राष्ट्रीय

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05-May-2021 10:10 PM 14

मुंंबई, 5 मई : कोरोना संक्रमण से सबसे ज्‍यादा प्रभावित राज्‍य पिछले 24 घंटों में 57 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं. यही नहीं, इस अवधि में राज्‍य में 920 लोगों की मौत हुई है. कोरोना से राज्‍य में एक दिन में मौतों का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है.शहरवार बात करें तो महाराष्‍ट्र में कोरोना के सबसे ज्‍यादा केस (9084 केस) पुणे शहर में आए हैं और 93 लोगों की मौत यहां पिछले 24 घंटों में हुई है. राजधानी मुंबई में पिछले 24 घंटों में 3882 केस दर्ज हुए और 77 लोगों को इस दौरान जान गंवानी पड़ी. विदर्भ रीजन के शहर नागपुर में 4,433 केस आए जबकि 57 लोगों की मौत हुई, इसी तरह नासिक में बीते 24 घंटों में 3,767 केस आए और 101 लोगों की मौत हुई.

नासिक ही ऐसा शहर हैं जहां 24 घंटों में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई है.राहत की बात यह रही कि पिछले 24 घंटों में 57,006 कोरोना से रिकवर हुए. राज्‍य में कोरोना पॉजिटिविटी रेट इस समय 17.19% है जबकि रिकवरी रेट 85.32% है. कोरोना मृत्‍यु दर 1.49% के आसपास है महाराष्‍ट्र में कोरोना के एक्टिव केसों की संख्‍या 6,41,569 है.

देश में पिछले 24 घंटे के दौरान सामने आए कोरोना वायरस संक्रमण के 3,82,315 नए मामलों में से 71 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र (Maharashtra), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और दिल्ली (Delhi) समेत 10 राज्यों से आए हैं. केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन नए मामलों के सामने आने के बाद देश में कोरोना (Coronavirus) से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 2,06,65,148 हो गई है.  नए मामलों में 70.91 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, केरल, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से सामने आए हैं. कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहे देश में कोरोना के उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 34,87,229 हो गई है जो कि कुल संक्रमित मामलों का 16.87 प्रतिशत है. पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना के सक्रिय मामलों में 40,096 का इजाफा हुआ है. देश में कोरोना से ठीक होने की दर 81.25 प्रतिशत जबकि मृत्यु दर 1.09 प्रतिशत हो गयी है. देश में एक दिन में कोविड-19 से रिकार्ड 3780 लोगों की मौत हुई है. (ndtv.in/india-news)


05-May-2021 8:27 PM 29

चेन्नई, 5 मई | पार्टी के विधानमंडल दल के नेता के रूप में चुने जाने के एक दिन बाद, द्रमुक अध्यक्ष एम.एम. स्टालिन ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की और अगली सरकार बनाने का दावा किया। स्टालिन के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसे महासचिव दुरईमुर्गन, कोषाध्यक्ष टी आर बालू और संगठन सचिव और राज्यसभा सदस्य आर.एस. भारती ने पुरोहित से मुलाकात की और उन्हें विधानमंडल दल के नेता के रूप में चुना गया प्रस्ताव सौंपा।

स्टालिन ने पुरोहित को 133 नवनिर्वाचित सांसदों और उनके मंत्रिपरिषद की सूची में हस्ताक्षरित समर्थन पत्र भी दिया।

डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 6 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। डीएमके ने 133 सीटें और गठबंधन दलों ने कांग्रेस (18), वीसीके (4) और दो वाम दलों ने दो-दो सीटें जीती।

पत्रकारों से बात करते हुए भारती ने कहा कि राज्यपाल से शाम को स्टालिन को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण भेजने की उम्मीद है।

स्टालिन और उनकी मंत्रिपरिषद को 7 मई को राजभवन में एक साधारण समारोह में शपथ दिलाई जाएगी। (आईएएनएस)


05-May-2021 8:25 PM 24

मुंबई, 5 मई | राज्य सरकारों को उनके नकदी-प्रवाह और बाजार उधार के संदर्भ में अपनी वित्तीय स्थिति का बेहतर प्रबंधन करने में सक्षम बनाने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को ओवरड्राफ्ट (ओडी) सुविधाओं के लाभ के संबंध में कुछ छूट प्रदान की। तदनुसार, एक तिमाही में ओवरड्राफ्ट की अधिकतम संख्या 36 से 50 दिन और ओवरड्राफ्ट की लगातार दिनों की संख्या 14 से बढ़ाकर 21 दिन की जा रही है।

आसान शब्दों में कहें तो इस ढील के बाद राज्य एक तिमाही में 50 दिन तक ओवर-ड्राफ्ट पर रह सकते है। पहले ओवर-ड्राफ्ट की स्थिति अधिकतम 36 दिन ही हो सकती थी।

यह सुविधा 30 सितंबर 2021 तक उपलब्ध होगी। राज्यों के तरीके और साधन अग्रिम (डब्ल्यूएमए) सीमाएं 23 अप्रैल, 2021 को पहले ही बढ़ाई जा चुकी हैं।

सभी घोषणाओं से संबंधित प्रासंगिक परिपत्र और अधिसूचना अलग से जारी की जाएगी।(आईएएनएस)


05-May-2021 8:22 PM 31

नई दिल्ली, 5 मई | दिल्ली पुलिस ने आईपीएल बायो बबल का नियम तोड़ने और सटटेबाजी के उददेश्य से फर्जी आईकार्ड के माध्यम से अरुण जेटली स्टेडियम में प्रवेश करने के मामले में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन दोनों पर फर्जी एक्रीडेशन बनाकर रविवार को दिल्ली में राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच होने वाले मैच में घुसने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।

मैच के दौरान पुलिस इंस्पेक्टर ने कृष्ण गर्ग और मनीष कंसल को पकड़ लिया और उनसे पूछताछ की गई। बाद में संतोषजनक जवाब नहीं देने के बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल के 2021 सीजन को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मंगलवार को घोषणा की। यह फैसला सोमवार को आईपीएल बायो-बबल में अधिक कोविड पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद लिया गया है। आईपीएल गवनिर्ंग काउंसिल और बीसीसीआई की आपात बैठक में यह फैसला लिया गया है।

आईएएनएस के पास मौजूद एफआईआर कॉपी के अनुसार, दो मई को हैदराबाद और राजस्थान के मैच के दौरान, लगभग 7.30 बजे जब सब-इंस्पेक्टर और उनके साथ कर्मचारी गेट नंबर आठ से वीआईपी लाउंज में जा रहे थे, तब उन्होंने लाउंज गैलरी में दो युवकों को उनके मास्क के साथ देखा। कुछ गड़बड़ होने के संदेह पर एसआई ने उन्हें अपना मास्क लगाने के लिए कहा और उनकी उपस्थिति के बारे में उनसे पूछताछ शुरू कर दी।

कॉपी में आगे कहा गया है, " दोनों युवकों में से किसी ने भी एसआई को सही जवाब नहीं दिया। लड़कों में से एक कृष्ण गर्ग ने कहा कि उसके पास एक वैध मान्यता कार्ड है। एसआई ने उसे दिखाने के लिए कहा। इसके बाद वे दोनों भागने लगे और फिर से उन्हें पकड़ लिया।"

पूछताछ में सामने आया है कि दोनों युवकों ने धोखाधड़ी के जरिए फर्जी कार्ड बनवाया था और वे इसके जरिए आईपीएल में सट्टेबाजी कर रहे थे. दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 468, 471, 188, 269, 120, 34 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया है।(आईएएनएस)


05-May-2021 8:22 PM 25

नई दिल्ली, 5 मई | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी ने तीसरी बार शपथ लेने के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने टीएमसी सुप्रीमो को पूरब का शेरनी बताया है। ट्वीट के जरिये राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता ने कहा, ' वह वास्तव में पूरब की शेरनी है। ममता के लिए लड़ाई और सभी बाधाओं के बावजूद भारी जीत के लिए मेरी हार्दिक बधाई। 

राज्य के चुनाव में भाजपा को पटखनी देने के बाद कांग्रेस नेता टीएमसी प्रमुख की तारीफ कर रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ममता बनर्जी को झांसी की रानी (अंग्रेजों से लड़ने वाली रानी) भी कहा।

एक अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा, "ममता दीदी की जीत राहत और सुकून देने वाली है। बलिदान के बावजूद हमें, कांग्रेस को धैर्य रखना होगा, लेकिन दोनों के लिए, वास्तव में कई अन्य लोगों के लिए भाजपा को स्थायी चुनौती देने के लिए ड्राइंग बोर्ड पर लौटने की जरूरत है।"

कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल चुनाव में शून्य स्कोर किया और अपने गढ़ भी खो दिए, जबकि पार्टी ने कहा है कि वह निश्चित रूप से सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य के चुनावों में हारने के बाद कांग्रेस ने कहा कि पार्टी परिणामों का अध्ययन करेगी, गलतियों को सुधारेगी और पाठ्यक्रम में सुधार करेगी।(आईएएनएस)


05-May-2021 8:17 PM 13

नई दिल्ली, 5 मई | केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पतालों और नर्सिग होम में अग्नि सुरक्षा तंत्र की विस्तृत समीक्षा करने का निर्देश दिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड रोगियों का इलाज करने वाले अस्पतालों सहित विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में आग लगने की कई घटनाएं होने के बाद यह निर्देश सामने आया है।

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आदेश जारी करते हुए उनसे अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरों पर उचित अग्नि सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के लिए कहा।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है, "अस्पतालों में हाल ही में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए और विशेष रूप से आने वाले गर्मियों के महीनों को देखते हुए इस पर प्रकाश डाला जाना आवश्यक है कि शॉर्ट-सर्किट से आग लगने की घटनाओं से जीवन और बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है या तापमान बढ़ने का इन अस्पतालों में लगे आंतरिक तारों पर असर पड़ता है । हाई लोड की समस्या भी होती है, इसलिए रखरखाव पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। ''

आगे कहा गया है कि '' यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्वास्थ्य सुविधा में आग लगने की घटना न हो, खासतौर पर कोविड रोगियों के लिए समर्पित, सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में आग से सुरक्षा की योजना पर ध्यान दिया जाए। ''  (आईएएनएस)


05-May-2021 8:16 PM 44

चेन्नई, 5 मई | नब्बे साल के वी कल्याणम का बुढ़ापे से जुड़ी तमाम परेशानियों की वजह से मंगलवार को निधन हो गया। वो महात्मा गांधी के पूर्व निजी सचिव थे। कल्याणम का जन्म 1922 में शिमला में हुआ था। गांधी की हत्या तक 1944 - 48 के बीच वे गांधी के सचिव थे। मंगलवार को उनका निधन हो गया।

कल्याणम ने कहा था कि वह उस स्थान के करीब थे जहां गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

कल्याणम ने यह कहते हुए सभी को चौंका दिया था कि गांधी ने गोली लगने के बाद अपने अंतिम सांस लेने से पहले 'हे राम' शब्द नहीं बोला था।

बाद में कल्याणम ने कहा कि उनका मतलब था कि उन्होंने गांधी का 'हे राम' शब्द नहीं सुना था। (आईएएनएस)


05-May-2021 8:01 PM 26

लखनऊ, 5 मई 2021: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ा हादसा हुआ है. ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफिलिंग के दौरान सिलेंडर फटने से तीन लोगों की मौत हो गई है. इस घटना में छह लोग घायल भी हो गए हैं. मौके पर पहुंची पुलिस ने राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया है. हादसा चिनहट के केटी ऑक्सीजन प्लांट में हुआ है.

जानकारी के मुताबिक चिनहट स्थित केटी वेल्डिंग स्टोर ऑक्सीजन प्लांट में दोपहर करीब 3 बजे जम्बो सिलेंडर में रिफिलिंग करते वक्त भीषण धमाका हो गया. धमाके में प्लांट में मौजूद 3 व्यक्तियों की मौत हो गई जबकि छह अन्य लोग बुरी तरह से घायल हुए हैं. सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर और जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश समेत अन्य अफसरों ने प्लांट पहुंचकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

धमाका इतना भीषण था कि प्लांट की छत उड़ गई

धमाका इतना भीषण था कि प्लांट की छत उड़ गई. मरने वाले और घायल व्यक्ति कौन हैं इस बारे में भी जानकारी नहीं मिल सकी है. डीएम का कहना है कि सभी मृतक और घायल प्लांट में काम करने वाले कर्मचारी ही हैं जबकि पुलिस कुछ बाहर के लोगों के भी मरने और घायल होने की आशंका जता रही है. फिलहाल फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड प्लांट पहुंचकर धमाके की छानबीन में जुट गया है.

इससे पहले पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश के कानपुर के पनकी ऑक्सीजन प्लांट में रिफिलिंग के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से एक श्रमिक की मौत हो गई थी और 2 लोग घायल हो गए थे. दादा नगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पनकी गैस प्लांट में किदवई नगर के एक अस्पताल का कोई व्यक्ति गैस भरने कोई आया था. उसका एक सिलेंडर संभवत: कमजोर था जिसमें विस्फोट हुआ. इसमें यहां के एक कर्मचारी की मौके पर मौत हो गई थी.

अटल बिहारी वाजपेयी कोविड अस्पताल रोगियों के लिये खोला गया

वहीं दूसरी तरफ लखनऊ के अवध शिल्पग्राम में 450 बिस्तरों से अधिक के अटल बिहारी वाजपेयी कोविड अस्पताल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार को रोगियों के लिये खोल दिया. सरकारी बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के निर्देश पर डीआरडीओ ने 450 बिस्तरों से अधिक के कोविड अस्पताल को अवध शिल्पग्राम में रिकॉर्ड समय में स्थापित किया है.

इसमें कहा गया है कि अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा और मरीजों को मुफ्त में भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा. बयान के अनुसार राज्य सरकार की मदद से डीआरडीओ ने ऑक्सीजन और चिकित्सा आपूर्ति की व्यवस्था की है, जो नि: शुल्क दी जाएगी. अस्पताल का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया. बयान के अनुसार डीआरडीओ और राज्य सरकार ने अस्पताल की सुविधाओं के त्वरित संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सभी प्रमुख पहलुओं को संभाल रहे हैं.

बयान के मुताबिक अस्पताल सशस्त्र बलों की एक टीम द्वारा चलाया जा रहा है जिसमें नर्सों और अर्द्धसैनिक कर्मचारियों के साथ कई विशिष्टताओं के डॉक्टर शामिल हैं. मेडिकल स्टाफ को देश भर से लाया गया है. अस्पताल में प्रवेश को उत्तर प्रदेश राज्य प्राधिकरणों द्वारा स्थापित लखनऊ में इंटीग्रेटेड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा और अस्पताल में सीधे तौर पर मरीजों की भर्ती नहीं होगी.(abplive)

 


05-May-2021 7:58 PM 23

नई दिल्ली: भीषण कोरोना संकट के दौरान सरकार के कोविड प्रबंधन पर देश-दुनिया में उठ रहे सवालों का विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लंदन में आयोजित कार्यक्रम में जवाब दिया. कार्यक्रम का विषय था कि भारत के पास सर्वाइवल और रिवाइवल का कोई प्रावधान है?

सवाल: भारत में मौजूदा कोरोना संकट के बीच यह सवाल कई जगह से उठ रहे हैं कि क्या सरकार इस संकट को पहचानने और उससे मुकाबले की तैयारी करने में चूकी?

जवाब: मुझे नहीं लगता कि हमने समस्या को पहचानने में कोई चूक की या हमने इसके लिए तैयारी नहीं की. आप देखें कि फरवरी 2021 में भारत में प्रतिदिन आने वाले कोरोना मामलों का आंकड़ा 10 हजार के करीब था. जबकि कल के आंकड़े 3.8 लाख आए हैं. यानी नए मामलों में 38 गुना की बढ़ोतरी हुई है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वायरस किस तेजी से फैला है.

 

यदि मार्च अंत के आंकड़ों को देखें तो प्रतिदिन 100 से अधिक मामलों वाले जिलों की संख्या 75 थी. वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 400 हो चुका है.  पॉजिटिविटी रेट को देखे तो भी करीब 40 जिले 15 प्रतिशत के आंकड़े दिखा रहे थे मार्च के अंत में. वहीं आज यह संख्या 360 जिलों में है. पहली वेव का पीक सितंबर के मध्य में हुआ. उस दौरान भी बहुत सी चीजों ने हमें चौंकाया. कई चीजों की कमी हुई. कोई भी इस तरह की महामारी के लिए तैयार नहीं था. हमारे पास पीपीई, मास्क तक की भी कमी थी. लॉकडाउन बहुत पीड़ादायक फैसला था. लेकिन वो अच्छा साबित हुआ. उसके परिणाम सामने आए. 

 

महाराष्ट्र, केरल में चिंताएं थी. अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर में कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाहें दी गईं. टीमें भेजी गईं. 75 टीमें कई राज्यों में भेजी गईं. उन्हें बताया गया कि कहां कमी है. जो भी सूचनाएं मिल रही थीं. सरकार ने 1200 ऑक्सीजन प्लांट की इजाजत दी. केंद्र ने इसके लिए पैसे भी दिए क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है. एक तरह से लोगों के बीच भी एक विश्वास पैदा हुआ क्योंकि आंकड़े लगातार कम हो रहे थे.

 

सभी लोग अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बात कर रहे थे. आर्थिक रफ्तार बढ़ाने के लिए यह विश्वास जरूरी भी था. यह कहा जा सकता है कि सभी लोग थोड़ा निश्चिंत और लापरवाह हो गए थे क्योंकि कोविड मामलों के आंकड़े कम हो रहे थे. यह कोई दोषारोपण का खेल नहीं है. कोई नहीं कहेगा कि हमने अपने सुरक्षा इंतजामों को हर समय मुस्तैद रखा. इसका कारण भी समझा जा सकता है कि फरवरी में आंकड़े 10 हजार तक आ रहे थे.
सवाल: क्या चुनाव रैलियां, बड़ी सभाओं का आयोजन एक चूक नहीं थी?

 

जवाब: इस मसले पर इन दिनों काफी बात हो रही है. ऐसे मौकों पर इन सवालों की जरूरत को भी समझा जा सकता है. लेकिन देखिए कि क्या किसी लोकतांत्रिक देश में चुनाव टाले जा सकते हैं या नहीं कराए जाएं? हमने देखा है कि एक बार चुनाव न कराने का फैसला भारत में लिया गया था और उसके क्या परिणाम हुए. हम एक लोकतांत्रिक और राजनीतिक चेतना वाले देश हैं. थोड़ी देर के लिए सोचिए कि अगर चुनाव न करवाए जाते. अगर सरकार फरवरी मार्च में यह कहती कि हम चुनाव नहीं करवा रहे हैं तो क्या प्रतिक्रिया होती? यह कोई किताबी बात नहीं है. बहुत व्यावहारिक सवाल है. 

 

एक साल पहले हमने लॉकडाउन लगाने का फैसला लिया. जरूरी था क्योंकि हम एक समाज के तौर पर इस चुनौती से मुकाबले के लिए तैयार नहीं था. यही एक मात्र फैसला था. उस समय ब्रिटेन में ही हमारे लॉकडाउन के फैसले पर कहा गया कि यह निर्णय सीएए और एनआरसी विरोधी विरोध प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए किया गया है. यानी हम कठोर फैसला लें तो भी आलोचना और ना लें तो भी आलोचना. चुनाव तो अवश्यंभावी हैं. 

 

दूसरा मुद्दा लोगों की भीड़ का उठाया गया. यह सही है कि भीड़ जमा हो रही थी. यह कैसे कहा जा सकता है कि धार्मिक आयोजनों की भीड़ तो गलत है लेकिन विरोध प्रदर्शनों की भीड़ वाजिब क्योंकि अंततोगत्वा भीड़ तो भीड़ ही है. घटनाओं के हो जाने के बाद बड़ी सहूलियत से यह कहा जा सकता है कि हमें यह नहीं करना चाहिए था या भीड़ को जमा होने की इजाजत नहीं देनी चाहिए थी. यह भी देखिए कि एक साल पहले इसी सख्ती के लिए हमारी आलोचना हो रही थी.

 

भारत एक राजनीतिक देश है जहां लोग तर्क करना, चर्चा करना पसंद करते हैं. मैं सवालों से नहीं भागता और न ही बहस से बचता हूं. लेकिन यह देखना होता है कि कभी-कभी ऐसी स्थिति होती है कि जरूरत चर्चा या बहस से ज्यादा अपनी तैयारियों को दुरुस्त करने की होती है. ऐसे में कहना पड़ता है कि अभी काम करने की जरूरत है और हम बहस के मुद्दों को किनारे कर काम में जुटें क्योंकि यह संकट ऐसा है जिसमें अस्तित्व का ही खतरा है.

 

सवाल: वैक्सीन मैत्री पर भी सवाल उठाए जा रहें हैं? भारत ने अपने यहां बनाए गए लाखों वैक्सीन दूसरे मुल्कों को दिए. किस तरह यह फैसला लिया गया कि कितने टीके भारत के लोगों के लिए रखे जाएं और कितने अन्य देशों को दिए जाएं?

 

जवाब: जी हां वैक्सीन दिए गए. भारत में उत्पादित टीके ब्रिटेन को भी मिले. ब्रिटिश लोगों के भी लगाए गए. यहां यह समझना होगा कि भारत का वैक्सीन उत्पादन अन्य किसी मुल्क की तुलना में अलग है. भारत में सबसे ज्यादा बने कोविशील्ड टीकों का ही उदाहरण लें. यह ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका का साझा प्रोजेक्ट था जिसमें भारतीय कंपनी को उत्पादन का काम दिया गया.

भारतीय कंपनी को यह काम सौंपा गया क्योंकि उसकी क्षमताओं पर भरोसा किया गया. यानी इस काम के साथ अन्य मुल्कों को वैक्सीन देने की जवाबदेही और जिम्मेदारी भी आई. यह समझना होगा कि यह केवल भारत में बनाई गई और भारत में उत्पादित वैक्सीन नहीं है. यह एक पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय परियोजना थी.  साथ ही इस काम में कोवैक्स परियोजना का भी सहयोग था. यानी इसके साथ अन्य मुल्कों को कम कीमत पर वैक्सीन मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी थी. 

ऐसे में स्वाभाविक तौर पर भारत ने जब अपना टीकाकरण शुरू किया तो उत्पादन और खपत के अलावा कई अन्य कारकों का भी ध्यान रखा. यानी हमने देखा कि टीके कैसे दिए जाएं उसका क्या शेड्यूल बनाया जाए आदि. इसके लिए पहले मेडिकल स्टाफ, फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर, फिर सेना, पुलिस आदि को टीके दिए गए. बाद में 60 वर्ष और फिर उससे कम आयु के लोगों को प्राथमिकता दी गई. 

जरूरत का आकलन करते हुए टीकों का उत्पादन इस्तेमाल से कुछ समय पहले शुरू किया गया. हालांकि वैक्सीन की एक निर्धारित शेल्फ लाइफ भी होती है. लिहाजा उत्पादन, खपत, जरूरत समेत कई बातों का ध्यान रखा गया. हमने अपने करीबी पड़ोसी मुल्कों का भी ध्यान रखा कि वहां फ्रंटलाइन चिकित्सा स्टाफ को टीके लगें. क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि हमारी दहलीज पर महामारी बढ़ रही हो. एक संतुलन बनाने का प्रयास किया गया. 

इस पूरे समीकरण में एक महत्वपूर्ण पहलू वैक्सीन उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति भी रही. हमने फरवरी के आखिर और मार्च के शुरुआत में यह महसूस किया कि वैक्सीन उत्पादन को बढ़ाने के लिए हमारे पास कच्चा माल नहीं आ रहा है. इसकी वजह थी कि कुछ शक्तियां उसे अपनी तरफ खींच रही थीं, खासतौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका. 

यह समझना होगा कि वैक्सीन बहुत जटिल उत्पाद है. मुझे बताया गया कि दुनिया के 30 देशों से करीब 300 चीजों की जरूरत होती है वैक्सीन बनाने के लिए. मार्च के बाद से हमने विदेश मंत्रालय में प्रयास किया कि हम कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करें. हमारे राजदूतों ने इसके लिए कोशिश की. हालांकि इन सभी बातों के कारण हमारी अपेक्षाओं के बावजूद उत्पादन का ग्राफ नहीं बढ़ सका.

लोगों के मन में सवाल भारत के हेल्थ सेक्टर के ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियां उजागर होने को लेकर भी है. हम यह कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते. ऐसा किसी संकट में तो कहा नहीं जा सकता कि जैसी व्यवस्था है उससे ही काम चलाना होगा. सो, हमें मौजूदा व्यवस्था के साथ ही इस चुनौती से निपटने का प्रयास करना है. उसे प्रभावी बनाने के लिए हर संभव उपाय करना होगा. आज जिसे ऑक्सीजन या रेमडेसिविर दवा की जरूरत है उसे हम नीतियों के जवाब नहीं दे सकते. उन्हें व्यावहारिक समाधान चाहिए. ऐसे उपाय चाहिएं जिनसे उनकी मुश्किल हल हो सके.

हमें डॉक्टर्स जो बता रहे हैं उसके मुताबिक 117 और 1617 जैसे कोरोना वायरस के वेरिएंट कहीं ज्यादा संक्रामक हैं. इसलिए लोगों को श्वास संबंधी समस्याएं भी पिछली बार की मुकाबले जल्दी हो रही हैं. उनके मामले भी पिछली लहर की तुलना में ज्यादा आ रहे हैं. इसने मेडिकल ऑक्सीजन की मांग को कई गुना बढ़ा दिया है. यानी पहले यदि हमारी जरूरत एक हजार मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन की थी तो आज यह आंकड़ा बढ़कर 7-8 हजार मीट्रिक टन हो गया है.

बतौर सरकार यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसे पूरा करें. किसी भी साधन का इस्तेमाल करें. हमने उद्योग समूहों से कहा कि वो अपने कामकाज में बदलाव करें और ऑक्सीजन खपत को रोकें ताकि उसका इस्तेमाल इलाज में हो सके. उन्हें उत्पादन केंद्रों से खपत के इलाकों तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रयास चल रहे हैं.

भारत में ऑक्सीजन टैंकरों की भी कमी रही. देश का कुल जमा ऑक्सीजन टैंकर फ्लीट करीब 1200 का था जो काफी कम है. हम उसे ही बढ़ाने में लगे हैं. इन दिनों भारतीय दूतावास ऑक्सीजन टैंकर, कंसंट्रेटर, जनरेटर आदि जुटा रहे हैं. सो, यह एक बड़ा संकट है, विषम चुनौती है. हम अपना सबकुछ प्रयास और उससे भी अधिक देने की कोशिश कर रहे हैं. 

सवाल: भारत के इस संकट में बहुत से देशों ने उनके लोगों और अनेक संगठनों ने मदद का हाथ बढ़ाया है. आप उनके लिए क्या कहेंगे और खासतौर पर यह कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह मदद जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे?

जवाब: हम यूके में मौजूद भारतीय समुदाय और दुनिया के अलग-अलग देशों में बसे भारत के लोगों उनके संगठनों से मिली सहायता और संबल का तहे दिल से धन्यवाद करते हैं.  साथ ही विभिन्न सरकारों की तरफ से टैंकरों, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि पहुंचाने की मदद के लिए भी शुक्रगुजार हैं. इसमें कोई शक नहीं कि हमारे स्वास्थ्य क्षेत्र की कमियां उजागर हुई हैं. यह साफ है कि बीते 70 सालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बहुत अधिक निवेश नहीं किया गया. हो सकता है कि उसके कुछ कारण भी रहे हों. क्योंकि आज यह कह देना बहुत आसान है कि आपको अधिक धन देना चाहिए था. 

आज मैं सरकार में उस जगह हूं, जहां से हम नीतियों को बनते देखते हैं. मैं आपको बता सकता हूं कि यह उतना आसान नहीं है जितना लोगों को सुनने में लगता है. यह कोई बचाव का तर्क नहीं है लेकिन हम इसको नजरअंदाज नहीं कर सकते. इसी जरूरत को स्वीकार करते हुए ही प्रधानमंत्री मोदी ने आयुष्मान भारत की शुरुआत की.

उनका यह मत है कि हम लोगों को प्राइवेट मैडिकल प्रैक्टिशनर्स के भरोसे नहीं छोड़ सकते, चाहे वो कितनी ही अच्छी सेवाएं क्यों न दे रहे हैं. लेकिन देश में एक मजबूत सरकार समर्थित स्वास्थ्य सेवा होनी चाहिए क्योंकि रोटी-कपड़ा-मकान और रोजगार के साथ-साथ स्वास्थ्य भी एक मूलभूत जरूरत है. फिलहाल हमें उसी के साथ काम करना है जो उपलब्ध है. यानी एक कमजोर और अल्प निवेश से खड़ी स्वास्थ्य सेवा. 

सवाल: मुश्किल की घड़ी में दुनिया के कई देशों से भारत को मदद मिली है. कई संगठन और भारतीय समुदाय के कई समूह भी मदद कर रहे हैं. आप इस पर क्या कहेंगे? क्या यह मदद जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रही है.

जवाब: भारत में हम इस वक्त महसूस कर सकते हैं कि दुनिया हमारे साथ है. दुनिया के कई विदेश मंत्रियों से बात करता हूं, बहुत सारे लोगों से चर्चा होती है लोग संदेश भेजते हैं हम आपके लिए क्या कर सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति यह कहते हैं कि मैं भारत के लिए अपनी नीतियां बदल रहा हूं क्योंकि भारत ने संकट के समय अमेरिका की मदद की थी. मैं गत दिनों सिंगापुर के विदेश मंत्री विवेक बालाकृष्णन से बात कर रहा था और उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि पिछली वेव के दौरान भारत ने दवाइयों के संदर्भ में बेझिझक सिंगापुर की मदद की थी. सिंगापुर ने भारत के लिए क्रायोजेनिक टैंकर भेजें और अन्य उपकरण मुहैया कराए.

इसी तरह खाड़ी के मुल्कों से भी भारत को बहुत मदद मिल रही है. चाहे कतर हो, बहरीन हो यूएई हो, या सऊदी अरब सभी ने इस चीज का उल्लेख किया कि पिछले साल इस संकट की शुरुआत में भारत ने अपने मदद के दरवाजे खुले रखे. इसी तरीके की सहभागिता हम लंदन में G7 की बैठक के दौरान भी महसूस करते हैं. G7 के अधिकतर देश लगभग उसी संकट से गुजरे हैं जिससे हम आज गुजर रहे हैं.

भगवान ना करे कि किसी को इस तरीके के संकट से रूबरू होना पड़े. लेकिन हमने देखा है कि इटली में कैसे हालात थे. कई देश चाहे ब्रिटेन हो अमेरिका हो या फ्रांस हो ऐसे हालात देख चुके हैं. वह हमारे लिए महसूस करते है. यह महामारी निश्चित रूप से लोगों की विचारधारा बदलने वाली है. इसमें एक तरफ जहां हमें लोगों के अंधियारे पक्ष से रूबरू कराया है. वहीं एक आशावादी व्यक्ति के तौर पर मैं यह महसूस करता हूं कि कूटनीति में साझेदारी की भावना बढ़ी है. यह संकट हम में से कई लोगों को नजदीक लाया है. यह हम घरेलू मोर्चे पर ही महसूस करते हैं.

सवाल: हाल ही में आपने अपने चीनी समकक्ष विदेश मंत्री वांग जी से बात की और आग्रह किया कि भारत आने वाली कार्गो फ्लाइट को खुला रखा जाना चाहिए ताकि दवाओं और जरूरी साजो सामान की आपूर्ति होती रहे. भारत और चीन के मौजूदा रिश्तो को आप किस तरह देखते हैं और सीमाओं पर क्या हो रहा है?

जवाब: भारत और चीन के रिश्ते इस समय एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. कई पुराने समझौतों को दरकिनार कर चीन ने बहुत बड़ी तादाद में अपनी सेना को वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब तैनात किया. इसका कोई स्पष्टीकरण भी नहीं है. इस सिलसिले को शुरू हुए अब 1 साल से भी ज्यादा हो चुका है. उनकी कार्यवाही ने सीमा पर शांति और स्थायित्व को नुकसान पहुंचाया है. पिछले साल जून में हमने करीब 45 साल बाद भारत चीन सीमा पर रक्तपात देखा.

हम चीन के साथ स्पष्ट है कि सीमा पर शांति और स्थायित्व रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत जरूरी है. यह संभव नहीं है कि सीमाओं पर खून बहाया जा रहा हो और हम कहें कि आइए अन्य क्षेत्रों में हम संबंधों को सुधारने पर काम करें. यह व्यावहारिक नहीं है. हम इस बात को बार-बार कहते हैं. कई मामलों पर प्रगति हुई है कुछ इलाकों में तनाव कम हुआ है सैनिक पीछे हटे हैं. हम कई अन्य इलाकों में भी तनाव घटाने के उपाय कर रहे हैं.

हमारी पिछली बातचीत में ज्यादा फोकस कोरोना संकट पर ही था. मैंने उनसे कहा कि कोरोना ज्यादा व्यापक सुनामी है. मेरे चीनी समकक्ष मंत्री वांग भी इस बात से सहमत थे कि कोरोना का मुकाबला किया जाना चाहिए. मैंने उनसे कहा कि भारतीय कंपनियों ने चीन में ऑर्डर दिए हैं और इसलिए कार्गो की सप्लाई जारी रहनी चाहिए. इसका सकारात्मक परिणाम भी निकला और हमारी कई एयरलाइंस को मंजूरी भी मिली.

सवाल: संकट के दौरान बहुत से सवाल आर्थिक रफ्तार से भी जुड़े हैं. भारत ने 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा था. क्या ताजा स्थिति के बाद आप उस टाइमलाइन को बदलना चाहेंगे?

जवाब: इस बात पर कोई सवाल ही नहीं की कोरोना ने दुनिया से बहुत बड़ी कीमत वसूली है. लेकिन इसने अर्थव्यवस्थाओं को, देशों को, नेताओं को, कारोबारियों को और नीति निर्माताओं को कई सबक भी सिखाए. अब हम अपनी सोच और व्यवहार में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा डिजिटल हैं. कोविड-19 तनाव के बीच भी हमारी व्यवस्थाओं ने अनेक क्षमताएं हासिल की है. भारत ने भी शपथ ली जो आत्मनिर्भरता से जुड़ी है. हम पूर्व में कई जरूरी सामानों की आपूर्ति के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहे. इसमें कोई बड़ी गलती नहीं है लेकिन ऐसे में जब किल्लत होती है, संकट आता है तो यह निर्भरता मुश्किल बन जाती है.

आज राष्ट्रीय सुरक्षा का मतलब है उत्पादन की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता. इस कड़ी में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए किए गए परफॉर्मेंस लिंक इंसेंटिव जैसे प्रयासों के अब सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं. अन्य श्रम सुधार किए, शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव किए, वित्तीय क्षेत्र में सुधारों को लागू किया. इस दूसरी वेव के शुरू होने से पहले तक बहुत आशावाद के साथ हम आगे बढ़ रहे थे. मौजूदा हालात हमारी परीक्षा है. हम इसका मुकाबला करेंगे लेकिन इस बात का भी विश्वास है कि हमारी आर्थिक दिशा बरकरार रहेगी. यह सुधारों की तरफ और मजबूती के साथ आगे बढ़े. यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारा उद्योग जगत ही आत्मविश्वास महसूस कर रहा है. सुधारों से पीछे जाने का कोई सवाल ही नहीं. यह सरकार अपने आर्थिक विजन पर आगे बढ़ेगी.

सवाल: तो आप आखिर में क्या कहना चाहेंगे…?

जवाब: अंत में मैं इतना ही कहूंगा कि इस आयोजन का विषय है कि क्या भारत के पास कोई प्लान है? जी हां, भारत के पास प्लान है. इस संदर्भ में कि हम सेकंड वेव की तात्कालिक चुनौती से निपटने के लिए प्रयास कर रहे हैं. वहीं इससे आगे के लिए भी अपने प्लान को तैयार कर रहे हैं. हमारी मौजूदा जरूरत ऑक्सीजन को पूरा करने के लिए उपाय कर रहे हैं. साथ ही भारत में टीकाकरण के विस्तार की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं. कोरोना काल में श्रम, वाणिज्य क्षेत्र में जो सुधार किए गए उनके नतीजा सामने हैं. विदेश नीति को लेकर हमारे कदमों का नतीजा संकट के इस समय में सामने है. बीते 70 सालों और खास तौर पर गत 7 वर्षों में किए गए कामों के परिणाम देखे जा सकते हैं. (abplive)


05-May-2021 7:54 PM 31

कन्नौज, 5 मई 2021: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक बेटा अपनी मां की जान बचाने के लिए अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों से ऑक्सीजन की भीख मांगता रहा. ऑक्सीजन ना मिलने मां ने बेटे के सामने ही दम तोड़ दिया. मां की मौत से बेसुध पीड़ित बेटे ने अस्पताल स्टाफ से हाथ जोड़कर अपना दर्द बयां करना चाहा तो वहां मौजूद एक डॉक्टर ने उसको पीट दिया. हैरान करने वाली बात तो ये थी कि मौके पर पुलिस वाले मौजूद थे लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी ने दबंग डॉक्टर को पीटने से नहीं रोका. 

ऑक्सीजन की जगह पिटाई मिली
दरअसल, एक निजी अखबार के पत्रकार की सास की अचानक तबीयत खराब होने से उनको मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. मेडिकल कॉलेज में बेड ना मिलने पर पीड़ित ने जमीन पर ही महिला का इलाज करवाना शुरू कर दिया. इस बीच महिला को अचानक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी लेकिन अस्पताल में उसको ऑक्सीजन नहीं मिली. मृतक महिला का बेटा ऑक्सीजन की भीख मांगता रहा लेकिन ऑक्सीजन की जगह उसको पिटाई मिली. 

कार्रवाई की मांग
पीड़ित राहुल पाल ने बताया कि उसकी मां को सांस लेने में तकलीफ हुई थी. उनको एम्बुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया लेकिन वहां डॉक्टरों ने बेड नहीं दिया. राहुल पाल का कहना है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने कहा कि 'मैं क्या ऑक्सीजन बनाता हूं जो करना हो करो'. ऑक्सीजन ना मिलने पर मां की मौत हो गयी. मृतक के बेटे राहुल ने अस्पताल स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की है. 

जारी है लापरवाही 
एक तरफ प्रदेश के मुखिया लगातार कह रहे हैं कि अगर अस्पताल में बेड खाली नहीं है तो मरीज को प्राइवेट अस्पतालों में बेड दिलाया जाए और उसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी. लेकिन, बावजूद इसके मेडिकल कॉलेज में घोर लापरवाही का मंजर जारी है.(abplive)


05-May-2021 7:51 PM 36

कोरोना संक्रमण की समाप्ति के लिए एक धार्मिक आयोजन के लिए जिले के एक गांव में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र हुईं. पुलिस ने यह जानकारी देते हुए बुधवार को बताया कि ग्राम प्रधान सहित 23 लोगों को कोविड नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है.

तीन मई को सानंद तालुका के नवापुरा गांव के इस वीडियो में करीब 500 महिलाओं को एक मंदिर के चक्कर लगाते हुखा जा रहा है. सबने हाथों में पानी का पात्र पकड़ा हुआ है. वीडियो में कुछ पुरुष पानी का पात्र स्वयं लेते और उसे मंदिर में खाली करते दिख रहे हैं.

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने बताया कि कार्रवाई करते हुए 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि ग्रामीणों ने इस धारणा के चलते आयोजन किया कि बलियादेव मंदिर में जल चढ़ाने से कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा.

कोरोना के नए मामले 3 लाख 82 हजार पार 

देश में कोरोना की सुनामी जमकर कहर बरपा रही है. बीते दिन एक दिन सबसे ज्यादा मौत का आंकड़ा सामने आया है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 382,315 नए कोरोना केस आए और 3780 संक्रमितों की जान चली गई है. हालांकि 3,38,439 लोग कोरोना से ठीक भी हुए हैं. देश में एक मई को रिकॉर्ड 3689 संक्रमितों की मौत हुई थी.

देश में 16 जनवरी से कोरोना का टीका लगाए जाने के अभियान की शुरुआत हुई थी. 4 मई तक देशभर में 16 करोड़ 4 लाख 94 हजार 188 कोरोना डोज दिए जा चुके हैं. बीते दिन 14 लाख 84 हजार 989 टीके लगे. 1 अप्रैल से 45 साल से ऊपर के सभी लोगों को टीका लगाने के दूसरे चरण का अभियान शुरू हुआ था. अब 1 मई से 18 से ऊपर के लोगों को भी टीका लगाया जा रहा है. (abplive)


05-May-2021 7:49 PM 74

नई दिल्ली, 5 मई 2021: कोरोना का कहर जारी है. इस बीच केंद्र सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह कब आएगी और किस स्तर की होगी. हमें तैयार रहना चाहिए.

विजय राघवन ने कहा कि इतनी भीषण और लंबी कोविड लहर, जिसका हम सामना कर रहे हैं, के बारे में पूर्वानुमान नहीं लगाया था.

साथ ही उन्होंने कहा हवा से कोरोना नहीं फैलता है. वहीं नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि यह बीमारी जानवरों से नहीं फैल रही है. यह इंसानों से इंसानों के बीच का ट्रांसमिशन है.

वीके पॉल ने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित होकर घर में क्वॉरंटीन में रह रहे लोगों और परिवारों को टेलीफोन पर परामर्श देने के लिए आगे आएं. डॉ पॉल ने कहा, “बदलते वायरस की प्रतिक्रिया समान रहती है. हमें कोविड-उपयुक्त व्यवहार अपनाने की जरूरत है, जैसे मास्क लगाना, दूरी बनाना, स्वच्छता, गैर जरूरी मुलाकातें नहीं करना और घर में ही रहना.”

देश में एक दिन में कोरोना वायरस से रिकॉर्ड 3,780 लोगों की मौत के बाद इस बीमारी से जान गंवाने वालों की संख्या 2,26,188 हो गई है. जबकि एक दिन में संक्रमण के 3,82,315 नये मामले सामने आए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन नये मामलों के बाद कोविड-19 के कुल मामले बढ़कर 2,06,65,148 हो गए हैं.

लगातार बढ़ते मामलों के बाद देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 34,87,229 हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में पिछले 24 घंटे के दौरान सामने आए कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों में से 71 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत 10 राज्यों से आए हैं.(abplive)


05-May-2021 7:48 PM 30

मराठा आरक्षण पर राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया. कोर्ट की तरफ से बुधवार को इसे रद्द किए जाने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी से पूरे मामले में दखल देने की मांग की है. इसके साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मराठा आरक्षण पर फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया.

उद्धव बोले- मराठा आरक्षण पर फैसला दुर्भाग्यपूर्ण

महाराष्ट्र के सीएम ने कहा- “महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को आरक्षण दिए जाने वाले कानून को सुप्रीम कोर्ट की ओर से रद्द करना दुर्भाग्यपूर्ण है. हमने मराठा समुदाय के स्वाभिमान के लिए सर्वसम्मति से इसे पास किया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र ऐसा कानून नहीं बना सकता है. अब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ही कर सकते हैं.”

उद्धव की पीएम मोदी से गुहार

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा- “हम पीएम मोदी से यह अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले में दखल देकर कानून बना मराठाओं को आरक्षण दें. सांभाजी राजे मराठा आरक्षण को लेकर एप्वाइंटमेंट मांग रहे हैं. क्यों नहीं उन्होंने अभी तक एप्वाइंटमेंट दिया है?” उद्धव ने आगे कहा कि मराठा समुदाय को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे जब तक कि उन्हें यह नहीं मिल जाता.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश आर सरकारी नौकरियों मराठा समुदाय को आरक्षण देने संबंधी राज्य के कानून को ‘‘असंवैधानिक’’ करार देते हुए बुधवार को इसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि 1992 में मंडल फैसले के तहत निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा के उल्लंघन के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है,

कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत पर तय करने के 1992 के मंडल फैसले (इंदिरा साहनी फैसले) को पुनर्विचार के लिए वृहद पीठ के पास भेजने से भी इनकार कर दिया और कहा कि विभिन्न फैसलों में इसे कई बार बरकरार रखा है. (abplive)


05-May-2021 7:44 PM 22

देहरादून, 5 मई 2021: उत्तराखंड  के चमोली जिले में मंगलवार शाम को भारी बारिश के बाद ऋषिगंगा नदी (Rishiganga River) का जलस्तर बढ़ जाने से आसपास के गांवों के लोगों में घबराहट फैल गई और उन्होंने घर छोड़कर रात काटने के लिए गुफाओं में शरण ले ली. इस साल सात फरवरी को ग्लेशियर टूटने (Glacier Breakdown) से ऋषिगंगा नदी में आई बाढ़ की तबाही के मंजर से अब तक भयभीत नदी के निचले इलाकों जैसे रैंणी और जुगजू जैसे गांवों के लोग भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ता देख घबरा गए . दहशत के मारे कई ग्रामीणों ने निकटवर्ती जंगलों की ओर भाग गए जहां उन्होंने गुफाओं में शरण ली और लालटेन के सहारे रात बिताई.

चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी ने कहा कि ग्रामीणों की मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों को गांवों में भेज दिया गया है. उन्होंने बताया कि नदी घाटी में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट भी घोषित कर दिया गया है .हालांकि, उन्होंने कहा कि बारिश रूकने के बाद मंगलवार रात को ही ऋषिगंगा का जलस्तर कम होकर सामान्य हो गया. फरवरी में चमोली जिले की ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में आई जबरदस्त बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी . बाढ़ में जहां रैंणी में स्थित ऋषिगंगा पनबिजली परियोजना पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी वहीं तपोवन क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी की तपोवन—विष्णुगाड परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा था .

बाढ़ में 200 से ज्यादा लोग लापता हो गए थे जिनकी तलाश के लिए चलाए गए अभियान के बाद अब तक 80 शव और 35 मानव अंग बरामद हुए हैं .  (ndtv.in)


05-May-2021 7:41 PM 12

प्रयागराज, 5 मई 2021 : कोरोना महामारी में जहां शवों को घाट तक पहुंचाने में एंबुलेंस चालक मनमानी रकम वसूलने को लेकर चर्चा में हैं वहीं यहां के समाजसेवी फैजुल कहीं से भी फोन आने पर अपना शव वाहन लेकर पहुंच जाते हैं और बिना किसी शुल्क के गरीब और लावारिस शवों की अंत्येष्टि तक का इंतजाम करते हैं.शहर के अतरसुइया इलाके के निवासी मोहम्मद रफीक उर्फ फैजुल ने बताया, “इस महामारी में मैंने एक दिन में 10-12 शवों को घाट तक पहुंचाया है. शव चाहे लावारिस हो या किसी गरीब का हो, परिजन के पास पैसा हो या ना हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.मैं अपने काम में लगा हूं.” उन्होंने बताया कि वह पिछले 18 साल से समाजसेवा में लगे हैं. चार साल पहले तक वह ट्राली से शवों को ढोते थे, लेकिन नीलामी में 80,000 रुपये में एक वाहन मिलने पर उन्होंने वाहन को शव ढोने लायक बनवाया और अब उसी वाहन से शव ढोते हैं.

फैजुल ने बताया कि वाहन खरीदने के बाद उनके पास पैसा नहीं बचा. ऐसे में लायंस क्लब वालों ने लाल बत्ती दिलवाई, टैक्स और बीमा की रकम जमा की. वहीं दो-तीन लोगों ने वाहन में नए टायर लगवाए. उन्होंने बताया कि जनता के सहयोग से ही वह समाजसेवा कर पा रहे हैं क्योंकि उनकी आमदनी का कोई जरिया नहीं है. शव ढोते समय सामर्थ्यवान लोग डीजल का पैसा दे देते हैं जिससे उनकी गाड़ी चलती रहती है. फैजुल के काम का कोई तय समय नहीं है. कहीं से भी फोन आने पर वह अपने ड्राइवर के साथ निकल पड़ते हैं, शव को उसके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए. 

वह बताते हैं कि इस काम को करने में उन्हें घर से विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन आस पड़ोस के लोग जरूर ताना मारते थे कि देखो, इसे मुर्दा उठाने के अलावा और कोई काम नहीं मिला. अपने परिवार के बारे में फैजुल ने बताया कि उसकी चार बहनें हैं जिनकी शादी हो चुकी है. इसके अलावा, उसके दो भाई हैं जो शादीशुदा हैं, लेकिन वे मां का ख्याल नहीं रखते थे. इसी वजह से फैजुल ने शादी नहीं करने का निर्णय किया. वह अपनी मां के साथ रहते हैं. अतरसुइया गोलपार्क पुलिस चौकी में तैनात कांस्टेबल हरिवंश यादव ने बताया कि फैजुल रास्ते में पड़े बीमार व्यक्ति को भी अपनी गाड़ी में बिठाकर अस्पताल ले जाते हैं और उसे भर्ती कराते हैं. साथ ही समय समय पर उसका हालचाल लेते हैं. उन्होंने बताया कि शहर के ज्यादातर पुलिस थानों में फैजुल का नंबर दर्ज है और विषम परिस्थितियों में लोग फैजुल को याद करते हैं. (ndtv.in)


05-May-2021 7:34 PM 21

बाड़मेर, 5 मई 2021: राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक हृदयविदारक घटना में 34 साल की एक युवती कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु के शिकार अपने पिता की जलती चिता में कूद गई. पुलिस के अनुसार यह घटना मंगलवार शाम की है. पुलिस ने युवती को सरकारी अस्पताल पहुचाया जहां गंभीर हालत के कारण उसे जोधपुर भेज दिया गया. मिली सूचना के अनुसार कोविड-19 से संक्रमित दामोदरदास (73) की मंगलवार सुबह मौत हो गई. 

बाड़ेमर शहर पुलिस थाने के प्रभारी प्रेम प्रकाश ने बताया कि दामोदरदास के तीन बेटियां हैं, सबसे छोटी बेटी चंद्रकला (34) ने अंत्येष्टि स्थल पर जाने की जिद की क्योंकि परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं है. अंत्‍येष्टि स्‍थल पर वह अपने पिता की जलती चिता में कूद गई. मौजूद लोगों ने किसी तरह से उसे वहां से निकाला और पुलिस व एंबुलेंस को बुलाया. उसे बाड़मेर के सरकारी अस्पताल में भेजा गया. पुलिस का कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद चंद्रकला को जोधपुर भेज दिया गया. (ndtv.in)

 


05-May-2021 7:28 PM 18

अहमदाबाद. पूरा गुजरात कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहा है. इसी बीच अहमदाबाद जिले से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है. मध्य गुजरात स्थित साणंद में महिलाएं बड़ी संख्या में धार्मिक कार्यक्रम के लिए सड़कों पर इकट्ठी हो गईं. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है. इस दौरान कोविड नियमों की जमकर धज्जियां उड़ीं. कहा जा रहा है कि ये सभी महिलाएं बलियादेव मंदिर में एकत्र होने जा रही थीं. प्राप्त जानकारी के मुताबिक अब तक इस आयोजन में शामिल 24 महिलाओं को कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है.

मामला गुजरात के साणंद का है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिलाएं तालुका के नवापुरा और निधार्ध गांव में पूजा के लिए एक साथ आई थीं. वीडियो में नजर आ रहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को ताक में रखकर महिलाएं सर पर कलश लिए एक साथ सड़क पर निकल पड़ी हैं. इस दौरान जमकर संगीत भी बजाया जा रहा है.

कोरोना से जंग: गुजरात को मिलेगी रेमडेसिविर की 3 लाख से ज्यादा खुराक, केंद्र का हाईकोर्ट में हलफनामा

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस भी मामले पर सख्त हो गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने सरपंच समेत अब तक नवापुरा गांव के 24 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इनके अलावा म्यूजिक चलाने और कार्यक्रम के आयोजक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. राज्य के कई हिस्सों में नाइट कर्फ्यू जैसी पाबंदियां जारी हैं.

गुजरात में कोविड के आंकड़े क्या कहते हैं

मंगलवार को राज्य में 13 हजार 50 नए मरीज मिले हैं. इसके अलावा 131 मरीजों की मौत हुई. www.covid19india.org के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात में अब तक 6 लाख 20 हजार 472 मरीज सामने आ चुके हैं. जबकि, 7 हजार 779 मरीजों की मौत हो चुकी है. यहां फिलहाल एक्टिव केस की संख्या 1 लाख 48 हजार 297 पर पहुंच गई है. अहमदाबाद राज्य का सबसे प्रभावित जिला है. यहां मरीजों का आंकड़ा 1 लाख 85 हजार 436 है. (news18.com)


05-May-2021 7:27 PM 17

 

-आनंद तिवारी

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच दिल्ली पुलिस का एक एएसआई इन दिनों चर्चा में है. निजामुद्दीन थाने में तैनात 57 साल के ASI राकेश कुमार की हिम्मत और जज्बे की आज हर कोई तारीफ कर रहा है. ASI राकेश की ड्यूटी 11 अप्रैल से लोधी रोड के श्मशान घाट में लगाई गई थी. इसके बाद 13 अप्रैल से राकेश ने कोरोना मरीज के परिवार वालों की मदद का बीड़ा उठाया लिया.

एएसआई ने बताया कि उन्होंने कोरोना वैक्सीन की दो डोज लगवा ली है. कोरोना पीड़ितों की मदद के समय वो सभी तरह की सावधानियों का ध्यान रखते हैं.13 अप्रैल से अब तक राकेश ने 1100 से ज्यादा कोविड से मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार कराने में मदद की है. उन्हें कंधा देने, चिता लगाने से लेकर फूल चुनने तक का काम एएसआई ने किया है. ASI राकेश खुद 50 से ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं.

गाजियाबाद की एक सोसाइटी में 300 से अधिक परिवार कोरोना संक्रमित, एक महीने में 9 लोगों की मौत
कोरोना काल में कई ऐसे लोग हैं, जिनके अपने साथ नहीं होते हैं और कुछ लोग सिर्फ एक या दो लोगों के साथ ही होते हैं. ऐसे लोग जब श्मसान पहुचते हैं तो राकेश उनकी मदद करते हैं. ASI के मुताबिक लोधी रोड श्मशान में हर रोज 55 से 60 लोगों का अंतिम संस्कार हो रहा है. ऐसे वक्त में वो अपने ड्यूटी में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं. इसलिये 5 मई को अपनी बेटी की होने वाली शादी को भी फिलहाल के लिए ASI ने कैंसिल कर दिया है. (news18.com)


05-May-2021 7:26 PM 16

-ऋषभ मणि त्रिपाठी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक तरफ कोरोन संक्रमण के चलते ऑक्सीजन को लेकर मारामारी है. ऑक्सीजन प्लांट पर मरीजों, तीमारदारों की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं. वहीं दूसरी तरफ ऑक्सीजन प्लांट पर भी चौबीसों घंटे गैस रिफिलिंग को लेकर दबाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच चिनहट के केटी ऑक्सीजन प्लांट में हादसे की खबर आई है. यहां पता पता चला है कि ऑक्सीजन रिफिलिंग के दौरान सिलिंडर ब्लास्ट हो गया. इसमें दो लोगों की मौत हो गई है, वहीं 5 घायल हो गए हैं. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है. वहीं मौके पर अफरा-तफरी का माहौल है.

धमाके में प्लांट का शेड उड़ा

बता दें केटी ऑक्सीजन प्लांट लखनऊ में देवा रोड मटियारी के पास  स्थित है. यहां प्लांट में एक बड़ा धमाका हुआ, जिससे प्लांट में काम कर रहे तमाम कर्मचारी मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मी  इस हादसे में  हताहत  हो गए. ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि प्लांट के ऊपर पड़ा शेड हवा में उड़ गया.

पुलिस कमिश्नर और डीएम मौके पर पहुंचे

उधर केटी ऑक्सीजन प्लांट में हादसे के बाद जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं. राहत और बचाव कार्य की जिलाधिकारी खुद मॉनीटरिंग कर रहे हैं. पुलिस कमिश्नर भी घटना स्थल पर हैं. घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है. ज़िला प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद है.

घटना के बाद मौके पर पुलिस राहत कार्य में जुटी है

पुलिस ने पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया है. एंबुलेंस द्वारा घायलों और मृतकों को बाहर निकाला जा रहा है. (news18.com)


05-May-2021 7:26 PM 36

नयी दिल्ली, 5 मई 2021: कोविड-19 (Covid-19) संक्रमण की दूसरी लहर के बीच अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने बुधवार को एक अनिर्धारित संवाददाता सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं. केंद्रीय बैंक ने अपनी वन-टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को फिर से खोल दिया है. आरबीआई (RBI) ने 25 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने वाले व्यक्तिगत, छोटे उधारकर्ताओं को ऋण के पुनर्गठन यानी लोन रीस्ट्रक्चरिंग का दूसरा मौका दिया, ऐसे बिजनेस जिन्होंने पहले फ्रेमवर्क के तहत इसका फायदा नहीं उठाया था, जो अब वो इस योजना का फायदा उठा सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं आरबीआई द्वारा ऐलान की गई घोषणाओं की खास बातें...

नए उपाए:
1. बैंकों 31 मार्च 2022 तक अस्पतालों, ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं, वैक्सीन आयातकों, कोविड दवाओं को 50,000 करोड़ रुपये का कर्ज देंगे.
2. आरबीआई ने 25 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने वाले व्यक्तिगत, छोटे उधारकर्ताओं को ऋण के पुनर्गठन का दूसरा मौका दिया, यदि उन्हें पहली बार में इस सुविधा का लाभ न लिया हो तो.
3. राज्य सरकारों को 30 सितंबर तक ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठाने के नियमों में ढील दी.
4.आरबीआई ने केवाईसी अनुपालन मानदंडों को तर्कसंगत बनाने की घोषणा की, कुछ श्रेणियों के लिए वीडियो-आधारित केवाईसी का प्रावधान किया.
5. आरबीआई अर्थव्यवस्था में वित्तीय संसाधनों का प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकारी प्रतिभूति खरीद कार्यक्रम (जी-सैप 1.0) के तहत 20 मई को 35,000 करोड़ रुपये की दूसरी खरीद करेगा.

अर्थव्यवस्था:
6. अर्थव्यवस्था उबरना शुरू हो गयी थी पर स्थित अब बदल गई है, और ताजा संकट का सामना करना पड़ रहा है.
7. आरबीआई कोविड-19 मामलों में फिर बढ़ोतरी से पैदा हुए हालात की लगातार निगरानी कर रहा है, सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
8. वायरस से लड़ने के लिए संसाधनों का उचित प्रबंधन करना होगा.
9. खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति ने महंगाई को बढ़ा दिया है, हालांकि सामान्य मानसून के पूर्वानुमान से खाद्य मुद्रास्फीति में मदद मिलने की उम्मीद है.
10. केंद्रीय बैंक कोविड से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए अपरंपरागत तरीके अपने के लिए तैयार.
11. नागरिकों के तनाव को दूर करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करेगा आरबीआई.
12. वैश्विक वृद्धि के पूर्वानुमान बेहद अनिश्चित हैं, गिरावट का जोखिम बरकरार.
13. तत्काल उद्देश्य जीवन को बचाना, आजीविका बहाल करना है.
14. केंद्रीय बैंक के परिचालन को जारी रखने के लिए 250 से अधिक आरबीआई के कर्मचारी और सेवाप्रदाता घर से दूर रहकर काम कर रहे हैं.

 


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