राष्ट्रीय

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Date : 25-Jan-2020

कोल्हापुर, 25 जनवरी। महाराष्ट्र में पुणे-बेंगलुरू राष्ट्रीय राजमार्ग पर अप्पाची के नजदीक कोग्नोली फटा में एक ट्रक ने कार को टक्कर मार दी, जिसके कारण दो लोगों की मौत हो गयी तथा छह अन्य लोग घायल हो गए। 
पुलिस के अनुसार यह दुर्घटना उस समय हुई जब यह लोग शुक्रवार की रात कर्नाटक के तावंडी घाट से किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होकर लौट रहे थे। (वार्ता)  
 


Date : 25-Jan-2020

बीजिंग, 25 जनवरी । चीन के विभ्भिन प्रांतों में भी तेजी से फैल रहे जानलेवा कोरोना वायरस ने अब खतरनाक रूप अख्तियार लिया है और इसके कारण अभी तक 41 लोगों की मौत हो गयी है। चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। 
राष्ट्रीय स्वास्थ्य समिति के अनुसार कोरोना वायरस का कोई रोकथाम नकार नहीं आ रहा है और प्रतिदिन इसके नए मामले दर्ज किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि चीन के हुबेई प्रांत में 39, हेबै प्रांत में एक और एक अन्य की हेलुंगजांग प्रांत में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण मौत हो गयी है और करीब 1287 लोग इससे संक्रमित है जिनमें से 237 की हालत गंभीर बताई जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस वायरस से संबंधी अभी तक 1965 मामले सामने आये है। महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए चीन सरकार ने हुबेई प्रांत के 10 शहरों में यातायात स्थगित कर दिया गया है। 
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष वर्ष दिसंबर में इस वायरस का पहला मामला दर्ज किया गया था जिसके बाद चीन में कोरोना वायरस खतरनाक रूप अख्तियार करता जा रहा है और इस वायरस की चपेट में आने से अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आकड़ा हालांकि तेजी से बढ़ रहा है जिसको ध्यान में रखते हुए कई देशों ने चीन की यात्रा के लिए अपने-अपने देश के नागरिकों को अलर्ट जारी किया है। 
अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर,नेपाल में भी इस वायरस के मामले सामने आए हैं। (शिन्हुआ)


Date : 25-Jan-2020

मुंबई, 25 जनवरी। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा है कि देश में घुसे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमानों को निकालो। उन्हें निकालना ही चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं लेकिन इसके लिए किसी राजनीतिक दल को अपना झंडा बदलना पड़े, ये मजेदार है। हाल ही में राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने अपनी पार्टी का झंडा बदला है इस पर तंज कसते हुए शिवसेना ने कहा है कि दूसरी बात ये कि इसके लिए एक नहीं, दो झंडों की योजना बनाना ये दुविधा या फिसलती गाड़ी के लक्षण हैं। राज ठाकरे और उनकी 14 साल पुरानी पार्टी ने मराठी के मुद्दे पर पार्टी की स्थापना की लेकिन अब उनकी पार्टी हिंदुत्ववाद की ओर जाती दिख रही है। इसे रास्ता बदलना कहना ही ठीक होगा। 
सामना में लिखा है कि शिवसेना ने मराठी के मुद्दे पर बहुत काम किया हुआ है। इसलिए मराठियों के बीच जाने के बावजूद उनके हाथ कुछ नहीं लगा और लगने के आसार भी नहीं हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को जैसी चाहिए, वैसी ही ‘हिंदू बांधव, भगिनी, मातांनो’ आवाज राज ठाकरे दे रहे हैं। यहां भी इनके हाथ कुछ लग पाएगा, इसकी उम्मीद कम ही है। शिवसेना ने प्रखर हिंदुत्व के मुद्दे पर देशभर में जागरूकता के साथ बड़ा कार्य किया है। मुख्य बात ये है कि शिवसेना ने हिंदुत्व का भगवा रंग कभी नहीं छोड़ा। यह रंग ऐसा ही रहेगा। इसलिए दो झंडे बनाने के बावजूद राज के झंडे को वैचारिक समर्थन मिल पाएगा, इसकी संभावना नहीं दिख रही। 
शिवसेना ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई। इसे रंग बदलना वैसे कहा जा सकता है? इस बारे में लोगों को आक्षेप कम लेकिन पेट दर्द ज्यादा है। भाजपा या दूसरे लोग महबूबा या किसी और से निकाह करते हैं तो चलता है लेकिन यही राजनीतिक व्यवस्था कोई और करे तो इसे पाप साबित किया जाता है। हमने जो सरकार बनाई, ये पाप नहीं बल्कि समाजिक कार्य है। सरकार का उद्देश्य और नीति स्पष्ट है। सरकार संविधान के अनुसार चलाई जाएगी तथा रोटी, कपड़ा, मकान, रोजगार, किसान, मेहनतकशों के कल्याण और सुरक्षा जैसे समान नागरी कार्यक्रमों को लेकर आगे बढ़ेगी। तीन पार्टियों की विचारधारा अलग हो सकती है लेकिन ‘राज्य और जनता का कल्याण करने के लिए सरकार चलानी है’ इस संदर्भ में तीनों एकमत हैं। 
गत पांच वर्षों में भारतीय जनता पार्टी जो कुछ नहीं कर पाई, वो महाविकास आघाड़ी सरकार ने 50 दिनों में कर दिखाया है। जनता का सरकार को समर्थन प्राप्त है। ये देखकर कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्ववाली सरकार नहीं गिरनेवाली, पुराने प्यादों को रंग बदलकर नचाया जाने लगा है। संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली में हर राजनीतिक दल अपना-अपना एजेंडा और झंडा लेकर काम करता रहता है। लेकिन शिवसेना जैसी पार्टी ‘एक झंडा एक नेता’ के साथ 55 वर्षों से काम कर रही है। यह एक तपस्या और त्याग है। सत्ता के लिए शिवसेना ने रंग बदला है, ये ऐसी बात कहनेवाले लोगों के दिमागी दिवालिएपन की निशानी है। 
शिवसेना पर रंग बदलने का आरोप लगानेवाले पहले खुद के चेहरे पर लगे मुखौटे और चेहरे पर लगे बहुरंगी मेकअप को जांच लें। भारतीय जनता पार्टी द्वारा 2014 और 2019 में गिरगिट की तरह रंग बदलने के कारण ही शिवसेना भगवा रंग कायम रखते हुए महाविकास आघाड़ी में शामिल हुई और अब शिवसेना कांग्रेस-राष्ट्रवादी के साथ मिलकर सत्ता बनाकर ‘तेवर’ बदलने को तैयार नहीं है, इसका अंदाजा लगते ही हिंदुत्ववादी वोटों में फूट डालने के लिए यह साजिश रची गई है। गत 14 वर्षों में राज ठाकरे ‘मराठी’ के मुद्दे पर कुछ नहीं कर पाए और अब हिंदुत्व के मुद्दे पर भाग्य आजमा पाएंगे क्या? इसमें भी संदेह है। ‘मनसे’ प्रमुख को अपने मुद्दे रखने और उसे आगे बढ़ाने का पूरा अधिकार है लेकिन उनकी आज की नीति और इसी मुद्दे पर 15 दिन पहले की नीति में कोई मेल नहीं दिख रहा। उन्होंने कल कहा कि नागरिकता कानून को हमारा समर्थन है और कानून के समर्थन के लिए हम मोर्चा निकालनेवाले हैं लेकिन एक महीने पहले उनकी अलग और उल्टी नीति थी। राज ठाकरे ने तिलमिलाकर इस कानून का विरोध किया था। उनका कहना था कि आर्थिक मंदी-बेरोजगारी जैसे गंभीर मसलों से देश का ध्यान भटकाने के लिए अमित शाह इस कानून का खेल खेल रहे हैं और इसमें वे सफल होते दिख रहे हैं लेकिन एक महीने के भीतर ही राज ठाकरे इस खेल का शिकार हो गए और उन्होंने ‘सीएए’ कानून के समर्थन का नया झंडा कंधे पर रख लिया है। 
दो झंडे क्यों? इससे ये बात साफ हो जाती है। एनआरसी और सीएए कानून पर देश में कोलाहल मचा है और सरकार को इसका राजनीतिक लाभ उठाना है। इस कानून का फटका सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं बल्कि 30 से 40 प्रतिशत हिंदुओं को भी लगेगा, इस सच को छुपाया जा रहा है। असम या ईशान्य राज्यों में हाहाकार मचा है। पूर्व राष्ट्रपति के रिश्तेदारों को राष्ट्रीय जनगणना से अलग रखा गया। कहीं पति का नाम है तो पत्नी का नाम नहीं है। भाई का नाम है तो बहन का नाम नहीं है। कारगिल युद्ध में शौर्य चक्र विजेता, 30-35 साल सेना में सेवा देनेवाले नागरिक को इस कानून ने ‘बाहरी’ ठहराया है। इस कानून की हालत ये है कि सेना में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए हजारों लोगों को ‘विदेशी’ बताया गया है। ये केवल हिंदू या मुसलमान तक सीमित मामला नहीं है। राज ठाकरे ने एक महीने पहले कहा था, ‘हमारे देश में 135 करोड़ लोग रहते हैं। इतने लोगों की जनसंख्या को संभालने में मुश्किल हो रही है। ऐसी परिस्थिति में नागरिकता संशोधन कानून के कारण बाहरी लोगों को हम हिंदुस्थान में ले रहे हैं। इसकी व्यवस्था कौन करेगा? यहां की व्यवस्था चरमरा उठी है। जो यहां के मुस्लिम नागरिक हैं उन्हें खुद को असुरक्षित नहीं समझना चाहिए। हालांकि बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल से कितने मुसलमान आए हैं, इसकी जांच होनी चाहिए।’ 
एक महीना पहले इस तरह का ‘पारदर्शी’ मत प्रदर्शित करनेवाले अब मोर्चा निकालने की योजना बना रहे हैं, ये इस बात का द्योतक है कि प्यादों को कोई और नियंत्रित कर रहा है। शिवसेना से पेटदर्द तो है ही। भाजपा के शिवसेना द्वेष की बवासीर दूसरे रास्तों से बाहर निकल रही है और ये उनका पुराना खेल है। बालासाहेब के किसी पुराने भाषण की हू-ब-हू ‘कॉपी’ पढ़ी गई। फिर मंदिर में आरती, मुसलमानों की नमाज और बांग्लादेशियों की हकालपट्टी के मुद्दे भी आए। वीर सावरकर और हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे का हिंदुत्व का मुद्दा लेकर चलना बच्चों का खेल नहीं। फिर भी देश में कोई हिंदुत्व की बात पर अपनी घड़ी फिट कर रहा है तो हमारे पास उनका स्वागत करने की दिलदारी है। विचार ‘उधार’ के भले हों लेकिन हिंदुत्व के ही हैं। हो सके तो आगे बढ़ो! (लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 25-Jan-2020

नई दिल्ली, 25 जनवरी। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ भडक़ाऊ नारेबाजी और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बेहद आपत्तिजनक विडियो सामने आया है। इस वीडियो में जिस लहजे का इस्तेमाल किया गया है, वह हमारे संघीय ढांचे पर प्रहार कर रहा है। एक ऐसा वीडियो जो अलगाववादी और विभाजनकारी अजेंडे को सामने लाता है। टुकड़े-टुकड़े गैंग और आजादी के नारों पर मचे घमासान के बीच जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र शरजिल इमाम के इस विडियो में पूर्वोत्तर और असम को भारत के नक्शे से मिटाने का घृणित मंसूबा बेनकाब हुआ है। यह विडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। 
वायरल वीडियो में जेएनयू छात्र शरजिल इमाम कहता है, हमारे पास संगठित लोग हों तो हम असम से हिंदुस्तान को हमेशा के लिए अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो एक-दो महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से कट कर ही सकते हैं। रेलवे ट्रैक पर इतना मलबा डालो कि उनको एक महीना हटाने में लगेगा...जाना हो तो जाएं एयरफोर्स से। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है।
असम-इंडिया कटकर अलग हो तभी बात सुनेंगे
विडियो में शरजिल बेहद भडक़ाऊ भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहता है, असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी वह हमारी बात सुनेंगे। असम में मुसलमानों का क्या हाल है, आपको पता है क्या? वहां एनआरसी लागू हो गया है। मुसलमान डिटेंशन कैंप में डाले जा रहे हैं...6-8 महीनों में पता चलेगा कि सारे बंगालियों को मार दिया गया वहां... अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा।
शरजिल इमाम के इस वीडियो पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स शरजिल की नापाक मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर यह शख्स असम को भारत से अलग करने जैसा दुस्साहसिक कदम उठाने के लिए लोगों को क्यों उकसा रहा है? ऐसा करके वह क्या साबित करना चाहता है? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को कुछ लोग टुकड़े-टुकड़े गैंग से भी जोडक़र देख रहे हैं। 
ट्विटर पर यूजर्स ने शरजिल के वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। ट्विटर यूजर संदीप सिंह ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, शाहीन बाग प्रोटेस्ट भारत को तोडऩे की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। एक यूजर ने पूछा, कौन है यह जो असम को इंडिया से काटने की बात कर रहा है? एक अन्य यूजर ने लिखा, बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बयान है, अब देश की जनता को भी चाहिए कि ऐसे लोगों की पहचान कर इनपर ऐसा प्रहार करें कि ये या तो देश छोडक़र भाग जाएं या फिर दोबारा ऐसी नीच हरकत करने की सोचें भी न।
शरजिल इमाम के फेसबुक पेज पर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। एक फेसबुक पोस्ट में उसने लिखा है, शाहीन बाग का मॉडल चक्काजाम का है, बाकी सब सेकेंडरी हैं। चक्काजाम और धरने में फर्क समझिए, हर शहर में धरने कीजिए, उसमे लोगों को चक्काजाम के बारे में बताइए और फिर तैयारी करके हाइवेज पर बैठ जाइए।
शाहीन बाग प्रदर्शन में भी मुखर रहा शरजिल 
दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भी शरजिल शामिल हुआ था। अपनी फेसबुक प्रोफाइल में उसने खुद को जेएनयू में मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री (आधुनिक भारतीय इतिहास) का छात्र बताया है। शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समूह दो ग्रुप में बंट गया था। शरजिल ने इस दौरान शाहीन बाग की सडक़ से हटने का ऐलान करते हुए कहा था कि हिंसा की आशंका है और पुलिस प्रदर्शनकारियों को जबरन मंच से हटा सकती है, इसलिए वे शाहीन बाग की सडक़ से हट रहे हैं लेकिन सीएए के खिलाफ विरोध जारी रहेगा।  (नवभारत टाईम्स)
 


Date : 25-Jan-2020

इंदौर, 25 जनवरी। नागरिकता (संशोधन) ऐक्ट (सीएए) और एनआरसी के विरोध में शुक्रवार को एक सीपीएम कार्यकर्ता ने मध्य प्रदेश के इंदौर में खुद को आग के हवाले कर दिया। सीपीएम कार्यकर्ता ने आग लगाने के साथ ही अपने हस्ताक्षर किए गए पैंफलेट भी फेंके। उन पैंफलेट्स लिखा गया था कि ये कानून भारत की स्वतंत्रता और संविधान को खतरे में डाल देंगे। 
दर्जी का काम करने वाले 65 साल के रमेश प्रजापत ने सडक़ के किनारे खड़े होकर राह चलते लोगों को पहले पैम्फलेट बांटे और फिर खुद को आग लगा ली। उनकी हालत फिलहाल गंभीर है।ज्लाल सलामज् लिखे इन पैम्फलेट में स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह और अशफाकउल्ला खान और बी. आर. आंबेडकर की तस्वीरें थीं और आखिर में एक गीत की चंद लाइनें लिखी थीं- तू हिंदू बनेगा ना मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है इंसान बनेगा। 
पीडि़त की हालत गंभीर 
फिलहाल पीडि़त बयान देने की हालत में नहीं है। तुकोगंज के थाना प्रभारी निर्मल कुमार श्रीवास ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि किस वजह से उन्होंने खुद को आग लगा ली। स्टेट सीपीएम सेक्रटरी कैलाश लिम्बोदिया ने पुष्टि की कि प्रजापत एक पार्टी कार्यकर्ता थे। उन्होंने कहा, हमें सूचना मिलते ही हम मौके पर पहुंचे। यह कहना जल्दबाजी होगी कि उसने ऐसा क्यों किया। सीपीएम के डिस्ट्रिक्ट सेक्रटरी छोटेलाल शेरावत ने कहा कि प्रजापत ने इंदौर में पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था। 
पूरा देश कर रहा सीएए का विरोध
सीपीएम कार्यकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित पैंफलेट्स में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया में हाल की हिंसा का जिक्र है। इनमें लिखा है, पूरा देश नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध कर रहा है। धारा 144 लागू होने के बावजूद भी महिलाओं और बच्चों को सडक़ों पर ले जाया गया है। पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग जेल गए हैं। पैंफलेट्स में लिखा है, तानाशाही नहीं चलेगी। (नवभारत टाईम्स)
 


Date : 25-Jan-2020

नई दिल्ली, 25 जनवरी। शाहीन बाग में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच हुई हिंसा के बीच अब लोगों के सब्र का बांध टूटता दिख रहा है। अब रास्ता बंद होने की वजह से परेशानी उठा रहे लोगों ने भी सडक़ पर उतरने का फैसला कर लिया है। ये लोग करीब 40 दिन से बंद कालिंदी कुंज मार्ग को खुलवाने के लिए मार्च निकालने का प्लान बना रहे हैं। बता दें कि शुक्रवार को शाहीन बाग में कुछ पत्रकारों के साथ मारपीट भी हुई। इतना ही नहीं सडक़ पार करने की कोशिश कर रहे लोगों को रोकने के भी मामले सामने आए। बता दें कि वहां संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 
शाहीन बाग प्रदर्शन के खिलाफ अब वहां के लोकल लोग ही सडक़ों पर उतरनेवाले हैं। सडक़ बंद होने की वजह से परेशान सरिता विहार के लोगों का प्लान है कि वे 2 फरवरी को प्रदर्शन करेंगे। ये लोग अपनी कॉलोनी से शाहीन बाग तक मार्च निकालने वाले हैं। इनकी मांग है कि बंद सडक़ को आम लोगों के लिए खोला जाए। 
इसके लिए सरिता विहार में रहनेवाले कुछ लोग सरिता विहार के एसीपी अजब सिंह से मिले भी। उन्होंने सिंह से कहा कि अगले हफ्ते तक कोई रास्ता नहीं निकला तो प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन की तैयारी में जुटे एक रेजिडेंट गब्बर सिंह चौहान ने कहा कि यह किसी राजनीतिक पार्टी की रैली जैसा नहीं होगा। जैसे शाहीन बाग के लोगों को प्रदर्शन का हक है, वैसे ही सरिता विहार और जसोला के लोगों को इसका विरोध करने का हक है। 
वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिलहाल वे लोग यह तय नहीं कर पाए हैं कि सडक़ को आमजन के लिए खोला जाए या नहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बैरिकेड हट भी जाएं तो सडक़ पर चलना मुश्किल होगा। क्योंकि वहां करीब 40 फीट का मेटल का भारत का नक्शा रखा है। इसे क्रेन की मदद से ही हटाया जा सकता है। इसे वेल्डिंग करके बनाया गया है, जिसे हटाने में कुछ दिन लग सकते हैं। 
प्रदर्शनकारियों ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलकर सडक़ को ट्रैफिक के लिए खोलने का भरोसा दिया था। बावजूद इसके टू-वीइलर्स को भी नहीं जाने दिया। ऐसे ही एक शख्स ने बताया, मैं अपने बच्चे को स्कूल से लेकर आ रहा था। प्रदर्शनकारियों ने मुझे रोककर मदनपुर खादर से जाने को कहा। मेरे बार-बार गुजारिश करने पर ही मुझे जाने दिया गया।
शाहीन बाग प्रदर्शन में शुक्रवार को हिंसा भी हुई। वहां एक निजी चैनल के साथ-साथ दूरदर्शन के पत्रकार पर भी हमला हुआ। आंदोलनकारियों ने लाइव प्रोग्राम करने पहुंचे पत्रकारों के तीन कैमरे तोड़ दिए। निजी चैनल के पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की का विडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया।  (टाईम्स न्यूज)
 


Date : 25-Jan-2020

नई दिल्ली, 25 जनवरी । निर्भया के दोषियों की फांसी का दिन अब नजदीक है। दोषियों का बर्ताव इन दिनों बिल्कुल बदला हुआ है। ऐसे हालत में वे खुद को नुकसान न पहुंचा लें, जेल प्रशासन के लिए यह काम सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसके लिए जेल प्रशासन पूरी सावधानी बरत रहा है। कैदियों को टॉइलट तक में अकेले नहीं छोड़ा जा रहा है। दिन-रात उनपर निगरानी रखी जा रही है। बार-बार उनके सेल्स को बदला जा रहा है। 
निर्भया के दोषियों को 1 फरवरी 2020 को फांसी होनी है। अबतक कैदियों ने जेल प्रशासन को अपनी अंतिम इच्छा नहीं बताई है। इस बीच जेल प्रशासन ने दोषियों के घरवालों को पत्र भेजा है। लिखा गया है कि अगर में उनसे आखिरी बार मिलना चाहते हैं तो जेल से संपर्क कर लें। 
फांसी का दिन तय होने के बाद से दोषियों का बर्ताव बदल गया है। मुकेश सिंह ने खुद को जेल के सेल में बंद कर लिया है। वहीं विनय शर्मा आक्रमक हो गया है। विनय इन दिनों बस एक रट लगाए हुए है कि उसे जेल नंबर 4 में बंद दोस्त से मिलने दिया जाए, जिससे कैद में रहने के दौरान उसकी दोस्ती हो गई है। हालांकि, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर का बर्ताव लगभग पहले जैसा ही है। सिंह की खाने की आदतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, विनय खाना खाने से मना कर देता है और ज्यादा बोलने पर हिंसा पर उतारू हो जाता है। शुक्रवार को मुकेश और विनय के घरवाले उनसे मिलने आए थे। करीब आधा घंटा उनकी बातचीत हुई। 
जेल अधिकारियों ने बताया है कि चारों को 1 फरवरी को फांसी देने की तैयारियां चल रही हैं। चारों पर एक डॉक्टर नजर बनाए हुए है। उनकी सेहत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जेल प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह देखना है कि कहीं चारों में से कोई खुद को ही नुकसान न पहुंचा ले। बता दें कि इस मामले का अन्य एक दोषी राम सिंह पहले ही सूइसाइड कर चुका है। फिर दोबारा ऐसा कुछ न हो इसके लिए चारों के सेल लगातार बदले जा रहे हैं। किसी को एक कमरे में दो दिन से ज्यादा नहीं रखा जा रहा। दरअसल, प्रशासन को डर है कि एक ही जगह रखने पर कैदी आत्यहत्या का कोई प्लान बना सकता है। 
चारों दोषियों को टॉइलट में भी अकेले नहीं छोड़ा जा रहा। उनके साथ एक सुरक्षा गार्ड जाता है। नए कमरे में शिफ्ट करने से पहले भी कमरे की छानबीन होती है। इसे एक टीम द्वारा किया जा रहा है जिसमें जेल सुपरिंटेंडेंट भी शामिल होता है। दोषियों के सेल में रात को भी अंधेरा नहीं किया जाता, ताकि गार्ड उनपर निगरानी रख सके। 
मिली जानकारी के मुताबिक, जेल नंबर तीन के उस वार्ड के बाहर जहां दोषियों को रखा गया है वहां 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। जिन सेल्स में दोषियों को रखा गया है वहां तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के जवान तैनात हैं। टीम को सख्त हिदायत है कि उन्हें कैदियों से किसी भी सूरत में बातचीत नहीं करनी है। (टाईम्स न्यूज)
 

 


Date : 25-Jan-2020

हैदराबाद, 25 जनवरी । तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद स्थित एक वृद्धाश्रम से 73 बुजुर्गों को रेस्क्यू किया। सूत्रों के मुताबिक, इन बुजुर्गों को चेन से बांधकर वहां रखा गया था। इनमें से अधिकतर मानसिक रोगों से पीडि़त हैं। 
जानकारी के मुताबिक, हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित नगराम गांव में एक वृद्धाश्रम के कमरे में बंद 73 लोगों को पुलिस ने बचाया। पुलिस के मुताबिक, वृद्धाश्रम में इलाज और देखभाल के नाम पर बुजुर्गों पर अत्याचार किया जाता था। पड़ोसियों ने इस मामले की जानकारी पुलिस को दी। ममता ओल्ड एज होम नामक एनजीओ द्वारा इस अनधिकृत वृद्धाश्रम को चलाया जा रहा था। इन 73 बुजुर्गों को सिर्फ दो कमरों में रखा गया था। एक कमरे में 52 पुरुषों को और दूसरे कमरे में 21 महिलाओं को रखा गया था। 
सूत्रों की मानें तो इन बुजुर्गों को कई बार पीटा भी जाता था। पुलिस के मुताबिक, वृद्धाश्रम प्रबंधन के खिलाफ माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आश्रम में मौजूद सभी लोगों को अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने कहा, वृद्धाश्रम के प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया गया है। हमें शिकायत मिली थी कि मनोरोगी और मानसिक रूप से परेशान व्यक्तियों को घर के अंदर जंजीरों में कैद करके रखा गया है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। मामले की जांच चल रही है।(नवभारतटाईम्स)
 


Date : 25-Jan-2020

झारग्राम (पश्चिम बंगाल), 25 जनवरी। पश्चिम बंगाल के झारग्राम से किन्नरों के आतंक की खौफनाक घटना सामने आई है। झारग्राम के एक अस्पताल में कुछ दिनों पहले जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। इन बच्चों के जन्म के कुछ ही दिन बाद किन्नर वहां पहुंच गए और उन्होंने एक बच्चे को अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद किन्नरों ने नवजात बच्चे के साथ जबरन डांस करना शुरू कर दिया। इसी दौरान एक किन्नर के हाथ से बच्चा गिर गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने तीन आरोपी किन्नरों को अरेस्ट कर लिया है। 
घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने किन्नरों को बंधक बना लिया। बताया जा रहा है कि बच्चा सुमन किन्नरों के डांस के दौरान हाथ से गिर गया और बीमार पड़ गया। सुमन के गिरने के संकेत मिलने के बाद उसके पिता चंदन खिलारी तुरंत उसे हॉस्पिटल ले गए जहां नवजात बच्चे की मौत हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने तीनों किन्नरों रुमाला मंडल, सुहाना मंडल और रानी मंडल को बंधक बना लिया। बाद में इन तीनों को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। 
खिलारी की पत्नी ने 4 दिसंबर को जुडवां बच्चों को जन्म दिया था और वे करीब एक महीने तक हॉस्पिटल में रहे। परिवार करीब 20 दिन पहले ही बच्चे को अस्पताल से घर लाया था। पेशे से ड्राइवर ने खिलारी ने कहा, किन्नरों को सूचना मिल गई कि हमारे यहां नवजात बच्चे का जन्म हुआ है और वे शुक्रवार को हमारे घर आ धमके। उन्होंने 11 हजार रुपये मांगे और जुड़वां बच्चे के साथ डांस करने की इच्छा जताई।
खिलारी ने आगे बताया, मैंने उनसे कहा कि मैं इतना पैसा नहीं दे सकता हूं। काफी बहस के बाद हम 2 हजार रुपये देने पर सहमत हुए। मैंने उनसे अनुरोध किया कि पैसा लो और चले जाओ। लेकिन किन्नरों ने बच्चे के साथ डांस करने पर जोर दिया। जब वे डांस कर रहे थे, सुमन बहुत बीमार हो गया। मैं उसे तुरंत हॉस्पिटल ले गया लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद खिलारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। झारग्राम के एसपी अमित कुमार ने कहा कि हम पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। (टाईम्स न्यूज)
 


Date : 25-Jan-2020

मुंबई, 25 जनवरी । पिछले साल साल में पहली बार महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याएं बढ़ गई हैं। राज्य में 2019 में 2018 के मुकाबले 47 ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की। राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में किसानों की आत्महत्या के 2,808 मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि क्योंकि 2015 के बाद से राज्य में किसानों की आत्महत्याओं में लगातार गिरावट देखी गई है। 2015 में 3,228, 2016 में 3,052 किसानों की आत्महत्या दर्ज की गई। जब पिछली बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने कर्जमाफी की घोषणा की तो 2017 में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा 2,917 तक पहुंच गया। 2018 में भी इस आंकड़े में कमी आई और यह आंकड़ा 2,761 हो गया। 
किसानों की आत्महत्या में गिरावट का यह दौर 2019 में थम गया, क्योंकि सूबे के किसानों के लिए यह साल काफी मुश्किलों भरा था। मराठवाड़ा क्षेत्र में मानसून के दौरान भी बारिश की कमी थी और पश्चिमी महाराष्ट्र में जुलाई-अगस्त में आई भीषण बाढ़ की वजह से 4 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई थी। और फिर जब खरीफ की फसल का समय आया तो बेमौसम बारिश हो गई, जिससे 93 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई। नवंबर 2019 में कार्यभार संभालने वाली महाविकास आघाड़ी सरकार ने एक महीने बाद नई कर्जमाफी की घोषणा की। 
2019 में दर्ज किए गए 2,808 मामलों में से सबसे ज्यादा विदर्भ की कॉटन बेल्ट से थे। यहां कुल आत्महत्याओं का 47 फीसदी यानी 1,286 किसानों ने आत्महत्या की। मराठवाड़ा क्षेत्र में 937 आत्महत्याएं दर्ज की घईं। उत्तर महाराष्ट्र में 491 मामले, वहीं पश्चिमी महाराष्ट्र की शुगर बेल्ट में 93 मामले दर्ज किए गए। कोंकण में सिर्फ एक मामला दर्ज किया गया। 
सबसे अधिक आत्महत्याओं वाला जिला विदर्भ का यवतमाल था, जिसमें आत्महत्या के 286 मामले दर्ज किए गए। उसके बाद विदर्भ के ही बुलढाणा जिले में 271 और अमरावती जिले में 265 मामले सामने आए। मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा मामले बीड जिले में सामने आए। बीड में बीते साल 226 किसानों ने आत्महत्या की। 
किसानों की आत्महत्या को लेकर ऐक्टविस्ट्स का कहना है कि कर्जमाफी और फसल के नुकसान के मुआवजे से परे राज्य को खेती को और अधिक लाभदायक बनाने की जरूरत है। विदर्भ के रहने वाले ऐक्टिविस्ट विजय जंधिया ने कहा, खेती के इनपुट और श्रम की लागत इतनी अधिक है कि एक किसान खराब मौसम में सर्वाइव नहीं कर सकता है। खेती का अर्थशास्त्र किसानों के खिलाफ है।(टाईम्स न्यूज)
 

 


Date : 24-Jan-2020

नई दिल्ली, 24 जनवरी । दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी कैंडिडेट कपिल मिश्रा के हिन्दुस्तान-पाकिस्तान मैच और मिनी पाकिस्तान वाले बयान पर सियासत गरमा गई है। कपिल मिश्रा के भारत-पाकिस्तान मैच वाले बयान पर उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की प्रतिक्रिया आई है। मनीष सिसोदिया ने भारत-पाकिस्तान मुकाबले वाले बयान पर कहा कि 11 तारीख को जीतेगा तो भारत ही। कपिल मिश्रा को रिटर्निंग अधिकारी ने शाहीनबाग प्रदर्शन को लेकर मिनी पाकिस्तान वाले ट्वीट पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक टीवी चैनल से कपिल सिब्बल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आठ फरवरी को चुनाव हैं और 11 को नतीजे आएंगे। मैं एक भारतीय होने के नाते फक्र करता हूं 11 तारीख को जीतेगा तो भारत ही। अब उनको तय करना है कि क्या वो पाकिस्तान बनेंगे?।(लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 24-Jan-2020

बीजिंग, 24 जनवरी चीन में इन दिनों फैले कोरोनावायरस संक्रमण को देखते हुए यहां स्थित भारतीय दूतावास ने  गणतंत्र दिवस  पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है।
भारतीय दूतावास की ओर से शुक्रवार को एक ट््वीट में कहा गया है, ‘‘चीन में कोरोनावायरस के संक्रमण से उत्पन्न हालातों को देखते हुए और अधिक लोगों के एक साथ जमा होने पर  स्थानीय प्रशासन के रोक संबंधी निर्देश को देखते हुए दूतावास में 26 जनवरी को मनाये जाने वाले गणतंत्र दिवस समारोह कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है।’’
चीन में इन दिनों इस विषाणु का काफी संक्रमण देखने को मिल रहा है और इसके चलते अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है और 830 अन्य बीमार हैं। अधिकतर मामले चीन के हुबेई प्रांत में देखे गए हैं।
चीनी विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय ने बताया कि इस रोग पर काबू पाने के लिए 14 विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय टीम का गठन किया गया है।
गौरतलब है कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, वियतनाम, ङ्क्षसगापुर और थाइलैंड में इस बीमारी के कई मामलों की पुष्टि की जा चुकी है और गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि अभी इसे वैश्विक महामारी घोषित करना काफी जल्दबाजी होगा।(वार्ता) 

 


Date : 24-Jan-2020

भोपाल, 24 जनवरी। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कपड़ों से पहचानने वाला बयान दिया था। पीएम मोदी के बाद अब उनकी ही पार्टी के सीनियर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने अजीबोगरीब बयान दिया है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, मेरे घर में काम कर रहे मजदूरों के पोहा खाने के स्टाइल से मैं समझ गया कि वह बांग्लादेशी हैं।
गुरुवार को इंदौर शहर में एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, जब हाल में ही मेरे घर में एक कमरे के निर्माण का काम चल रहा था तो कुछ मजदूरों के खाना खाने का स्टाइल मुझे अजीब लगा। वे केवल पोहा खा रहे थे। मैंने उनके सुपरवाइजर से बात की और शक जाहिर किया कि क्या ये बांग्लादेशी हैं। इसके दो दिन बाद सभी मजदूर काम पर आए ही नहीं।
विजयवर्गीय ने लोगों को किया आगाह
बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस मामले में मैंने अभी तक पुलिस शिकायत नहीं दर्ज कराई है। मैं केवल इस घटना का जिक्र करते आप लोगों को आगाह करना चाहता हूं। यह सब देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा है। मैं जब बाहर जाता हूं तो मेरे साथ 6 सुरक्षाकर्मी चलते हैं, क्योंकि घुसपैठिए देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं।
विजयवर्गीय बोले- देश हित में है सीएए
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में बोलते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, अफवाहों से गुमराह मत हो, सीएए में देश का हित है। यह कानून वास्तविक शरणार्थियों को नागरिकता देगा और घुसपैठियों की पहचान होगी, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
आग लगाने वालों का पता कपड़ों से चल जाता
झारखंड में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था, ये कांग्रेस और उसके साथी हो-हल्ला मचा रहे हैं, तूफान खड़ा कर रहे हैं। उनकी बात चलती नहीं है तो आगजनी फैला रहे हैं। ये जो आग लगा रहे हैं, टीवी पर जो उनके दृश्य आ रहे हैं, ये आग लगाने वाले कौन हैं, उनके कपड़ों से ही पता चल जाता है। (आजतक)
 


Date : 24-Jan-2020

नई दिल्ली, 24 जनवरी। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार कपिल मिश्रा को मिनी पाकिस्तान वाले उनके विवादास्पद ट्वीट लेकर रिटर्निंग अधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। कपिल मिश्रा को यह नोटिस ऐसे वक्त में मिला है, जब उनके ट्वीट को लेकर चुनाव आयोग ने दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि कपिल मिश्रा ने दिल्ली चुनाव को लेकर दो ट्वीट किया था, जिनमें से एक में मिनी पाकिस्तान वाला था और दूसरे में उन्होंने कहा था कि 8 फरवरी को भारत-पाकिस्तान का मैच होगा। 
नोटिस में गुरुवार को कपिल मिश्रा से उनके द्वारा किए गए ट्वीट्स को लेकर जवाब मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि कपिल मिश्रा के कृत्य से आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन होता है और इस कानून के अंतर्गत यह दंडनीय अपराध है। उनसे पूछा गया है कि कारण बताएं कि आपके खिलाफ क्यों न कार्रवाई शुरू की जाए?
दरअसल, संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन स्थल को विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार कपिल मिश्रा ने मिनी पाकिस्तान करार दिया था। इससे पहले आम आदमी पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल होने वाले मिश्रा ने कहा कि आठ फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में दिल्ली की सडक़ों पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान का मुकाबला होगा।
कपिल मिश्रा ने गुरुवार को दो ट्वीट किया, एक ट्वीट में उन्होंने कहा, आठ फरवरी को दिल्ली में भारत बनाम पाकिस्तान होगा। आठ फरवरी को दिल्ली की सडक़ों पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान का मुकाबला होगा। एक अन्य ट्वीट में कपिल ने कहा, पाकिस्तान की एंट्री शाहीन बाग में हो चुकी हैं और दिल्ली में छोटे छोटे पाकिस्तान बनाये जा रहे हैं। शाहीन बाग, चांद बाग, इंद्रलोक में देश का कानून नहीं माना जा रहा है और पाकिस्तानी दंगाइयों का दिल्ली की सडक़ों पर कब्जा है।
अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके कपिल मिश्र दिल्ली के मॉडल टाउन से भाजपा उम्मीदवार हैं। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता को केजरीवाल ने 2017 में मंत्री पद से हटा दिया था। दिल्ली में 8 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे और नतीजे 11 फरवरी को आएंगे। दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं जिसमें से 58 सामान्य श्रेणी की है जबकि 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। (लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 24-Jan-2020

नई दिल्ली, 24 जनवरी । आवारा गायों की बढ़ती संख्या पर काबू के लिए पशु पालन विभाग ने इन गायों को उत्कृष्ट गायों (ज़्यादा दूध देने वाली) के जन्म के लिए सेरोगेट मदर के तौर पर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है।
अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पशुपालन आयुक्त डॉ. प्रवीण मलिक ने कृषि पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में अपनी सिफारिश दी। उन्होंने ये सिफारिश गर्मियों में आवारा गायों के कारण फसल खराब होने की समस्या के समाधान के संदर्भ में की है।(इंडियन एक्सप्रेस)
 


Date : 24-Jan-2020

नई दिल्ली, 24 जनवरी। ट्रोल पेट्रोल इंडिया : एक्सपोजिंग ऑनलाइन अब्यूज फेस्ड बाय वूमन पॉलिटिशियंस नाम के एक नए अध्ययन में पता चला है कि भारतीय महिला नेताओं को ट्विटर पर लगातार दुव्र्यवहार का सामना करना पड़ता है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की मदद से किए गए इस अध्ययन में 95 भारतीय महिला नेताओं के लिए किए गए ट्वीट्स की समीक्षा की गई।
इस अध्ययन में पाया गया कि 95 महिला नेताओं को किए गए 13.8 फीसदी ट्वीट्स या तो आपत्तिजनक थे या फिर अपमानित करने वाले थे। इसका मतलब ये हुआ कि इन सभी महिला नेताओं ने रोज 10 हजार से भी ज़्यादा अपमानजनक ट्वीट्स का सामना किया।
अध्ययन से भी यह भी पता चला कि मुसलमान महिला नेताओं को बाकी धर्मों की महिलाओं के मुकाबले 91.4 फीसदी ज़्यादा आपत्तिजनक ट्वीट किए जाते हैं।
यह अध्ययन साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान और उनके तुरंत बाद (मार्च 2019-मई 2019) किए गए थे।
अध्ययन के नतीजों से जो प्रमुख निष्कर्ष निकाले गए, वो कुछ इस तरह हैं :
भारत महिलाओं के लिए गए हर सात में से एक ट्वीट आपत्तिजनक था। लोकप्रिय महिला नेताओं को ज़्यादा ट्रोलिंग झेलनी पड़ी। मुसलमान महिला नेताओं को बाकी महिला नेताओं के मुकाबले 55.5 फीसदी ज़्यादा आपत्तिजनक ट्वीट्स का सामना करना पड़ा। मुसलमान नेताओं के धर्म को लेकर जो अपमानजनक ट्वीट किए गए वो हिंदू नेताओं के लिए गए ट्वीट्स की तुलना में दोगुनी थी।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग की नेताओं को अन्य नेताओं की तुलना में 59 फ़ीसदी ज़्यादा ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उनके लिए जाति-आधारित अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया गया।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग पर दिल्ली की नाजिया ने खुलकर बात रखी।
एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने नवंबर 2019 में रिसर्च के नतीजों को ट्विटर से साझा किया और पूछा कि क्या आम चुनाव के दौरान ऑनलाइन ट्रोलिंग रोकने के लिए कोई खास कदम उठाए गए थे?
अपने जवाब में ट्विटर ने कहा, ट्विटर को सार्वजनिक बातचीत से गुमराह करने वाली अभद्र भाषा। स्पैम और बाकी दुर्व्यवहारों से मुक्त कराना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। हम इस दिशा में आगे भी बढ़ रहे हैं और लगातार कोशिश कर रहे हैं ट्विटर पर लोगों का अनुभव सकारात्मक रहे।
हालांकि कई महिला नेता ट्विटर के दावों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि ट्विटर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में नाकामयाब साबित हो रहा है।
भारतीय जनता पार्टी की नेता शाजिया इल्मी ने कहा, महिलाओं को बढ़-चढक़र राजनीति में आना चाहिए लेकिन इस काम को करने की जो कीमत मैं चुकाती हूं, वो बहुत ज़्यादा है। ट्विटर पर मैं लगातार ट्रोल होती हूं, ऑनलाइन उत्पीडऩ का शिकार होती हूं। मैं कैसी दिखती हूं, मेरा रिलेशनशिप स्टेटस क्या है, मेरे बच्चे क्यों नहीं हैं। जितनी गंदी बातें आप सोच सकते हैं, मैं वो सब झेलती हूं। जो लोग मेरे विचारों से इत्तेफाक नहीं रखते, वो मेरे काम के बारे में टिप्पणी नहीं करते बल्कि हर संभव भाषा में मुझे वेश्या कहते हैं।
आम आदमी पार्टी की आतिशी मार्लेना ने इस बारे में कहा कि सार्वजनिक जगहों पर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी महिला की जिम्मेदारी नहीं है।
उन्होंने कहा, मिसाल के तौर पर अगर कोई महिला सार्वजनिक यातायात का इस्तेमाल करती है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। ठीक इसी तरह अगर कोई महिला ट्विटर का इस्तेमाल कर रही है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित कराना भी ट्विटर की ही जिम्मेदारी है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माक्र्सवादी-लेनिनवादी) की नेता कविता कृष्णन का कहना है कि ऑनलाइन ट्रोलिंग से मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है।
उन्होंने कहा, कई बार ऐसा होता है कि आप किसी ट्वीट को रिपोर्ट करते हैं और फिर ट्विटर कहता है कि वो ट्वीट उसकी नीतियों का उल्लंघन नहीं करता। फिर तो इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को रिपोर्टिंग और शिकायत का सारा दिखावा ही बंद कर देना चाहिए। अगर पर किसी पर कोई कार्रवाई ही नहीं कर रहे हैं, तो नीतियां बनाए रखने का फायदा क्या हुआ?
डॉक्टर नीतू राणा पेशे से मनोवैज्ञानिक हैं और लंबे वक्त से ऑनलाइन ट्रोलिंग का इंसानी दिमाग पर होने वाले असर का अध्ययन कर रही हैं। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया कि ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स पर ट्रोलिंग का मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो सकता है।
डॉक्टर नीतू कहती हैं, सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोल होने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है। खुद को लेकर हीन भावना और असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। ऑनलाइन उत्पीडऩ के शिकार कुछ लोग अलग-थलग रहने लगते हैं और बाकियों से दूरी बनाने लगते हैं।
डॉक्टर नीतू के मुताबिक ट्रोल्स के साथ किसी तरह की बातचीत या बहस में शामिल ही नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, अगर आप ट्रोल्स के कमेंट्स की परवाह करते हैं, उनका जवाब देते हैं और नाराजगी जताते हैं तो इससे उनका हौसला बढ़ता है। उन्हें पता चल जाता है कि आप उनकी बातों से परेशान हो रहे हैं और इसलिए वो आपको ज़्यादा परेशान करने लगते हैं। इसलिए जैसे ही कोई आपत्तिजनक कमेंट आए, तुरंत उसे डिलीट या रिपोर्ट करें। सोशल मीडिया पर स्वस्थ्य बहस में कोई हर्ज नहीं है लेकिन खुद को उत्पीडऩ का शिकार बिल्कुल न बनने दें। (बीबीसी)
 


Date : 24-Jan-2020

प्रयागराज, 24 जनवरी । नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन जारी है। इस कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच प्रयागराज से ऐसी खबर आई है, जिस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। प्रयागराज में एक कांग्रेस नेता ने सीएए का विरोध करने का ऐसा तरीका अपनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 21 जनवरी को सीएए के खिलाफ में कांग्रेस नेता हसीब अहमद कब्रिस्तान गए और अपने पूर्वजों से अपनी नागरिकता का सबूत देने के लिए प्रार्थना की।
एएनआई इस विरोध की कुछ तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में से एक में कांग्रेस नेता हसीब अहमद को अपने पूर्वजों के कब्र के पास बैठकर रोते हुए देखा जा सकता है। वह यहां अपने पूर्वजों से नागरिकता की गवाही देने की अपील कर रहे हैं।
इस पर कांग्रेस नेता हसीब अहमद ने कहा कि हमारे पास दस्तावेज नहीं हैं और हम पीढियों से भारत में रह रहे हैं। हम अपने पूर्वजों से गवाही देने के लिए कह रहे हैं कि हम इस देश के नागरिक हैं। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि अगर हमें डिटेंशन सेंटर भेजा जाता है तो हमारे पूर्वजों के अवशेष को भी वहां रखा जाए। 
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर लोग दो पक्षों में बंट चुके हैं। एक पक्ष जहां इसका विरोध कर रहा है तो वहीं दूसरा पक्ष इसके समर्थन में है। मोदी सरकार के कई केंद्रीय मंत्री से लेकर बीजेपी शासित राज्यों के मंत्री, सांसद, विधायक नागरिकता कानून के समर्थन में रैली निकाल रहे हैं और जनअभियान चला रहे हैं। वहीं दूसरी ओर दिल्ली के शाहीनबाग से लेकर वाराणसी, लखनऊ में लोग इसकी खिलाफत कर रहे हैं। 
संशोधित नागरिकता कानून के अनुसार धार्मिक प्रताडऩा के चलते 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने गुरुवार की रात नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 को स्वीकृति प्रदान कर दी थी जिससे यह कानून बन गया था।(एएनआई/लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 24-Jan-2020

अमरावती, 24 जनवरी । आंध्र प्रदेश में बीते कुछ समय से राजधानी के मसले पर सियासत गर्म है। तीन राजधानी के मसले पर घमासान के बीच आंध्र प्रदेश से जमीन घोटाले का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो हैरान करने वाला है। दरअसल, 797 सफेद राशन कार्ड वालों ने करीब 200 करोड़ रुपये की कीमत की 700 एकड़ की जमीनें खरीद लीं। इसका खुलासा खुद सीआईडी ने किया है। आंध्र प्रदेश में जमीन घोटाले के इस सनसनीखेज मामले में राज्य की सीआईडी ने करीब 797 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। 
सीआईडी जांच में ये बात सामने आई है कि कि अमरावती क्षेत्र में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत वाले 700 एकड़ जमीन वाले प्लॉट के मालिकों की मासिक आय 5 हजार रुपये से भी कम है। इसके अलावा, इनमें से अधिक के पास पैन कार्ड भी नहीं है। बता दें कि अमरावती में 2014-2015 के दौरान जमीनें खऱीदी गईं।
आंध्र प्रदेश के अपराध जांच विभाग यानी सीआईडी ने साल 2014 और 2015 के बीच अमरावती राजधानी क्षेत्र के 5 मंडलों में अवैध रूप से जमीन खरीद-बिक्री में लिप्त होने के कारण टीडीपी के पूर्व मंत्री पृथ्वीपति पुल राव, पी नारायण और 797 से अधिक अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। 
सीआईडी के एडीजी सुनील कुमार ने कहा कि 797 श्वेत राशन कार्ड धारकों ने 200 करोड़ रुपये से से अधिक की 700 एकड़ जमीन खरीदी। इन सभी सफेद राशन कार्ड धारकों ने अपनी आय 5,000 रुपये प्रति माह से कम घोषित की है, इसलिए निश्चित रूप से ये संदिग्ध हैं और इनके लेन-देन भी संदिग्ध हैं। उन्होंने आगे बताया कि उनमें से करीब 500 लोगों के पास पैन कार्ड भी नहीं है।(एएनआई / लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 24-Jan-2020

सिलीगुड़ी, 24 जनवरी। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जिले में एक मजदूर रातोरात करोड़पति बन गया। उसे अब तक यकीन नहीं हो पा रहा है कि कैसे वह फर्श से अर्श तक पहुंच गया है। 
घटना सिलीगुड़ी के माटीगाड़ा बलासन कॉलोनी की है, यहां के निवासी नरहरि राय जो पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर है, उन्होंने गुरुवार को एक लॉटरी खरीदी और उस लॉटरी में उसे एक करोड़ रुपये का पहला पुरस्कार मिल गया। 
पूरी कहानी बताते हुए नरहरि कहते हैं कि गुरुवार को काम करने के दौरान वे चाय पीने के लिए बलासन बाजार गए, वहां से तीस रुपये की एक लॉटरी खरीदी। उस लॉटरी ने नरहरि राय को करोड़पति बना दिया।
जब नरहरि राय की लॉटरी लग गई तो उसे पहले विश्वास नहीं हुआ लेकिन बाद में उसे विश्वास हुआ कि उसकी एक करोड़ रुपये की लॉटरी लगी है। इसके बाद नरहरि राय अपने परिवार को लेकर माटीगाड़ा थाना पहुंचे और लॉटरी की फोटो कॉपी थाने में दी। 
नरहरि राय ने कहा कि इस लॉटरी ने उनके परिवार के अभाव को दूर कर दिया है। उनका परिवार अब ख़ुशी-खुशी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस पैसे से वे इलाके के विकास में भी सहयोग करेंगे। (आजतक)
 


Date : 24-Jan-2020

नई दिल्ली, 24 जनवरी । दुबई में छिपे बैठे घोटाले के किंग पिन हामिद अशरफ ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स को ईमेल और व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर ऑफर दिया है कि अगर उसे दो लाख रुपये महीने दिया जाए तो वो आईआरसीटीसी की वेबसाइट में तकनीकी खामी को दूर कर देगा। हामिद अशरफ ने कहा कि उसे पकडऩे से कोई फायदा नहीं होने वाला क्योंकि उसक जगह कोई दूसरा भी आईआरसीटीसी की वेबसाइट की खामियों का फायदा उठाकर ई-टिकट की खरीद फरोख्त कर सकता है। उसने ये भी कहा है कि वो इस टेंशन से निकलना चाहता है और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सूकुन से रहना चाहता है।(एबीपी न्यूज)
 


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