अयोध्या (उप्र), 25 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां राम मंदिर ध्वजारोहण को ‘युगांतकारी’ क्षण की संज्ञा देते हुए कहा कि ‘सदियों के जख्म और दर्द भर रहे हैं’ क्योंकि 500 साल पुराना संकल्प आखिरकार राम मंदिर के औपचारिक निर्माण के साथ पूरा हो रहा है।
मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद अपने संबोधन में कहा कि ''राम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, एक मूल्य हैं, एक मर्यादा हैं, एक दिशा हैं और अगर भारत को 2047 तक विकसित बनाना है, अगर समाज को शक्तिशाली बनाना है तो हमें अपने भीतर राम को जगाना होगा।''
इसके पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान श्री रामलला की भव्य-दिव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई थी।
मोदी ने भगवान राम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमें अपने भीतर के राम की समीक्षा करनी होगी। इस संकल्प के लिए आज से बेहतर दिन क्या हो सकता है।''
राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण समारोह में मोदी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “सदियों के घाव और दर्द आज भर रहे हैं और 500 साल पुराना संकल्प पूरा हो रहा है।”
इससे पहले रामनगरी पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। ‘जय श्री राम’ और ‘जय जय हनुमान’ नारों के बीच अयोध्यावासियों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर पुष्प वर्षा की।
इस पल को “युगांतकारी” बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या एक और ऐतिहासिक पड़ाव देख रहा है। उन्होंने कहा “पूरा देश और दुनिया भगवान राम में डूबी हुई है।”
उन्होंने कहा, ‘‘आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर ध्वजारोहण उत्सव का यह क्षण अद्वितीय और अलौकिक है।''
मोदी ने कहा कि पवित्र ध्वज इस बात का सबूत होगा कि “असत्य पर आखिरकार सत्य की जीत होती है।’’
उन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान देने वालों का उल्लेख करते हुए इस अवसर पर कहा, ‘‘मैं इस खास मौके पर राम भक्तों को बधाई देता हूं, उन सभी को बधाई देता हूं जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में दान दिया या किसी भी तरह से मदद की।’’
प्रधानमंत्री ने समारोह में यह भी कहा, ‘‘2047 तक जब हम भारत की आजादी के 100 साल पूरे कर लेंगे, तो हमें एक विकसित भारत बनाना होगा।’’
उन्होंने कहा, ''हमें याद रखना है जो सिर्फ वर्तमान का सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। हमें वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के बारे में सोचना है क्योंकि जब हम नहीं थे, यह देश तब भी था। जब हम नहीं रहेंगे, यह देश तब भी रहेगा।''
मोदी ने कहा, ‘‘हमें एक जीवंत समाज के लिए दूर दृष्टि से काम करना होगा।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि ''यह मंदिर आस्था के साथ मित्रता, कर्तव्य व सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को शक्ति देते हैं। हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, भक्ति महत्वपूर्ण है।''
प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, ''11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। जब देश का हर व्यक्ति, वर्ग, क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा। 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, तब सबके प्रयास से ही हमें विकसित भारत का निर्माण करना होगा।''
उन्होंने कहा, ‘‘आज से 190 साल पहले 1835 में मैकाले नाम के एक अंग्रेज ने भारत को उसकी जड़ों से उखाड़ने के बीज बोये थे। कुछ दिन पहले हमने एक कार्यक्रम में आग्रह किया था कि आने वाले 10 वर्षों में भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे।''
मोदी ने कहा, ‘‘देश को आगे बढ़ना है तो अपनी विरासत पर गर्व करना होगा। हमें गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होना होगा।''
मोदी ने कहा, ‘‘'आज राम मंदिर के प्रांगण में हमारी स्मृति की वापसी है, हमारी अस्मिता का पुनर्जागरण है।''