननी चाहिए।