राष्ट्रीय

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03-Dec-2020 8:44 PM 21

भोपाल, 3 दिसम्बर : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'लव जिहाद' को लेकर सख्त लहजे में कहा है कि जिसने भी इसकी कोशिश की उसे बर्बाद कर देंगे. उन्होंने मध्य प्रदेश के सीहोर के नसरूल्लागंज में आयोजित कार्यक्रम में कहा, ''धर्मांतरण जैसी कुकृत, लव जिहाद जैसी चीज की तो तबाह हो जाओगे, बर्बाद हो जाओगे.''

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ''बात सुन लो, सरकार सभी की है. सभी जाति और सभी धर्म की. कोई भेदभाव नहीं है. लेकिन अगर बेटियों के साथ घिनौनी हरकत करने की कोशिश की तो तोड़ के रख दूंगा. ये नहीं चलेगा.''

उन्होंने आगे कहा, ''कोई अगर बहला कर, लालच देकर...मैं जानता हूं ऐसी बेटियों की जिंदगी के बारे में. तबाह हो जाती है, बर्बाद हो जाती है, नरक बन जाती है. दर दर की ठोकरें खाती है. सभी के साथ हूं मैं. धर्मांतरण जैसी कुकृत, लव जिहाद जैसी चीज की तो तबाह हो जाओगे, बर्बाद हो जाओगे. ये नहीं चलने देंगे मध्य प्रदेश में.'

बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने कथित 'लव जिहाद' पर रोक के लिए अध्यादेश पारित किया है. मध्य प्रदेश सरकार भी कानून लाने पर विचार कर रही है.

योगी सरकार के ‘उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्‍यादेश, 2020’ में जबरन या धोखे से धर्मांतरण कराये जाने और शादी करने पर दस वर्ष की कैद और विभिन्‍न श्रेणी में 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है. (abplive.com)

 


03-Dec-2020 8:28 PM 34

नई दिल्ली, 3 दिसम्बर: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक में किसान नेताओं से कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को नहीं छुआ जाएगा, एमएसपी (MSP) में कोई बदलाव नहीं होगा. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के साथ बैठक के बाद कहा कि कुछ मुद्दे पिछली और आज की बैठकों में उठाए गए. किसान संगठन खासतौर पर इन्हें लेकर ही चिंतित हैं. सरकार में अहंकार नहीं है, किसानों के साथ खुले दिमाग से बातचीत  की जा रही है. किसानों को चिंता है कि नए कानूनों से एपीएमसी खत्म हो जाएगी.

तोमर ने कहा सरकार यह देखने के बारे में विचार करेगी कि APMC को और मजबूत किया जाए और इसका उपयोग बढ़े. नए कानून APMC के दायरे से बाहर प्राइवेट मंडियों के लिए प्रावधान रखते हैं. इसलिए, हम एएमपीसी अधिनियम के तहत प्राइवेट के साथ-साथ मंडियों के लिए एक समान कर होने के बारे में भी विचार करेंगे. तोमर ने कहा कि यह बैठक में उठाया गया था कि अगर व्यापार मंडी के दायरे से बाहर होता है, तो यह पैन कार्ड के आधार पर होगा, जिसे आज कोई भी आसानी से प्राप्त कर सकता है. इसलिए, व्यापारी को पंजीकृत होना चाहिए. इसलिए, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि व्यापारी पंजीकृत हो जाए.

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार बातचीत कर रही है और चर्चा के दौरान आने वाला मुद्दा निश्चित रूप से एक समाधान तक पहुंच जाएगा. इसीलिए मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे अपना आंदोलन समाप्त करें ताकि दिल्ली के लोगों को उन समस्याओं का सामना न करना पड़े जिनका वे विरोध के कारण सामना कर रहे हैं.

किसान चाहते हैं कानूनों को वापस लिया जाए
बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा सरकार ने सरकार ने एमएसपी पर संकेत दिए हैं. ऐसा लगता है कि एमएसपी को लेकर उनका रुख ठीक रहेगा. वार्ता ने थोड़ी प्रगति की है. टिकैत ने कहा कि मुद्दा कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने के बारे में है. केवल एक ही नहीं, बल्कि कई मुद्दों पर चर्चा होगी. किसान चाहते हैं कि कानूनों को वापस लिया जाए. सरकार एमएसपी और अधिनियमों में संशोधन के बारे में बात करना चाहती है.

किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच चौथे दौर की वार्ता के लिए गुरुवार को तीन केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की. अब दोनों पक्षों के बीच 5 दिसंबर को फिर से बातचीत होगी. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य एवं खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और पंजाब से सांसद एवं वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित विज्ञान भवन में 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहे हैं.

सरकार ने बताया कि वार्ता दोपहर को आरंभ हुई और सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई. वहीं किसान नेताओं ने बैठक में सरकार से मांग की है कि वह कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए संसद का विशेष सत्र आहूत करें. नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों की चिंताओं पर गौर करने के लिए एक समिति गठित करने के सरकार के प्रस्ताव को किसान प्रतिनिधियों ने ठुकरा दिया था. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच एक दिसंबर को हुई बातचीत बेनतीजा रही थी.

सरकार ने अस्वीकार कर दी थी कानून निरस्त करने की मांग
सरकार ने कानून निरस्त करने की मांग अस्वीकार कर दी थी और किसान संगठनों से कहा था कि वे हाल में लागू कानूनों संबंधी विशिष्ट मुद्दों को चिह्नित करें और गुरुवार को चर्चा के लिए दो दिसंबर तक उन्हें जमा करें.

सरकार का कहना है कि सितंबर में लागू किए गए ये कानून बिचौलियों की भूमिका समाप्त करके और किसान को देश में कहीं भी फसल बेचने की अनुमति देकर कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार करेंगे, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों को आशंका है कि नए कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य और खरीदारी प्रणाली को समाप्त कर देंगे और मंडी प्रणाली को अप्रभावी बना देंगे.

प्रदर्शनकारी किसानों ने बुधवार को भी ये मांग की थी कि केंद्र संसद का विशेष सत्र बुलाकर नए कानूनों को रद्द करे. (hindi.news18.com)


03-Dec-2020 5:01 PM 26

भोपाल, 3 दिसम्बर| मध्य प्रदेश में कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है, मगर इसके लिए वॉलेंटियर की कमी की बात सामने आने पर राज्य के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने वैक्सीन के ट्रायल के लिए वॉलेंटियर बनने की इच्छा जताई है। गृहमंत्री ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि, "कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के लिए मैं भी वॉलेंटियर बनने को तैयार हूं। इस बारे में आज ही डॉक्टर्स से बात करूंगा। यदि हम जैसे लोग आगे आएंगे तो दूसरे लोग भी प्रेरित होंगे।"

ज्ञात हो कि राज्य में कोरोनाा वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल राजधानी में चल रहा है। वर्तमान में यह ट्रायल पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में हो रहा है। इसके अलावा गांधी मेडिकल कॉलेज में भी इसकी तैयारी है। इसी बीच यह बात सामने आई कि ट्रायल के लिए वालेंटियर नहीं मिल रहे हैं। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 4:59 PM 26

नई दिल्ली, 3 दिसम्बर| दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल व राज्य मंत्री सोम प्रकाश के साथ किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक अभी भी जारी है। लंच ब्रेक के दौरान किसान संगठनों के नेताओं ने सरकार द्वारा दिया गया खाना खाने से इनकार कर दिया। किसान नेताओं ने अपना ही लाया खाना जमीन पर बैठ कर खाया। बता दें कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आदोलनरत किसानों के साथ तीन केंद्रीय मंत्रियों की नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बैठक चल रही है जिसमें किसानों की मांगों पर विचार हुआ। इसी दौरान लंच ब्रेक का समय आने पर सरकार द्वारा किसानों को लंच करने का अनुरोध किया गया। लेकिन किसान नेताओं ने सरकार का आग्रह ठुकरा दिया और एंबुलेंस से मंगवाया हुआ अपना ही खाना जमीन पर बैठ कर खाया।

लंच ब्रेक के बाद किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत दोबारा शुरू हो गई।

इस बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ-साथ रेलमंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश शामिल हैं। इससे पूर्व की दो बैठकों में भी ये सभी मंत्री मौजूद थे।

इससे पहले बैठक के दौरान किसानों ने तीनों कानून वापस लेने की मांग सरकार से लिखित में की है। इसके अलावा किसानों ने पराली जलाने पर केस वाले प्रावधान भी खत्म करने की मांग की है। किसान संगठनों ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्ट 2020 जो आने वाला है उसको लेकर भी लिखित में आपत्ति जताई। किसानों ने कहा कि सरकार एमएसपी पर लिखित आश्वासन क्यों नहीं देती?

नये कृषि काूननों से किसानों के सामने पैदा होने वाली समस्याओं से सरकार को रूबरू कराने के लिए इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों की यह बैठक विज्ञान भवन में दोपहर 12.30 बजे से शुरू हुई।

नये कृषि काननू को लेकर केंद्रीय मंत्रियों के साथ किसान नेताओं की यह चौथी बैठक है। इससे पहले, एक दिसंबर और 13 नवंबर को किसान नेताओं के साथ मंत्री स्तर की वार्ता हुई थी। जबकि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ नये कानूनों को लेकर किसान प्रतिनिधियों की वार्ता इन बैठकों से पहले ही हुई थी। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 4:58 PM 29

चंडीगढ़, 3 दिसंबर| कृषि बिलों का विरोध करते हुए और चल रहे किसान आंदोलन के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा ने गुरुवार को घोषणा की कि साल 2019 में उन्हें मिले पद्मभूषण सम्मान को लौटा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ढींडसा शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के प्रमुख भी हैं। यह दल सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले एसएडी का एक अलग समूह है।

वह एसएडी संरक्षक प्रकाश सिंह बादल के बाद पंजाब के दूसरे ऐसे नेता हैं, जिन्होंने 'भारत सरकार द्वारा किसानों के साथ विश्वासघात' के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की पैरवी करने के लिए अपना पद्मविभूषण लौटाया है।

ढींडसा को मार्च 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने मीडिया को बताया कि वह कृषि कानूनों के विरोध में अपना अवॉर्ड लौटा रहे हैं। उन्होंने कहा, "किसानों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए यह अवॉर्ड बेकार है।"

गौरतलब है कि उनकी पार्टी में एसएडी के विद्रोही शामिल हैं, जिन्होंने साल 2017 के चुनाव की हार के लिए सुखबीर बादल को दोषी ठहराया और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के बाद इसमें उनकी 'संदिग्ध' भूमिका का दावा किया। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 4:49 PM 26

नई दिल्ली, 3 दिसंबर| प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) फंडिंग्स की जांच के सिलसिले में देश में इससे जुड़े 26 से अधिक जगहों पर तलाशी ली। ईडी के एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया, "केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में तलाशियां ली जा रही हैं।"

सूत्र ने कहा कि ईडी का तलाशी अभियान पीएफआई की फंडिंग से संबंधित जांच के को लेकर है, क्योंकि जांच के दौरान इसे लेकर सबूत मिले हैं। दिल्ली में दक्षिण पूर्व दिल्ली के शाहीन बाग और जामिया क्षेत्र में तलाशी हो रही है। वहीं केरल में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएफआई नेताओं के घरों की तलाशी ली जिसमें इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ.एम.ए. सलाम का घर भी शामिल है।

मलप्पुरम में पीएफआई सचिव नसरुद्दीन एलमारेम की संपत्तियों पर भी तलाशी ली गई। वहीं ईडी अधिकारियों की एक अन्य टीम ने तिरुवनंतपुरम में पीएफआई के एक और शीर्ष नेता अशरफ मौलवी के घर पर तलाशी ली।

पीएफआई दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में 2019 के सीएए-विरोधी प्रदर्शनों में अपनी भूमिका को लेकर ईडी की जांच के घेरे में है। (आईएएनएस)


03-Dec-2020 4:48 PM 26

चंडीगढ़, 3 दिसंबर| पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को दो किसानों -- गुरजंत सिंह और गुरबचन सिंह की मौत पर दुख व्यक्त किया। इन दो किसानों की मौत नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के दौरान हुई थी। मुख्यमंत्री ने किसानों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है।

मानसा जिले के बछोना गांव के किसान गुरजंट सिंह की दिल्ली में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि मोगा जिले के भिंडर खुर्द गांव के गुरबचन सिंह (80) की बुधवार को मोगा में ही विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 4:47 PM 27

विवेक त्रिपाठी 
लखनऊ, 3 दिसंबर|
उत्तर प्रदेश में उपचुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस जमीनी स्तर पर मजबूती चाहती है। प्रियंका गांधी वाड्रा को मिली कमान के बाद भी हाल में हुए उपचुनाव में कांग्रेस को कोई सफलता नहीं मिली। पार्टी की ओर से मिशन 2022 को लेकर संगठन की संरचना, मजबूती और अभियानों पर बल दिया जा रहा है। हालांकि पार्टी के दावों की परख अभी हाल में होने वाले पंचायत चुनाव में होने जा रही है। इसी में प्रियंका द्वारा की गयी मेहनत का भी लिटमस टेस्ट हो जाएगा।

लोकसभा में मिली शिकस्त के बाद प्रियंका गांधी ने पार्टी की कमान संभाली और पूरे संगठन को ऊपर से नीचे तक बदल दिया। जमीनी कार्यकर्ता अजय कुमार लल्लू को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपी। संगठन की ओर से ब्लॉक स्तर पर कमेटियों का गठन करने का दावा भी हो रहा है। प्रियंका गांधी ने छोटे-बड़े हर कार्यक्रम, प्रदर्शन में गांव तक के कार्यकर्ताओं को भी शामिल करने का निर्देश दे रखा है। अब पंचायत चुनाव में सम्मेलन आदि के लिए लोगों को जिम्मेदारी दी गयी है।

उधर वरिष्ठ नेताओं ने भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने उपचनुाव में मिली शिकस्त का ठीकरा पार्टी प्रभारी के ऊपर फोड़ रखा है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि, पार्टी में अभी संगठन प्रसार की बहुत आवश्यकता है। कोई प्रदर्शन और आंदोलन में चंद लोगों के बीच बस प्रदेश अध्यक्ष ही दिखते हैं। इससे बड़ा गलत संदेश जाता है। राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद संगठन का बढ़ न पाना बहुत चिंतनीय विषय है। पंचायत चुनाव में सफलता के लिए पार्टी को गांव-गांव अपने कैडर को खड़ा करना पड़ेगा। वरना चुनाव जीतने में बहुत समय लगेगा।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि जब बड़े चुनाव होते हैं उसमें तीन चीजों पर मुख्य फोकस होता है। पार्टी की नीतियांे पर राय, प्रत्याशी के प्रति विचार और संगठन कितना तैयार है। कांग्रेस तीनों पैमाने पर अभी खरी नहीं उतरी है। कांग्रेस नीति, लीडरशिप और संगठन के मामले में अभी तक खरी नहीं उतर सकी है। पंचायत चुनाव सबसे जमीनी स्तर पर होता है। आम भाषा में यह बहुत कठिन माना जाता है। इसमें जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के प्रभाव का परीक्षण होता है। चूंकि बाकी चुनाव में कांग्रेस को बहुत सफलता नहीं मिली है। इसका मुख्य कारण नेतृत्व की उदासीनता और संगठन का अभाव है। इसका असर पंचायत चुनाव में देखने को मिलेगा। कांग्रेस को पंचायत के चुनाव के लिए अपने को तैयार करना होगा, अगर भाजपा से टक्कर लेनी है। कांग्रेस के नेताओं में उत्साह पैदा करना होगा और संगठन को मजबूत बनाना होगा। नहीं तो कांग्रेस के लिए राह कठिन ही रहेगी।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अशोक सिंह कहते है कि पार्टी जमीनी स्तर से तैयारी कर रही है। आशाजनक परिणाम होंगे। वर्तमान में बसपा, भाजपा की प्रवक्ता की तरह काम कर रही है। सपा का जो हाल है वह देख ही रहे हैं। कांग्रेस ही जमीन पर दिख रही है। उपचुनाव में दो जगह उपविजेता भी रही है। कांग्रेस के पांच हजार कार्यकर्ताओं को जेल भेजना और प्रदेश अध्यक्ष पर मुकदमे इस बात का संदेश है कि कांग्रेस पार्टी जमीन पर काम कर रही है। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 4:46 PM 25

गांधीनगर, 3 दिसंबर| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 दिसंबर को गुजरात के कच्छ में दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूबल सोलर विंड एनर्जी पार्क का उद्घाटन करेंगे। इसके बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कहा, "प्रधानमंत्री दो चीजों का उद्घाटन करने के लिए 15 तारीख को गुजरात पहुंचेंगे। वे सौर और पवन ऊर्जा से 30,000 मेगावाट (मेगावाट) क्षमता वाले दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूबल एनर्जी पार्क और जनता और उद्योगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मांडवी में स्थापित डिसालिनेशन प्लांट का उद्घाटन करेंगे।"

गौरतलब है कि अभी एक महीने पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गृह राज्य गुजरात का दौरा किया था। तब उन्होंने देश के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 145 वीं जयंती के उपलक्ष्य में कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया था। इसमें सीप्लेन सेवा आदि शामिल थे। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 2:22 PM 21

नई दिल्ली, 3 दिसंबर। तीन कृषि कानून  के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं. किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार संसद में लाए गए तीनों कृषि कानून को रद्द करे. किसानों के प्रदर्शन को अब अन्य राज्यों के किसानेां का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि किसान संगठनों से बातकर जल्द से जल्द बीच का कोई रास्ता निकाला जाए. केंद्र सरकार से दूसरे दौर की बातचीत से पहले किसानों ने लिखित में सरकार के सामने अपनी मांगों को रखा गया है, जिनपर वो किसी भी तरह लिखित में गारंटी चाहते हैं.

पिछले एक हफ्ते से दिल्ली की सड़कों पर जारी किसान आंदोलन और भी तेज होता दिखाई दे रहा है. दिल्ली कूच करने के लिए हरियाणा और पंजाब के किसानों के साथ कई और संगठन भी जुड़ने लगे हैं. ट्रांसपोर्टरों की बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि अगर सरकार ने 2 दिनों के अंदर किसानों की बात नहीं मानी तो दिल्ली में सभी ट्रक, टैक्सियां ​​बंद कर दी जाएंगी.

आइए जानते हैं कि किसान संगठनों ने सरकार के सामने कौन से 7 मांगे रखी हैं

  •  तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं.
  • वायु प्रदूषण के कानून में बदलाव वापस हो.
  •  बिजली बिल के कानून में बदलाव है, वो गलत है.
  •  MSP पर लिखित में भरोसा दे.
  •  कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर किसानों को ऐतराज.
  • किसानों ने कभी ऐसे बिल की मांग की ही नहीं, तो फिर क्यों लाए गए.
  • डीजल की कीमत को आधा किया जाए.

गौरतलब है कि एक तरफ विज्ञान भवन में किसानों की सरकार के साथ बातचीत चल रही है तो वहीं दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह के घर पर पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह किसान मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं.
 


03-Dec-2020 2:21 PM 15

मुंबई, 3 दिसंबर। बॉलीवुड के ड्रग कनेक्शन की जांच कर रही है नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अपने ही विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों अफसरों की भूमिका संदेहास्पद मिली है. विभाग को शक है कि दोनों ने आरोपियों को जमानत दिलाने और अग्रिम जमानत मिलने में अपरोक्ष रूप से मदद की है. 

गौरतलब है कि ड्रग्स मामले में गिरफ्तार मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिम्बाचिया की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोई अफसर अदालत पंहुचा ही नही था. अदालत को NCB का पक्ष सुने बिना ही दोनों कलाकारों को जमानत देनी पड़ी थी. ऐसा ही कुछ शक अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की टैलेंट मैनेजर रही करिश्मा प्रकाश की अग्रिम जमानत को लेकर भी है. संदेह के घेरे में आये दोनों अफसरों की जांच की जा रही है. 

इस बीच भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया की जमानत खारिज कराने के लिए NCB ने NDPS की स्पेशल कोर्ट में मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी है.  (khabar.ndtv.com)


03-Dec-2020 2:19 PM 22

नई दिल्ली, 3 दिसंबर  | गुस्साए किसानों ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-9 को अवरुद्ध कर दिया, जिससे उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने वाला एक प्रमुख फ्लाईओवर पर यातायात बंद हो गया। ये किसान केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी नाराजगी को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार और किसानों के बीच वार्ता के एक और दौर से पहले उत्तर प्रदेश की सीमा से लगने वाले गाजीपुर में फ्लाईओवर पर प्रदर्शनकारी किसानों की संख्या बढ़ गई है।

हालांकि किसानों ने फ्लाइओवर को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया है, लेकिन उन्होंने एंबुलेंस जाने देने के लिए थोड़ी सी जगह छोड़ रखी है।

पुलिस अधीक्षक (शहर) गजेन्द्र सिंह ने आईएएनएस को बताया, "हमें उम्मीद है कि नाकाबंदी जल्द ही समाप्त हो जाएगी, क्योंकि यह दिल्ली की ओर जाने वाला एक प्रमुख मार्ग है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं।"

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "पुलिस बल ने सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है, ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है, कई स्तरों पर बैरिकेड्स लगाए हैं और दोनों सीमाओं को जोड़ने वाले राजमार्ग से यातायात को क्षेत्र के अंदरूनी हिस्से से डायवर्ट कर दिया है।"

किसानों ने दिल्ली की ओर जाने वाले राजमार्ग पर बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए और उनसे कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की। इस दौरान 'मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी', 'जब जब मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है', 'जय जवान जय किसान', 'काला कानून वापस लो', जैसे नारे लगे।

सभी की निगाहें अब केंद्र के साथ किसान यूनियनों की बैठक पर टिकी हैं। केंद्र और आंदोलनकारी किसान यूनियनों के बीच मंगलवार को हुई बातचीत नए कृषि कानूनों पर गतिरोध को समाप्त करने में विफल रही।

दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर किसान पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे हैं। सिंघु सीमा पर हजारों किसान डेरा डाले हुए हैं, जबकि कई अन्य समूहों ने दिल्ली-हरियाणा सीमा पर दिल्ली-यूपी गाजीपुर सीमा और दिल्ली-यूपी चिल्ला सीमा पर प्रवेश रोक दिया है। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 2:19 PM 16

चंडीगढ़: कृषि कानून को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी हैं. उन्‍होंने दोटूक अंदाज में कहा है कि सरकार को इन कानूनों को तुरंत रद्द करना चाहिए और जब तक कानून को खत्‍म नहीं किया जाएगा, प्रदर्शन जारी रहेगा. इस बीच पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल  ने किसानों के समर्थन में उतरते हुए विरोध स्‍वरूप अपना पद्म विभूषण अवार्ड लौटा दिया है. बादल ने कहा, 'केंद्र सरकार किसानों के साथ छल कर रही है.'पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा ने कृषि कानूनों को लेकर विरोध जताते हुए 'पद्म भूषण' लौटाने की घोषणा की है. उन्‍हें वर्ष 2019 में यह अवार्ड दिया गया था. वे इस बारे में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखेंगे. इस बीच, पंजाब के किसान नेताओं ने कृषि कानूनों के विरोध में 'पद्म विभूषण' लौटाने के पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल की फैसले की सराहना की है.  

गौरतलब है कि तीन नए किसान कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों से केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की आज चौथी बार बातचीत होनी है लेकिन उससे पहले किसानों ने सरकार से साफ तौर पर कहा है कि सरकार के पास बातचीत का यह अंतिम मौका है. किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द संसद का आपातकालीन सत्र बुलाए और उसमें तीनों नए कृषि कानूनों की जगह नया बिल लाए. तीनों नए कानूनों को विवादित कानून बताकर किसान सितंबर से ही आंदोलनरत हैं. उधर, दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शनकारियों की बढ़ती तादाद के बीच ट्रांसपोर्टरों के शीर्ष संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने आंदोलनकारी किसानों का समर्थन करते हुए उत्तर भारत में आठ दिसंबर से परिचालन बंद करने की धमकी दी है. एआईएमटीसी लगभग 95 लाख ट्रक ड्राइवरों और अन्य संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है. (khabar.ndtv.com)


03-Dec-2020 2:17 PM 22

मनोज पाठक

पटना, 3 दिसंबर | बिहार में भी कृषि कानून के विरोध में विपक्षी राजनीतिक दल एक जुट होकर सत्ता पक्ष पर दबाव बनाने की जुगत में हैं। वैसे, बिहार में इसका विरोध किसानों के बीच वैसा देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन वामपंथी दल इसे लेकर अब गांवों में जाने की योजना बना रहे हैं।

बिहार के किसान नेता भी मानते हैं कि यहां के किसानों को कृषि कानून से कोई मतलब नहीं। कृषि कानून किस चिड़िया का नाम है, उन्हें नहीं मालूम।

बिहार में दाल उत्पादन के लिए चर्चित टाल क्षेत्र के किसान और टाल विकास समिति के संयोजक आंनद मुरारी कहते है, बिहार के किसान कानून का विरोध करें या अपने परिवार की पेट भरने के लिए काम करें। यहां के किसानों को नहीं पता है कि एमएसपी किस चिड़िया का नाम है। यहां के किसान भगवान भरोसे चल रहे हैं और सरकारें उनका शोषण कर रही हैं। बिहार में साल 2006 में ही एपीएमसी एक्ट समाप्त हो गया था। अब किसान खुले बाजार में उपज बेचने के आदी हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि यहां के किसान का आंदोलन मक्के और धान की सही समय पर खरीददारी का होगा ना कि कृषि कानून का। उन्होंने हालांकि राजनीति के केंद्र बिंदु में कृषि आ रही है, इस पर संतोष जताते हुए कहा कि बिहार और पंजाब तथा हरियाणा के किसानों में तुलना करना बेकार की बात है।

इधर, कृषि बिल के विरोध में दिल्ली में हो रहे आंदेालन से बिहार के राजनीतिक दलों में सुगबुहाट होने लगी है। कृषि कानून के विरोध में सभी विपक्षी दल एकजुट होकर सत्ता पक्ष पर दबाव बना रहे हैं। बुधवार को पटना में भाकपा माले सहित अन्य वाम दलों के आह्वान पर प्रतिरोध सभा आयोजित की गई तथा प्रधानमंत्री का पुतला फूंका गया।

इस कार्यक्रम में भाकपा-माले, भाकपा और सीपीएम के अलावा राजद के नेताओं ने भी भाग लिया। भाकपा (माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि वार्ता के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को अपमानित किया है।

उन्होंने कहा, एक तरह का पैटर्न बन गया है कि सरकार पहले ऐसे आंदोलनों को दबाती है, गलत प्रचार करती है, दमन अभियान चलाती है, लेकिन फिर भी जब आंदोलन नहीं रूकता, तब कहती है कि यह सबकुछ विपक्ष के उकसावे पर हो रहा है।

इधर, भाकपा (माले) के कार्यालय सचिव कुमार परवेज कहते हैं, भाकपा (माले) गांव-गांव जाकर किसानों को कृषि कानून से होने वाली परेशानियांे से किसानों को अवगत कराएगा और विरोध को लेकर उन्हें एकजुट करेगा। इसके लिए एक योजना बनाई जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि कृषि कानून के विरोध को समर्थन देने के लिए विधायक सुदामा प्रसाद और संदीप सौरभ दिल्ली गए हैं।

इधर, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी कृषि कानून के विरोध में उतर आए हैं।

उन्होंने राजग सरकार को पूंजीपरस्त की सरकार बताते हुए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से गुरुवार को ट्वीट करते हुए लिखा, किसान आंदोलन के समर्थन में और किसान विरोधी काले कानून के विरुद्ध कल (बुधवार) बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर राजद और महागठबंधन द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया। पूंजीपरस्त इस किसान विरोधी एनडीए सरकार को हटा कर ही दम लेंगे।

बहरहाल, बिहार में भी किसान आंदेालन की सुगबुहाट प्रारंभ हुई है, लेकिन देखने वाली बात होगी कि इसमें किसानों की भागीदारी कितनी होगी।  (आईएएनएस)

 


03-Dec-2020 2:15 PM 21

नई दिल्ली, 3 दिसंबर | सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी को तीन दशक पुराने बलवंत सिंह मुल्तानी हत्याकांड में अग्रिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि पुलिस सैनी को गिरफ्तार कर लेती है, तो उसे दो जमानती के साथ 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सैनी को हत्या के मामले की जांच में सहयोग करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सैनी को अपना पासपोर्ट जमा करने के लिए भी कहा और उन्हें कथित हत्या के मामले में गवाहों से दूर रहने का भी निर्देश दिया गया है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा था कि वह सैनी के खिलाफ नए मामले दर्ज न करे और उसके खिलाफ 1991 में एक जूनियर इंजीनियर बलवंत सिंह मुल्तानी की कथित हत्या के मामले में एक नई एफआईआर दर्ज करने की मांग करें।

सैनी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि ऐसा लगता है कि हर दिन उनके मुवक्किल को एक नए मामले को चुनौती देनी होगी।

रोहतगी ने कहा, "अब मेरे मुवक्किल से कहा गया है कि तीसरा मामला दर्ज किया गया है। राज्य की ताकत के खिलाफ एक आदमी कैसे लड़ सकता है। प्रतिशोधकर्ता (वर्तमान मुख्यमंत्री) को रोकने की जरूरत है। अनुमोदनकर्ता के बयान पर जांच क्यों जारी रह सकती है। राज्य मेरे साथ अन्याय कर रहा है।"

हाईकोर्ट ने सितंबर में कथित हत्या के मामले में अग्रिम जमानत की मांग करते हुए सैनी की याचिका खारिज कर दी थी।

साल 1991 में चंडीगढ़ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे सैनी पर आतंकवादी हमले के बाद मोहाली के निवासी मुल्तानी को पुलिस ने पकड़ लिया था। बाद में, पुलिस ने दावा किया कि मुल्तानी पुलिस हिरासत से भाग गया था।

सैनी पर इस मामले में छह अन्य लोगों के साथ मोहाली के एक पुलिस स्टेशन में मई में मामला दर्ज किया गया था और अगस्त में दो आरोपी पुलिसकर्मियों द्वारा घटना का विवरण देने के बाद हत्या का आरोप जोड़ा गया था। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 2:15 PM 31

नई दिल्ली, 3 दिसंबर | कृषि और संबद्ध क्षेत्र में सुधार के कार्यक्रमों को लागू करने के मकसद से केंद्र सरकार द्वारा कोरोना काल में लागू तीन कृषि कानूनों के विरोध में सड़कों पर उतरे किसान फसलों की एमएसपी की गारंटी चाहते हैं। इसलिए, वे एमएसपी कानून की मांग कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस तरह की मांग अव्यावहारिक है। केंद्र सरकार हर साल 22 फसलों के लिए एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है, जिसका मकसद किसानों को उनकी फसलों का वाजिब व लाभकारी मूल्य दिलाना है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि कानून बनाकर किसानों को फसलों की गारंटी देना क्यों अव्यावहारिक है। इस सवाल पर आर्थिक विषयों के जानकार बताते हैं कि इससे सरकार के बजट पर भारी बोझ बढ़ेगा।

विशेषज्ञों के राय में किसानों द्वारा एमएसपी की गारंटी की इन पांच कारणों से अव्यावहारिक है:

1. सरकार द्वारा घोषित 22 फसलों के मौजूदा एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद अगर सरकार को करनी होगी तो इस पर 17 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होगा जबकि केंद्र सरकार की राजस्व प्राप्तियां सिर्फ 16.5 लाख करोड़ रुपये है। कृषि अर्थशास्त्र के जानकार विजय सरदाना द्वारा किए गए इस आकलन के अनुसार, देश के कुल बजट का करीब 85 फीसदी किसानों से एमएसपी पर फसलों की खरीद पर ही खर्च हो जाएगा। वह कहते हैं कि इसके अलावा केंद्र सरकार उर्वरक पर जो अनुदान देती है वह एक लाख करोड़ रुपये के करीब है जबकि फूड सब्सिडी भी करीब एक लाख करोड़ रुपये है। केंद्र सरकार की आमदनी 16.5 लाख करोड़ रुपये है जबकि किसानों की यह मांग मान ली जाए तो कुल केंद्र सरकार पर 17 से 19 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। ऐसे में देश की सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी समेत तमाम खर्च के लिए पैसा नहीं बचेगा।

2. एमएसपी अनिवार्य करने की सूरत में हमेशा सस्ता आयात बढ़ने की आशंका बनी रहेगी क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अगर कृषि उत्पादों के दाम भारत के मुकाबले कम होंगे तो देश के निजी कारोबारी किसानों से फसल खरीदने के बजाय विदेशों से आयात करेंगे। ऐसे में सरकार को किसानों से सारी फसलें खरीदनी होगी।  

3. अगर सरकार किसानों से सारी फसलें एमएसपी पर खरीदेगी तो इसके बजट के लिए करों में करीब तीन गुना वृद्धि करनी होगी। जिससे देश के करदाताओं पर कर का बोझ बढ़ेगा।

4. करों में ज्यादा वृद्धि होने से देश में निवेश नहीं आ पाएगा और रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं हो पाएंगे जिससे अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

5. एमएसपी में वृद्धि होने और वस्तुओं पर करों व शुल्कों की दरें बढ़ाने पर देश का निर्यात प्रभावित होगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि एमएसपी पर फसलों की खरीद की गारंटी देने के लिए कानून बनाने से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।

कृषि अर्थशास्त्री विजय सरदाना कहते हैं कि अगर एमएसपी को अनिवार्य कर दिया गया तो कर का बोझ बढ़ने के कारण देश के उद्योग-धंधे बंद हो जाएंगे और भारत अपनी जरूरतों के लिए चीन से सस्ते माल के आयात पर निर्भर हो जाएगा और देश की स्थिति पाकिस्तान से भी ज्यादा खराब हो जाएगी। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 2:14 PM 18

लखनऊ, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में इंसान व जानवरों के बीच संघर्षो की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया (डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-इंडिया) की तरफ से 'बाघ मित्र' नामक एक टीम का गठन किया जा रहा है। लखीमपुर खीरी में कुल 50 बाघ मित्र चुने गए हैं, जबकि पीलीभीत जिले में 75 बाघ मित्रों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये स्थानीय निवासियों को इस विषय में जागरूक करेंगे, बाघ/चीते के व्यवहारों को समझाने का प्रयास करेंगे, पगमार्क्‍स की पहचान कराएंगे और बचाव कार्य में सहायता प्रदान करने की दिशा में अपना समर्थन देंगे।

डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-इंडिया के स्टेट कॉर्डिनेटर मुदित गुप्ता के मुताबिक, "इंसान और तेंदुओं के बीच संघर्षो से संबंधित घटनाओं में निरंतर इजाफा देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ सालों में जानवरों और बाघों के जंगल से निकलकर इंसानों की बस्ती में घुसने की भी संख्या में वृद्धि हुई है। हम उन्हें इस स्थिति में रहने के बारे में बताएंगे।"
 


03-Dec-2020 2:06 PM 21

संदीप पौराणिक 
भोपाल, 3 दिसंबर|
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 36 साल पहले हुए गैस हादसे के प्रभावितों के जख्म अब तक नहीं भरे हैं। अभी भी वे न्याय और अपने हक के लिए भटक रहे हैं।

भोपाल में दो-तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात को यूनियन कार्बाइड से जहरीली गैस रिसी थी और उसने हजारों लोगों को अपने आगोश में ले लिया था, तो दूसरी ओर हादसे के 36 साल बाद भी लोग बीमारी और समस्याओं से जूझ रहे हैं। लोगों को न तो बेहतर इलाज मिल पाया है और न ही मुआवजा। यही कारण है कि उनके भीतर सरकारों को लेकर घोर असंतोष है।

भोपाल गैस हादसे ने चिरौंजी बाई (85) की जिंदगी को भी मुसीबतों से घेर दिया। उन्होंने गैस हादसे में अपने पति, सास, बड़ी बेटी और दो बेटों को खोया है। उस रात को याद करके उनकी आंखें भर आती हैं और वे बताती हैं कि उनकी जिंदगी तो मुसीबतों का पहाड़ बन गई है। सरकार से पेंशन ही मिल जाती थी जिसके सहारे उनकी जिंदगी चल रही थी मगर अब तो वह भी बंद है।

अकेली चिरौंजी बाई ऐसी नहीं है बल्कि हजारों महिलाएं ऐसी हैं जो दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रही हैं। वहीं ह्रदय लीवर गुर्दे आदि के हजारों मरीज है जिन्हें उपचार की बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। गैस संयंत्र के आसपास की बस्तियों में रहने वाला एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिलता जो समस्याओं से या बीमारी से ग्रसित नहीं हो, क्योंकि लोगों को तो पीने का पानी भी साफ नहीं मिल पा रहा है।

गैस पीड़ितों की लंबे समय से लड़ाई लड़ने वाले सतीनाथ षडंगी कहते हैं कि इस हादसे के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को अमेरिकी सरकार और भारत की सरकार के रवैए के कारण सजा नहीं मिल पाई और वह बगैर जेल जाए ही दुनिया को छोड़ गया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है भोपाल गैस त्रासदी से उपजा दर्द आज भी हम सबको याद है। ईश्वर ऐसी त्रासदी से देश और दुनिया के हर कोने को सर्वदा सुरक्षित रखे। अमूल्य जीवन की रक्षा और सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए समाज एवं सरकार मिलकर कार्य करें, तो ऐसी विपदाओं से विश्व हमेशा सुरक्षित रहेगा।

यूनियन कार्बाइड से दो-तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को रिसी जहरीली गैस मिथाइल आईसो साइनाइड ने हजारों को लेागों को एक ही रात में मौत की नींद सुला दिया था। उस मंजर के गवाह अब भी उस रात को याद कर दहशतजदा हो जाते हैं और वे उस रात को याद ही नहीं करना चाहते। बीते 35 साल में राज्य और केंद्र में कई सरकारें बदल चुकी हैं, मगर गैस पीड़ितों का दर्द कम नहीं हुआ।

भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की संयोजक साधना कार्णिक ने सरकारों पर गैस पीड़ितों के प्रति नकारात्मक रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि गैस प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को जहरीला और दूषित पानी पीने को मिल रहा है। यही कारण है कि, गुर्दे, कैसर, फेंफड़े, हृदय और आंखों की बीमारी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गैस पीड़ितों की मौत हो रही है, मगर उनका पंजीयन नहीं किया जा रहा है।

गैस कांड प्रभावित बस्तियों में अब भी पीड़ितों की भरमार हैं। कहीं अपाहिज नजर आते है तो कहीं हांफते, घिसते लोग। विधवाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बीमार बढ़ रहे है। कहने के लिए तो गैस पीड़ितों के लिए अस्पताल खोले गए हैं मगर इलाज की वह सुविधाएं नहीं है जिसकी बीमारों को जरुरत है। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 1:41 PM 23

नई दिल्ली, 3 दिसंबर। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक शुरू हो गई है। अब सारी निगाहें आरबीआई की ओर से 4 दिसंबर को आने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती करता है या रेपो रेट को ऐसे ही छोड़ देता है। पिछली मौद्रिक समीक्षा के दौरान आरबीआई ने रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की थी। रेपो रेट 4 फीसदी पर जबकि रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर है। जबकि सीपीआई आधारित खुदरा महंगाई दर साढ़े छह साल के ऊंचे स्तर 7.6 पर पहुंच चुकी है।

क्या ईएमआई में कटौती होगी?
ब्याज दरों में कटौती का सीधा असर आपकी ईएमआई पर पड़ता है। लेकिन इस बार आरबीआई की ओर से ब्याज दरों में कटौती की संभावना बनती नहीं दिख रही है। इसलिए ईएमआई में कमी की संभावना भी नहीं दिख रही है। रिजर्व बैंक के लिए महंगाई सबसे बड़ी चिंता है। खुदरा महंगाई दर का बढऩा आम लोगों के लिए मुश्किल बनता जा रहा है। लेकिन, यह काबू के बाहर नहीं है। हालांकि, दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े उम्मीद से अच्छे हैं। आने वाली तिमाहियों में इसे लेकर अनिश्चितता है।

रियल एस्टेट सेक्टर को ज्यादा लिक्विडिटी की जरूरत

इस वक्त रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिति काफी खराब है इसे और लिक्विडिटी की जरूरत है। लेकिन कर्ज लेने वाले नहीं हैं। उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक फिर एक बार ब्याज दर में बदलाव नहीं करेगा। उम्मीद है कि आरबीआई पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा। आरबीआई लिक्विडिटी की मौजूदा स्थिति और भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश आने की रफ्तार को कैसे देखता है। अगर विदेशी निवेश आने की रफ्तार बनी रहती है तो आरबीआई लंबी अवधि में सरप्लस लिक्विडिटी का एक हिस्सा हटाने के लिए मजबूर होगा। बॉन्ड मार्केट के नजरिये से यह पॉलिसी ज्यादा मायने नहीं रखेगी। (abplive.com)

 


03-Dec-2020 1:38 PM 23

सोनीपत, 3 दिसंबर। सिंघु बॉर्डर से किसान आंदोलन की अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। इस आंदोलन में पंजाब के किसानों के बहुत से बच्चे भी साथ पहुंचे हैं। ये बच्चे सुबह ट्रॉलियों में बैठकर ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लेते हैं तो दिन में आंदोलन में शामिल हो जाते हैं। दिनभर खाना बनाने से लेकर अन्य कामों में मदद कर रहे हैं। ज्यादातर बच्चों को यहां आने का स्पष्ट कारण नहीं पता। इनका कहना है कि कुछ भी हो, परिवार का साथ देना हमारा फर्ज है।
वहीं कुछ बच्चों का कहना है कि जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होती वो अपने परिवार वालों के साथ ही रहेंगे। बच्चों ने बतया कि वो ट्रैक्टर की  ट्रालियों में बैठकर ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं। बॉर्डर पर नेटवर्क की दिक्कत है। एक छात्र ने कहा कि धरती हमारी मां है, इसलिए आंदोलन में आए हैं, लेकिन पढ़ाई भी नहीं छोड़ सकते।

बॉर्डर पर नेट की दिक्कत
पंजाब से आए एक छात्र ने बताया कि वह पिता की जगह चाचा के साथ आया है। हर घर से एक आदमी को आना था, लेकिन मेरे पिता बीमार हैं। वह 9वीं में पढ़ता है। स्कूल अभी बंद थे, सोचा था कि यहीं ऑनलाइन क्लास लगा लूंगा, लेकिन सही से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। बॉर्डर पर नेट की दिक्कत है, कई बार तो पूरी क्लास ही निकल जाती है।

सरकार हमारी मांगें जल्द मानें
वहीं 11वीं के एक छात्र ने बताया कि वो अपने घरवालों का खेती में हाथ बंटाता है। आगे मुझे ही खेती संभालनी है। इसलिए मर्जी से आया हूं। कोरोना के कारण पढ़ाई तो वैसे ही बंद है। ऑनलाइन क्लास वापस जाकर लगा लूंगा। अभी अपने परिवार और खेती के लिए यहां आया हूं। हमारी पढ़ाई की इतनी ही चिंता है तो सरकार हमारी मांगें जल्द मान ले, जिससे पढ़ाई कर सकें। (news18.com)

 


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