राष्ट्रीय

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Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने द हिन्दू अखबार में एक लेख लिखकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण डर और अविश्वास का माहौल है।
मनमोहन सिंह ने लेख में लिखा है- भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ही निराशाजनक स्थिति में है। मैं ऐसा एक विपक्षी पार्टी के सदस्य के तौर पर नहीं कह रहा हूं बल्कि भारत के एक नागरिक और अर्थशास्त्र के एक विद्यार्थी के तौर पर कह रहा हूं। पिछले 15 सालों में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सबसे निचले स्तर पर है। बेरोजग़ारी पिछले 45 सालों में सबसे उच्चतम स्तर पर है। लोगों की खर्च करने की क्षमता पिछले 40 सालों में सबसे निचले स्तर पर आ गई है।
मनमोहन ने आगे लिखा है- बैंकों का बैड लोन सबसे उच्चतम स्तर पर है। बिजली उत्पादन की वृद्धि दर पिछले 15 सालों में सबसे न्यूनतम स्तर आ गई है। यह उच्चतम और न्यूनतम सूची बहुत लंबी है और निराश करने वाली है। लेकिन परेशान करने वाली बात केवल ये आँकड़े नहीं हैं। अब तो इन आँकड़ों के प्रकाशन पर भी पहरा है।
लेख में आगे कहा गया है कि किसी भी मुल्क की अर्थव्यवस्था उसके समाज की कार्यप्रणाली को भी दर्शाती है। कोई भी अर्थव्यवस्था लोगों और संस्थाओं की भागीदारी से चलती है। पारस्परिक भरोसा और आत्मविश्वास आर्थिक वृद्धि के लिए मूल तत्व है। लेकिन आज के समय में सामाजिक विश्वास की बुनावट और भरोसे को संदिग्ध बना दिया गया है।
आज की तारीख में लोगों के बीच डर का माहौल है। कई उद्योगपती मुझसे कहते हैं कि वो सरकारी मशीनरी की प्रताडऩा के डर में रह रहे हैं। बैंकर्स नया कर्ज देने से डर रहे हैं। उद्यमी नया प्रोजेक्ट शुरू करने से डर रहे हैं। टेक्नॉलजी स्टार्ट-अप्स आर्थिक वृद्धि दर और नौकरियों के नए इंजन हैं लेकिन यहां भी निराशा का माहौल है।
मनमोहन ने आगे लिखा है- इस सरकार में नीति निर्माता और संस्थान सच बोलने से डर रहे हैं। अविश्वास के इस माहौल में अर्थव्यवस्था प्रगति नहीं कर सकती। संस्थानों और लोगों के बीच अविश्वास बढ़ेगा तो इससे अर्थव्यवस्था की गति प्रभावित होगी। लोगों के बीच भरोसे की कमी या अविश्वास का असर सीधा अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
डर के साथ ही बेबसी का भी माहौल है। जो अंसतुष्ट हैं उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। लोग स्वतंत्र संस्थानों पर भरोसा करते हैं। मीडिया, न्यायपालिका, नियमन संस्थानों और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर बुरी तरह से चोट की गई है। जब संस्थानों की स्वतंत्रता ख़त्म होती है तो लोगों को इंसाफ नहीं मिलता है। इस माहौल में कोई भी उद्दमी जोखिम नहीं उठाना चाहता है और इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
इस माहौल की जड़ में मोदी सरकार की दुर्भावना है या फिर मोदी सरकार के शासन का यही सिद्धांत है। ऐसा लग रहा है कि मोदी सरकार हर चीज़ को और हर कोई को शक की नजर से देख रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसे लगता है कि पूर्ववर्ती सरकार की नीतियां गलत इरादे से बनी थी।
भारत की तीन अरब डॉलर की वैश्विक अर्थव्यवस्था है। इस अर्थव्यवस्था में निजी उद्यमों का बड़ा रोल है। आप इसे मनमाने तरीक़े से निर्देशित नहीं कर सकते। आप इसे अपने हिसाब मीडिया की हेडलाइन्स से मैनेज भी नहीं कर सकते।(बीबीसी)

 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इकॉनॉमी ग्रोथ पर चिंता व्यक्त करते हुए, द हिंदू, में भारतीय अर्थव्यवस्था में बेचैनी पर केंद्रित एक लेख लिखा है। अपने इस लेख में सिंह ने भारत की अर्थव्यवस्था को चिंताजनक बताते हुए इसके कारण और उपाय पर चर्चा की है। मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार और संस्थाओं में नागरिकों के भरोसे की कमी की वजह से अर्थव्यवस्था में सुस्ती आई है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने साथ ही लिखा कि भारत की अर्थव्यवस्था की हालत बेहद चिंताजनक है।
मनमोहन सिंह ने लिखा, अब कुछ बातें स्पष्ट हो चुकी हैं- जीडीपी वृद्धि दर 15 साल में सबसे निचले स्तर पर है, घरेलू उपभोग पिछले चार दशक में सबसे नीचे पहुंच गया है और बेरोजगारी 45 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। बैंकों के कर्ज डूबने के मामले सबसे ऊंचे स्तर पर हैं और बिजली उत्पादन 15 साल के सबसे निचले स्तर पर गिर गया है।
मनमोहन सिंह ने लिखा है कि उनकी कई उद्योगपतियों से मुलाकात हुई। इन मुलाकातों में उद्योगपती बताते हैं कि वो सरकारी अधिकारियों के हाथ परेशान किए जाने के डर में जी रहे हैं। बैंक नए कजऱ् नहीं देना चाहते, क्योंकि उन्हे कर्ज डूबने का खतरा लगता है। लोग नए उद्योग लगाने से डर रहे हैं कि कुछ लोगों की खराब नियत के चलते वो डूब सकते हैं।
मनमोहन सिंह ने साथ ही कहा, लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। लोगों को लगता है कि उनको सुनने वाला कोई नहीं है। इस अविश्वास और डर के लिए मोदी सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को बढ़ाने वाले लोगों को शक की नजर से देखती है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार का पॉलिसी फे्रमवर्क कुछ इस तरह का है कि सभी उद्योगपति, बैंक अधिकारी, रेगुलेटर और नागरिक फ्रॉड हैं, धोखेबाज हैं।
विश्व के प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों में शुमार सिंह ने कहा है कि रिटेल इंफलेशन के जो आंकडे सामने आए हैं उनसे इसी तरफ इशारा मिलता है। मनमोहन सिंह ने कहा है सरकार को तुरंत ऐसी नीतियां बनानी चाहिएं जिससे मांग बढ़े।
मनमोहन सिंह ने सरकार को आगाह किया है कि भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और आप इससे मनमुताबिक खेल नहीं सकते। उन्होंने कहा कि यह वो समय है जब भारत के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था में फिलहाल मंदी चल रही है और भारत के पास मौका था कि वो अपना कारोबार दुनिया भर में बढ़ाता।(न्यूज18)

 


Date : 18-Nov-2019

गुवाहाटी, 18 नवंबर । पश्चिमी असम में गोलपारा जिले के रोंगजुली से पकड़े गए जंगली बिगड़ैल हाथी बिन लादेन की रविवार को मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने उसे शांत करने के लिए 11 नवंबर को ट्रैंकुलाइज करने के बाद पकड़ लिया था और 12 नवंबर को उसे ओरांग नेशनल पार्क भेज दिया गया था। नेशनल पार्क के एक वरिष्ठ अधिकारी कहा, वह ठीक था लेकिन  रखवाले ने बताया कि आज (रविवार) सुबह साढ़े पांच बजे उसकी मौत हो गई।
35 वर्षीय इस हाथी का नाम स्थानीय लोगों ने अल कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन के नाम पर बिन लादेन रखा था। हालांकि पकड़े जाने के बाद इसका नाम कृष्णा कर दिया गया। वह  6 दिन कैद में रहा। असम सरकार ने पहले ही केके सरमा समेत विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की एक टीम भेज दी थी। सरमा पोस्टमार्टम कर हाथी की मौत का कारण पता लगाएंगे। 
सूटी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा विधायक पद्मा हजारिका के नेतृत्व में एक दल ने इस बिगड़ैल हाथी को शांत किया था। टीम में वन अधिकारी और पशु चिकित्सक शामिल थे, जिन्होंने हाथी को शांत करने में सहायता की थी। 
हालांकि वन विभाग ने पहले जंगल में हाथी को छोडऩे की योजना बनाई थी लेकिन बाद में इसे रिहा करने के खिलाफ कड़े विरोध को देखते हुए कैद में रखने का फैसला करना पड़ा।  लोग आशंकित थे कि हाथी फिर से मानव बस्तियों पर हमला कर सकता है। बता दें आम तौर पर छह से सात साल के बीच के हाथियों को कैद में रखा जाता है। लादेन उर्फ कृष्णा की उम्र 35 साल थी, जिसे हिरासत में रखने के फैसले किया गया था। (एनडीटीवी)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू के संबोधन के साथ संसद के शीतकालीन सत्र की सोमवार को शुरुआत हो गई। शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की बैठक शुरू होने से पहले मीडिया से बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की उम्मीद जताई। सत्र की शुरुआत होते ही लोकसभा में पहला सवाल फारुक अब्दुल्ला से जुड़ा हुआ पूछा गया। सदन में राष्ट्रगान के बाद टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने सवाल किया सर फारुक अब्दुल्ला यहां पर नहीं हैं। इस पर स्पीकर ने कहा कि पहले नये सदस्यों को शपथ लेने दें। वहीं, लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने नारे लगाए, विपक्ष पर हमला बंद करो। फारुक अब्दुल्लाजी को रिहा करो। हम न्याय चाहिए।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद का शीतकालीन सत्र आरंभ होने से पहले कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से आरंभ होकर 13 दिसंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्र के दौरान उच्च स्तर की चर्चाएं होनी चाहिए जिसमें सभी सांसद शामिल हों। सत्र शुरू होने से पहले उन्होंने मीडिया से कहा, ‘हम सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
लोकसभा में सरकार से बहुत सारे सवाल पूछे जाने हैं। इनमें से अर्थव्यवस्था, कॉरपोरेट मामले, संस्कृति और जनजातीय मामले, अर्थव्यवस्था में सुस्ती और बैंकों के विलय से संबंधित प्रश्न पूछे जाने हैं। यहां कुछ प्रमुख प्रश्नों का उल्लेख किया जा रहा है, जो सोमवार को सूचीबद्ध हैं।
पहला प्रश्न : सुरेश नारायण जीडीपी से संबंधित सवाल पूछेंगे। इसमें अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) पांच प्रतिशत हो जाने पर और निवेश बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर सवाल पूछे जाएंगे।
दूसरा प्रश्न : एन.के. प्रेमचंद्रन अर्थव्यवस्था पर कई प्रश्न पूछेंगे। इसमें से प्रमुख हैं कि क्या सरकार ने देश में आर्थिक सुस्ती के कारणों की समीक्षा की है। इसके अलावा वह आर्थिक सुस्ती की वजह से जीएसटी पर प्रभाव और विदेश व्यापार समझौते को लागू करने के प्रभाव को लेकर अध्ययन कराने पर सवाल पूछेंगे।
तीसरा सवाल : अन्नपूर्णा देवी भ्रष्टाचार के बारे में सवाल पूछेंगी। वह पूछना चाहती हैं कि क्या तीन वर्षो के कार्यकाल में राष्ट्रीकृत बैंकों से ऋण वितरण मामले में किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है।
चौथा सवाल : झारखंड में जहां विधानसभा चुनाव की प्रक्रिश शुरू हैं, विष्णु दयन का प्रश्न राज्य से इसी जुड़ा हुआ है। वह जानना चाहते हैं कि क्या सरकार झारखंड में स्वदेश दर्शन परियोजना के अलावा कोई नया पर्यटन सर्किट विकसित कर रही है।
पांचवा प्रश्न : उमेश यादव जनजातीय मामले से संबंधित प्रश्न पूछना चाहते हैं। वह जानना चाहते हैं कि क्या सरकार जनजातीय लोगों के कल्याण के लिए बजट में वृद्धि कर रही है।
छठा प्रश्न : सुमेधानंद सरस्वती जानना चाहते हैं कि क्या सरकार की देश के सभी शहरों में प्राकृतिक गैस की पाईप से आपूर्ति करने की योजना प्रस्तावित है।
हालांकि यह देखना होगा कि सदन में कितने प्रश्न पूछे जा सकते हैं और कितने प्रश्नों पर चर्चा हो सकती है।(एनडीटीवी)


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । कांग्रेस विधायक और कर्नाटक के पूर्व मंत्री तनवीर सैत पर मैसुरू में एक व्यक्ति ने चाकू से एक शादी समारोह के दौरान हमला कर दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सैत नरसिम्हाराजा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्हें रविवार को हुई इस घटना के तुरंत बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी सर्जरी हुई। हमलावर की पहचान 25 वर्षीय फरहान पाशा के रूप में हुई है। सैत जब समारोह में बैठे हुए थे तभी फरहान ने उन पर चाकू से हमला कर दिया और वहां से भागने की कोशिश की लेकिन लोगों ने उसे वहीं पकड़ा और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।  यह घटना कैमरे में भी कैद हुई है। अधिकारियों ने बताया कि पाशा से पूछताछ की जा रही है।(भाषा)


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पानी पर भारतीय मानक ब्यूरो की रिपोर्ट को ‘झूठी और राजनीति से प्रेरित’ करार दिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में पीने का पानी गुणवत्ता जांच में असफल रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने शनिवार को भारतीय मानक ब्यूरो के अध्ययन के दूसरे चरण की यह रिपोर्ट जारी की थी। इसमें कहा गया है कि दिल्ली के साथ ही कोलकाता और चेन्नई के पानी के नमूने जांच के 11 मानकों में से दस में असफल रहे हैं।
पीटीआई के मुताबिक इसके बाद दिल्ली के कुछ हिस्सों में आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोलते पोस्टर देखे गए। चांदनी चौक के सांसद और केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने ऐसे ही एक पोस्टर को ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा, ‘मुफ्त पानी के नाम पर दिल्ली की जनता को जहर पिला रहे हैं अरविंद केजरीवाल। देश के 20 शहरों के पानी पर हुए सर्वेक्षण में दिल्ली का पानी सबसे ज्यादा जहरीला पाया गया। विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली आम आदमी पार्टी सरकार लोगों को साफ पानी तक मुहैया कराने में नाकाम रही है।’ इस पर जवाब देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘सर, आप तो डॉक्टर हैं। आप जानते हैं कि ये रिपोर्ट झूठी है, राजनीति से प्रेरित है। आप जैसे व्यक्ति को ऐसी गंदी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।’ (सत्याग्रह ब्यूरो)

 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाहर सोमवार को प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है।  ये धारा जेएनयू छात्र संघ के संसद तक किए जाने वाले मार्च से पहले लगाई है। सोमवार को ही छात्र संघ की  हॉस्टल की बढ़ी हुई फीस और शिक्षा को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों को लेकर संसद तक मार्च करने की योजना है। विश्वविद्यालय के बाहर दिल्ली पुलिस की ओर से एक बैनर भी लगाया गया है जिसमें कहा गया है कि नियम का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी के आदेशानुसार क्षेत्र में धारा 144 लागू है।  
इससे पहले रविवार को जेएनयूएसयू ने अन्य विश्वविद्यालय के लोगों का मार्च के लिए आह्वान करते हुए कहा था,  ऐसे समय में जब देश में शुल्क वृद्धि बहुत अधिक पैमाने पर हो रही है, तो समग्र शिक्षा के लिए छात्र आगे आए हैं। हम संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन जेएनयू से संसद तक निकाले जाने वाले मार्च में शामिल होने के लिए सभी छात्रों को आमंत्रित करते हैं।
उधर जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार ने विरोध कर रहे छात्रों से रविवार को अपील की कि वे अपनी कक्षाओं में लौट आएं, क्योंकि परीक्षाएं नजदीक हैं। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उन्हें चिंतित अभिभावकों और छात्रों के ई-मेल आ रहे हैं। उन्होंने कहा, यदि हम अभी भी हड़ताल पर अड़े रहे तो इससे हजारों छात्रों के भविष्य पर असर होगा। उन्होंने कहा, कल से एक नया हफ्ता शुरू होगा और मैं छात्रों से अनुरोध करता हूं कि आप कक्षाओं में वापस आइए और अपने शोध कार्यों को आगे बढ़ाइए। 12 दिसंबर से सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू होंगी और अगर आप कक्षाओं में नहीं जाएंगे तो इससे आपके भविष्य के लक्ष्य प्रभावित होंगे। 
पुलिस ने मार्च के मार्ग के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध करने के साथ ही शीत कालीन सत्र को देखते हुए संसद मार्ग पर कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम जिले से शुरू होने वाले सभी संभावित मार्गों से संसद की ओर जाने वाले सभी प्रवेश बिंदुओं पर पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।(भाषा)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद रिव्यू पिटीशन दाखिल करने का मामला उठा था। इस पर अब ऑल इंडिया हिंदू महासभा के वकील वरुण सिन्हा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या जमीनी विवाद केस में पक्षकार नहीं है इसलिए उन्हें इस मामले में रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का अधिकार नहीं है। सिन्हा ने रविवार को कहा, एआईएमपीएलबी इस मुकदमे में पक्षकार नहीं है। इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड रिव्यू पिटीशन दाखिल कर सकता है। क्योंकि केवल पक्षकार ही सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर सकते हैं।
सिन्हा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पहलुओं की जांच की है और फिर इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मुसलमान उस विवादित स्थल और संरचना पर अपना विशिष्ट आधिपत्य स्थापित करने के योग्य नहीं हैं।
सिन्हा ने कहा कि वह इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं कि एआईएमपीएलबी को फैसले में कैसे कमी दिख रही है जबकि कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत फैसला सुनाया। एआईएमपीएलबी ने रविवार को कहा था कि वह रिव्यू पिटीशन दाखिल करना चाहती है। (एनडीटीवी)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश को प्राकृतिक आपदा घोषित करने की मांग को लेकर शिवसेना नेताओं ने संसद परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास धरना दिया। वहीं, इसके अलावा शिवसेना ने फसलों के नुकसान पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और राज्यसभा के सभापति एम। वेंकैया नायडू के संबोधन के साथ संसद के शीतकालीन सत्र की बैठक सोमवार सुबह शुरू हो गई है। शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले यहां कहा कि सरकार को पिछले सत्रों की तरह इस सत्र में भी सभी दलों से सहयोग मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने सत्र शुरू होने से कुछ मिनट पहले मीडिया से कहा, संविधान देश की एकता, अखंडता और विविधता को समेटे हुए है। पिछले दिनों सभी दलों के नेताओं से मिलने का मौका मिला, जिस तरह से पिछला सत्र सभी दलों के सहयोग से चला था, इस बार भी ऐसा ही होने की उम्मीद है।(लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 18-Nov-2019

उन्नाव, 18 नवंबर। ट्रांसगंगा सिटी से खदेड़ दिए जाने पर गुस्साए किसानों ने रविवार की सुबह ट्रांसगंगा सिटी के पास बने गोदाम और मिक्सर वाहन में आग लगा दी। गोदाम से एक किलोमीटर की दूरी पर पुलिस फोर्स तैनात था। गोदाम में पानी के प्लॉस्टिक पाइप रखे होने से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। आग से काफी ऊंचाई तक धुआं का गुब्बार उठने से गांव में दहशत फैल गई। दमकल कर्मियों ने दो फायर मोटर लगाकर आधा घंटे के अंदर आग पर काबू पा लिया। आगजनी से कोई हताहत नहीं हुआ है। आगजनी की घटना के बाद मौके पर पहुंचे डीएम व एसपी ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
ट्रांसगंगा सिटी से खदेड़ दिए जाने पर गुस्साए किसानों ने रविवार की सुबह ट्रांसगंगा सिटी के पास बने गोदाम और मिक्सर वाहन में आग लगा दी। गोदाम से एक किलोमीटर की दूरी पर पुलिस फोर्स तैनात था।
ट्रांसगंगा सिटी साइड पर यूपीसीडा ने निर्माण कार्य के लिए अलग-अलग गोदाम बना रखे हैं। रविवार की सुबह आंदोलित किसानों ने गंगा सिटी की साइड पर बने गोदाम में पानी के प्लॉस्टिक पाइप काफी संख्या में रखे हुए थे। किसानों ने पेट्रोल व डीजल डालकर गोदाम में रखे पाइप में आग लगा दी। प्लॉस्टिक पाइप में आग पकडऩे पर काफी विकराल रूप धारण कर लिया था। गंगासिटी क्षेत्र के आसपास केवल धुंआ का गुब्बार उठता नजर आ रहा था। जानकारी होते ही दमकल कर्मियों ने अपने दो फायर वाहन लगाकर किसी तरह आग पर काबू पाया।
इस दौरान पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों को लाठी पटक कर खदेड़ दिया था। इसी दरम्यान दोबारा गुस्साएं किसानों ने यूपीसीडा के मिक्सर वाहन में आग लगा दी। दमकल कर्मियों ने वाहन में लगी आग पर भी काबू पा लिया है। मामला की जानकारी होते ही डीएम देवेन्द्र कुमार पाण्डेय और एसपी माधव प्रसाद वर्मा भी घटनास्थल पर पहुंच गए। मौके पर मौजूद एडीएम राकेश सिंह ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। आगजनी की घटना से अभी तक कोई हताहत नहीं हुआ है। घटना को अंजाम देने वाले अराजक तत्वों पर रिपोर्ट दर्ज कर करवाई की जाएगी।
शनिवार को उन्नाव के गंगा बैराज रोड स्थित ट्रांसगंगा सिटी में काम कराने पहुंची प्रशासन और यूपीसीडा की टीम पर किसानों ने हमला बोल दिया। पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज किया तो उग्र ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। पथराव में एएसपी एएसपी विनोद पांडेय, सीओ अंजनी कुमार राय समेत 10 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। जवाब में पुलिस के लाठीचार्ज में 50 से ज्यादा ग्रामीण घायल हो गए। शाम को ग्रामीणों ने फिर दबाव बनाने की कोशिश की, तो पुलिस ने हवाई फायरिंग कर स्थिति संभाली।
यूपीसीडा के अधिकारी व चीफ इंजीनियर सुबह ट्रांसगंगा सिटी में काम कराने पहुंचे थे, इस पर किसानों ने उनकी पिटाई की और पथराव शुरू कर दिया। पथराव में जेसीबी मशीन और कार क्षतिग्रस्त हो गई। सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। तनाव के बीच कुछ देर काम हुआ, लेकिन दोपहर बाद सैकड़ों किसान और ग्रामीण फिर काम रुकवाने पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो धक्का देते हुए भीड़ आगे बढऩे लगे।
पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन से पानी की बौछार मारी। विरोध में भीड़ पथराव करने लगी तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को ट्रांसगंगा सिटी से खदेड़ दिया। इसमें कई ग्रामीणों के हाथ-पैर टूट गए और उनकी दो दर्जन बाइकें और एक कार क्षतिग्रस्त हो गई। शाम करीब चार बजे को ग्रामीणों ने फिर दबाव बनाने की कोशिश की तो पुलिस ने हवाई फायरिंग कर की जिससे दहशतजदा ग्रामीण पीछे हट गए। (हिन्दुस्तान)
 

 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर। पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने अयोध्या मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले की रविवार को आलोचना की लेकिन कहा कि मुस्लिम समुदाय को इसे स्वीकार करना चाहिए। सिन्हा यहां मुंबई साहित्य महोत्सव में बोल रहे थे। ऐतिहासिक फैसले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय का फैसला गलत निर्णय है, इसमें कई खामियां हैं लेकिन मैं फिर भी मुस्लिम समुदाय से फैसले को स्वीकार करने के लिए कहूंगा। उन्होंने कहा, ‘‘चलिए आगे बढ़ते हैं। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद कोई फैसला नहीं है।
इस बीच, सिन्हा ने यह भी दावा किया कि लाल कृष्ण आडवाणी और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं को शुरुआत में बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर पछतावा था लेकिन बाद में वे राम मंदिर आंदोलन का श्रेय लेने लगे। (एनडीटीवी)
 


Date : 18-Nov-2019

कुबूल अहमद
नई दिल्ली, 18 नवंबर। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का ऐलान किया है। साथ ही मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन न लेने का निर्णय किया है। ऐसे में अब अयोध्या मामला एक बार फिर देश की शीर्ष अदालत में पहुंच सकता है। बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी की अध्यक्षता में रविवार को लखनऊ में हुई बैठक के बाद बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कई विरोधाभास हैं, ऐसें में रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का फैसला किया गया है।
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में कुल 8 मुस्लिम पक्षकार थे। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर मुस्लिम पक्षकारों में से पांच ने रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का फैसला किया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने रविवार को बताया कि मुस्लिम पक्षकारों में से मिसबाहुद्दीन, मौलाना महफूजुर्रहमान, मोहम्मद उमर और हाजी महबूब ने पुनर्विचार याचिका दायर करने पर अपनी सहमति एआईएमपीएलबी को दे दी है। इसके अलावा जमीयत उलेमा-ए-हिंद (हामिद मोहम्मद सिद्दीकी) की ओर से मौलाना अरशद मदनी ने भी रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का ऐलान किया है।
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर मुस्लिम पक्षकारों में इकबाल अंसारी पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट के फैसले का सम्मान किया, ऐसे में हम अब इस मामले को यहीं पर खत्म कर देना चाहते हैं और अब पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेंगे। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने प्रेस कॉन्फे्रंस करके साफ कर दिया कि वह शीर्ष फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा।
मुस्लिम पक्षकार क्या कहते हैं?
बाबरी मस्जिद के मुकदमे के वादी मौलाना महफूजुर्रहमान के प्रतिनिधि खालिक अहमद ने कहा कि वह मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं और पुनर्विचार याचिका उनकी तरफ से दायर की जाएगी। मुस्लिम पक्षकार मोहम्मद उमर भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सुर में सुर मिला रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने पर सहमत हैं।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुस्लिम पक्ष के खिलाफ आया है। मदनी ने कहा, हमें पता है सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका 100 प्रतिशत खारिज हो जाएगी, लेकिन पुनर्विचार याचिका दाखिल करना हमारा अधिकार है और हमें इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 अपीलें दायर की गई थीं। इनमें से 6 याचिकाएं हिंदुओं की तरफ से हैं और 8 मुस्लिम पक्षकारों की ओर से दाखिल की गई थीं। मुस्लिम पक्षकारों में सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद (हामिद मोहम्मद सिद्दीकी), इकबाल अंसारी, मौलाना महमूदुर्रहमान, मिसबाहुद्दीन, मौलाना महफूजुर्रहमान मिफ्ताही, मोहम्मद उमर, हाजी महबूब और मौलाना असद रशीदी शामिल थे। एआईएमपीएलबी इस मामले में सीधे तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन मुस्लिम पक्षकार की ओर से पूरा मामला उसी की निगरानी में चल रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर 9 नवंबर को अपना फैसला सुनाया। देश की शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में अयोध्या की 2।77 एकड़ विवादित जमीन रामलला विराजमान को राम मंदिर बनाने के लिए दे दी है। जबकि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का निर्देश सरकार को दिया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार एक ट्रस्ट बनाए और उसमें निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए। हालांकि, निर्मोही अखाड़े का दावा सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था लेकिन मंदिर के ट्रस्ट में उसक हिस्सेदारी सुनिश्चित कर दी। (आजतक)
 

 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर। कश्मीरी पंडितों के ऊपर घाटी में हुए अत्याचार पर टीवी डिबेट के दौरान भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल के एक कमेंट पर बवाल शुरू हो गया है। उनकी इस टिप्पणी पर सेना पूर्व अधिकारियों ने भी उनकी जमकर खिंचाई की।
दरअसल रिटायर्ड मेजर जनरल एसपी सिन्हा ने एक न्यूज़ चैनल पर डिबेट के दौरान मौत के बदले मौत और बलात्कार के बदले बलात्कार कहते हुए पाए गए। उनकी इस टिप्पणी पर साथी पैनलिस्ट समेत महिला एंकर भी बिफर पड़ीं और उन्होंने एसपी सिन्हा को शांत कराने की कोशिश की।
वहीं सोशल मीडिया पर इस टीवी डिबेट के वायरल होने के बाद कुमार विश्वास ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि जहालत चरम पर है। सबको मसीहा बनने की इतनी जल्दी है कि कानून, संविधान-भारतीयता सबको रौंदने पर आमादा हैं।
सिन्हा के इस कमेंट के कारण सेना के पूर्व अधिकारी नाराज हो गए। श्रीनगर स्थित 15 कोर के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) ने ट्वीट किया कि आतंकवाद-रोधी अभियानों में शामिल लोग जानते हैं कि यह सब क्या है और कभी कभी यह लगता है कि सार्वजनिक मंचों पर नहीं बोलने की पाकिस्तानी सेना की प्रणाली ठीक है। उन्होंने कहा कहा कि ऐसे लागों से बचना चाहिए।
वहीं सैन्य अभियान के पूर्व महानिदेशक तथा अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया ने सिन्हा को आड़े हाथों लिया और ट्वीट किया, असंवेदनशील एवं दुर्भाग्यपूर्ण। उन्होंने कहा कि वह इस बात से आश्वस्त हैं कि वह (सिन्हा) कभी आतंकवाद निरोधी अभियान में शामिल नहीं रहे होंगे।
वहीं रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल संदीप परीजा ने कहा कि सिन्हा ने सेना की छवि खराब की है। उन्होंने मांग की कि सिन्हा से मेजर जनरल का रैंक वापस लिया जाए। (एनडीटीवी/भाषा)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । राजस्थान के बीकानेर जिले में हुए भीषण हादसे में दस लोगों की मौत हो गई। ट्रक और बस के बीच यह टक्कर बीकानेर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 11 के पास हुई। 
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस हादसे में कम से कम 20-25 लोगों के घायल होने की भी जानकारी है। हादसे के बाद घटनास्थल पर पुलिस मौजूद है और बस व ट्रक को हाईवे से हटाने का काम चल रहा है। 
इससे पहले 11 नवंबर को बीकानेर जिले के देशनोक कस्बे के पास एक भीषण सडक़ हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने बताया था कि यह हादसा उस समय हुआ जब एक मिनी बस सामने से आ रही जीप से जा टकराई। भीषण टक्कर में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक ने अस्तपाल में दम तोड़ दिया।
पुलिस ने बताया था कि हादसे में मारे गए लोग जीप में ही सवार थे। जीप सवार लोग चुरू जिले के एक गांव के रहने वाले हैं और तीर्थ यात्रा पर बीकानेर जा रहे थे। हादसे में घायल लोगों को बीकानेर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।(लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । उन्नीस मुकदमे और दर्जन भर से ज्यादा ट्रांसफर झेल चुके मैग्सेसे अवार्ड विजेता नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी को हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से टेलीफोन पर बात की थी। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि हालिया सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेज इस ओर इशारा कर रहे हैं। इंडियन फोरेस्ट सर्विसेज यानी आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी 2012 से लेकर 2014 तक अखिल भारतीय आयुर्विद संस्थान के मुख्य सतर्कता अधिकारी के तौर पर कार्यरत रहे। इन दो साल के कार्यकाल के दौरान एआईआईएमएस में 200 से ज्यादा भ्रष्टाचार के मामलों को उन्होंने उजागर किया। जिसमें आईएएस अधिकारी विनीत चौधरी से लेकर आईपीएस अधिकारी शैलेश यादव तक पर इसकी आंच आई थी। इसके चलते वो सरकार से लेकर नौकरशाहों तक की आंखों की किरकिरी बन गए थे।
आरटीआई के तहत मिले दस्तावेज के मुताबिक तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा का एक पत्र प्रधानमंत्री के उस वक्त के प्रिंसिपल सचिव पीके मिश्रा को 23 अगस्त 2014 को लिखा गया, जिसमें कहा गया कि डिप्टी सचिव और सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को कार्यमुक्त करने के बाबत प्रधानमंत्री की स्वास्थ्य मंत्री से फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री न एआईआईएमएस के उस वक्त के सीओवी संजीव चतुर्वेदी को जबरन छुट्टी पर भेज दिया।
साल 2012 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के कार्यकाल में हरियाणा कॉडर के ढ्ढस्नस्  अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को एआईआईएमएस का सीवीओ नियुक्त किया गया। सीवीओ नियुक्त होने से पहले हरियाणा के डीएफओ रहते हुए संजीव चतुर्वेदी ने हरियाणा में भी भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर किया। जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ उनकी नहीं बनती थी। एआईआईएमएस के सीवीओ रहते हुए संदीव चतुर्वेदी ने ्रढ्ढढ्ढरूस् के डिप्टी डायरेक्टर विनीत चौधरी के खिलाफ जांच के आदेश दिए। विनीत चौधरी पर आरोप लगे थे कि 2010 से लेकर 2012 तक एआईआईएमएस  के डवलपमेंट वर्क और झज्जर में बन रहे कैंसर अस्पताल में मानकों को ताक पर रखकर काम करवाए गए। कथित तौर पर विनीत चौधरी ने उस वक्त एआईआईएमएस  के सुपरिडेंटेड इंजीनियर और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के मुखिया बीएस आनंद का कार्यकाल बढ़वाया और कैंसर अस्पताल बनाने में फंड का दुरुपयोग किया गया। इस जांच के आधार पर बीएस आनंद को बर्खास्त कर दिया गया। जांच आगे बढ़ी तो कई अधिकारी घेरे में आने लगे, इसी बीच केंद्र में बीजेपी आई और स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को बनाया गया। लेकिन इस बीच एआईआईएमएस के सीवीओ की शिकायत पर विनीत चौधरी के खिलाफ सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया। 
मई 2014 में डॉ हर्षवर्धन के स्वास्थ्य मंत्री बनने के एक महीना बाद जेपी नड्डा ने 24 जून 2014 को पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि संजीव चतुर्वेदी को एआईआईएमएस का सीवीओ बनाने में नियमों का उल्लंघन किया गया और इनको तुरंत अपने कॉडर में वापस भेजा जाए और सीवीओ रहने के दौरान कराई जा रही जांच को रोका जाए। संजीव चतुर्वेदी के स्थान पर जब कोई नया चीफ विजीलेंस ऑफिसर आएगा तब उसके विवेक पर है कि वो जांच कराए या न कराए। जेपी नड्डा के इस पत्र के बाद प्रधानमंत्री खुद स्वास्थ्य मंत्री को फोन करके संजीव चतुर्वेदी को रिलीव करने को कहते हैं। उसके बाद संजीव चतुर्वेदी को जबरन छुट्टी पर भेजा जाता है और दो महीने बाद डॉ। हर्षवर्धन की छुट्टी करके जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री बना दिया जाता है।
दरअसल, विनीत चौधरी हिमाचल कॉडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। हिमाचल सरकार में जब जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्री थे, तब उस वक्त विनीत चौधरी स्वास्थ्य सचिव हुआ करते थे। उसके बाद विनीत चौधरी तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के नजदीकी रहे और एआईआईएमएस के डिप्टी डायरेक्टर बन गए। जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री बनते ही विनीत चौधरी के खिलाफ चल रही जांच सुस्त पड़ गई। सीबीआई ने अपने नोट में लिखा कि विनीत चौधरी के खिलाफ जांच में सबूत नहीं मिल सके क्योंकि विभागों ने जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए। दो साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट में स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ विनीत चौधरी को क्लीन चिट का हलफनामा फाइल कर दिया। सभी जांच खत्म हो गई और विनीत चौधरी हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव पद से पिछले साल रिटायर हो गए।(एनडीटीवी)
 

 


Date : 18-Nov-2019

सबरीमाला, 18 नवंबर । सोशल मीडिया पर एक कुत्ते की कहानी काफी वायरल हो रही है। कुत्ते ने ऐसी मिसाल पेश की, जिसको पढक़र आप भी हैरान रह जाएंगे। एक आवारा कुत्ता 13 अयप्पा भक्तों के साथ अब तक 480 किलोमीटर तक की पैदल यात्रा कर चुका है। 31 अक्टूबर को भक्तों ने आंध्र प्रदेश के तिरुमाला से पैदल यात्रा शुरू की थी।
कुत्ता तीर्थयात्रियों के साथ अब चिक्कमगलुरू जिले के कोट्टिघारा पहुंच गया है। एक तीर्थ यात्री ने कहा, हमने पहले कुत्ते को नोटिस नहीं किया, हमने पैदल चलना जारी रखा। घंटों तक कुत्ता हमारे साथ चलता रहा तो हम हैरान रह गए। वो कई घंटे तक हमारे पीछे आते रहा। हम समझ गए कि वो हमारे साथ सबरीमाला जाना चाहता है। हम उसको भोजन खिला रहे हैं। हम हर साल तीर्थ यात्रा करने के लिए निकलते हैं, लेकिन इस बार ये नया अनुभव है। 
सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो को ट्विटर पर न्यूज एजेंसी एएनआई ने पोस्ट किया है, जिसके अब तक 17 हजार व्यूज हो चुके हैं और साथ ही 1 हजार से ज्यादा लाइक्स और 400 से ज्यादा रि-ट्वीट्स हो चुके हैं। (एनडीटीवी)
 


Date : 18-Nov-2019

नागपुर, 18 नवंबर । सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की योजना का पुरातत्ववेत्ता के के मोहम्मद ने विरोध किया है। अयोध्या में बाबरी मस्जिद स्थल की खुदाई करने वाले दल का हिस्सा रह चुके के के मोहम्मद ने रविवार को कहा कि अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने से मुस्लिम समुदाय को कोई फायदा नहीं होगा।
नागपुर में भारतीय मंदिर : शोध एवं पुरातात्विक खोज विषय पर आयोजित व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा वे पुनर्विचार याचिका दायर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे फायदा नहीं मिलेगा।
इससे पहले अयोध्या भूमि विवाद मामले के मुख्य वादी इकबाल अंसारी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की योजना से दूरी बना ली थी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही अंसारी ने कहा था कि वह फैसले पर पुनर्विचार की मांग नहीं करेंगे। वहीं, एआईएमपीएलबी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का रविवार को फैसला लिया था। इसके कुछ ही समय बाद ही अंसारी ने कहा था कि पुनर्विचार की मांग करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि नतीजा यही रहेगा। यह कदम सौहार्दपूर्ण वातावरण को भी बिगाड़ेगा।(भाषा)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सहयोगी दलों की चुनौतियों के बीच झामुमो नीत विपक्षी गठजोड़ के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हेमंत सोरेन ने रविवार को कहा कि भाजपा के सहयोगी दल ‘डूबते जहाज’ को छोडक़र जा रहे हैं क्योंकि उन्हें हवा के रुख का अंदाजा हो गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन ने भाजपा पर ‘कुशासन’ का और उससे ध्यान हटाने के लिए राष्ट्रवाद जैसे भावनात्मक मुद्दे उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव भूमि अधिग्रहण और बेरोजगारी जैसे राज्य स्तर के मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
सोरेने ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘यह लोकसभा चुनाव नहीं है, यह राज्य का चुनाव है। लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मुद्दे हावी होते हैं जो हो चुका है और उसके लिए जनादेश मिल चुका है। अब राज्य के मुद्दों पर राज्य के चुनाव लड़े जाएंगे।’
उन्होंने कहा, ‘हम जम्मू या गुजरात में छोटा नागपुर टेनेंसी और संथाल परगना टेनेंसी कानूनों की बात नहीं कर सकते। हम अन्य कहीं वन अधिकारों की बात नहीं कर सकते। अगर राज्य के मुद्दे प्रदेश में नहीं तो कहां उठाये जाएंगे? अगर हर जगह राष्ट्रवाद की बात होगी तो राज्य की समस्याओं को कहां उठाया जाएगा?’
वह झामुमो, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विपक्षी गठबंधन की अगुवाई कर रहे हैं। गठबंधन के सीट बंटवारे के समझौते के तहत झामुमो 43 सीटों पर चुनाव लड़ेगा, वहीं कांग्रेस 31 और राजद सात सीटों पर किस्मत आजमाएगा।
क्या अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का चुनाव पर कोई असर पड़ सकता है, इस प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि मामला अब पुराना हो गया है।
44 वर्षीय नेता ने कहा, ‘राज्य के चुनावों में इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है। अदालत ने फैसला सुना दिया है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना सही नहीं है। मुद्दे को सुलझा लिया गया है तथा सभी को इसका पालन करना चाहिए।’
सोरेन ने कहा कि झारखंड की जनता अब रघुबर दास नीत सरकार के ‘झांसे में’ और नहीं आएगी तथा वह बदलाव के लिए वोट देगी। उन्होंने इसके लिए भाजपा नीत गठबंधन में आ रहीं समस्याओं की ओर भी इशारा किया।(भाषा)
 


Date : 18-Nov-2019

आनंद दत्ता
रांची, 18 नवंबर । चारा घोटाले को उठाने वाले, कोयला घोटाले को उठाने वाले और तीन मुख्यमंत्रियों स्व। जगन्नाथ मिश्र, लालू प्रसाद यादव और मधु कोड़ा को जेल भिजवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले अपने नेता को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया। ये हैं जमशेदपूर पश्चिमी के विधायक और वर्तमान सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री रहे सरयू राय।
सरयू राय ने अपने वर्तमान सीट के अलावा जमशेदपुर पूर्वी (यहीं से सीएम रघुवर दास चुनाव लड़ रहे हैं और पांच बार विधायक बने हैं) से भी चुनाव लडऩे का एलान कर दिया है। इन दोनों सीटों पर 18 नवंबर को नामांकन का आखिरी दिन है। दोनों नेता इसी दिन नामांकन करने जा रहे हैं। इसी सीट से कांग्रेस ने अपने प्रवक्ता और सोशल मीडिया में मशहूर गौरव वल्लभ को टिकट दिया है।
बीते 10 नवंबर को बीजेपी की पहली सूची जारी हुई थी। तब से चार सूची जारी हो गई, कुल 71 सीटों पर उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं। लेकिन, अब तक सरयू राय के नाम की घोषणा नहीं की गई थी। बीजेपी विधानसभा के 81 सीटों में से 79 पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। अब तक सहयोगी रह चुके आजसू प्रमुख सुदेश महतो के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी। एक सीट पर निर्दलीय को समर्थन दिया है।
शनिवार 16 नवंबर को जमशेदपुर के बिष्टूपुर में हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरयू राय ने कहा, ‘भाजपा ने बिना मांगे बहुत कुछ दिया। एमएलसी, विधायक से मंत्री तक बनाया। मैंने विद्यार्थी परिषद से राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी। मैं पार्टी को टिकट न घोषित कर पाने के दवाब से मुक्त करता हूं। पार्टी जल्दी से किसी को टिकट दे दे।’
उन्होंने कहा, ‘पिछले दिनों मानसिक प्रताडऩा से गुजरा हूं। मैं टिकट के लिए कटोरा लेकर खड़ा होने वालों में नहीं हूं। मेरा स्वभाव है भ्रष्टाचार और प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लडऩा, लड़ते रहूंगा। चुप बैठने वालों में नहीं हूं। मेरे कदम रुकनेवाले नहीं हैं।’
रविवार को एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी से इस्तीफे की घोषणा कर दी। इधर शनिवार को जैसे ही सरयू राय ने बगावती तेवर अपनाए, विपक्षी पार्टियों ने उनका समर्थन करना शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि, ‘सभी विपक्षी दलों को सरयू राय का समर्थन करना चाहिए।’ गठबंधन के तहत जमशेदपुर पश्चिमी सीट कांग्रेस के खाते में है। इधर रात के 12 बजे  कांग्रेस ने गौरव वल्लभ के प्रत्याशी होने की घोषणा कर दी।
बीते सार 27 दिसंबर को सीएजी की एक रिपोर्ट में कंबल घोटाले का जिक्र हुआ। जिसके बाद सरयू राय ने उसी दिन विधानसभा में सरयू राय ने इस पर सीबीआई जांच की मांग कर डाली।
बीते साल सात फरवरी एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि इस सरकार में बने रहने में वह शर्मिंदगी महसूस करते हैं। अधिकारी उनके किसी भी सलाह या आदेश का पालन नहीं करते हैं। उन्होंने पीएम मोदी से कहा था कि उन्हें मंत्री पद से मुक्त कर दिया जाए।
इससे पहले उन्होंने फरवही 2018 में संसदीय कार्य मंत्री का पद छोड़ दिया था। यही नहीं राज्य के महाधिवक्ता जिसकी नियुक्ति सरकार करती है, उन्होंने सरयू राय के खिलाफ झारखंड बार काउंसिल की तरफ से निंदा प्रस्ताव पारित करवाया था। यही वजह थी की इस साल 14 फरवरी के बाद उन्होंने एक भी कैबिनेट की बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
इधर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने कहा कि, ‘प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते हमने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से तीन-तीन नामों की अनुशंसा केन्द्रीय नेतृत्व से की थी। इसमें सरयू राय का नाम एक नंबर पर था।’ वहीं सरयू राय के बगावती तेवर पर कहा कि, ‘पार्टी के नियम के मुताबिक वह ऐसा करने पर वह छह साल के लिए निष्काषित हो जाएंगे।’ हालांकि, उससे पहल सरयू राय ने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
वहीं, बीजेपी के जमशेदपुर जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि, ‘सरयू राय के जाने के कोई फर्क नहीं पडऩे वाला है। ऐसे कई लोग आए और गए। कार्यकर्ता पार्टी के साथ रहते हैं, नेता विशेष के साथ नहीं।’ वहीं, जिला महिला मोर्चा की अध्यक्ष नीरू सिंह ने कहा कि वह बैठक में सरयू राय के साथ शामिल हुई हैं।
पूरे मसले पर गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने फेसबुक पर शायर मुनीर नियाजी की शेर को लिखा : ‘जानता हूं एक ऐसे शख्स को मैं भी ‘मुनीर’, गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं’। इसके साथ उन्होंने सरयू राय के साथ खुद की फोटो पोस्ट की है।
झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश कहते हैं सरयू राय के इस कदम से सीएम रघुवर दास एक्सपोज हो जाएंगे, क्योंकि उन्होंने साफ कहा है कि अब तक जितने मामले मैंने उठाए हैं, वह केवल पांच प्रतिशत है। 95 प्रतिशत मामलों का आना बाकि है। पूराने रिकॉर्ड को देखते हुए उनकी बातों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
इन सब के बीच यह बात भी याद रखना चाहिए कि इस सरकार के कार्यकाल के दौरान 19 से अधिक भूख से मौतें हुई हैं। खाद्य आपूर्ति मंत्रालय सरयू राय के पास ही रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि आनेवाले समय में वह किस तरह से रघुवर दास और बीजेपी को घेरते हैं।(दिप्रिंट)
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
 


Date : 17-Nov-2019

नई दिल्ली, 17 नवंबर। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को बड़ा झटका लगने वाला है। इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्री अगर टिकट बुक करते समय खाने को भी शामिल करते हैं तो उन्हें 3त्न से लेकर 9त्न तक अधिक किराया देना होगा। संशोधित कैटरिंग चार्ज अगले साल 29 मार्च से लागू होगा। 
नए आदेश के मुताबिक, इन ट्रेनो में यात्रियों को फर्स्ट क्लास एसी और एग्जिक्युटिव क्लास में चाय के लिए 35 रुपये (अभी 15 रुपये), ब्रेकफास्ट के लिए 140 रुपये (अभी 90 रुपये) तथा लंच और डिनर के लिए 245 रुपये (अभी 140 रुपये) का भुगतान करना होगा। वहीं, सेकेंड क्लास एसी, थर्ड क्लास एसी तथा चेयरकार में मॉर्निंग टी 20 रुपये (अभी 10 रुपये), ब्रेकफास्ट 105 (अभी 70 रुपये), लंच तथा डिनर 185 रुपये (अभी 120 रुपये) और इवनिंग टी 90 रुपये (अभी 45 रुपये) में मिलेगा। 
दुरंतो ट्रेन के स्लीपर क्लास में मॉर्निंग टी 15 रुपये (अभी 10 रुपये), ब्रेकफास्ट 65 रुपये (अभी 40 रुपये), लंच तथा डिनर 120 रुपये (अभी 75 रुपये) और इवनिंग टी 50 रुपये (अभी 20 रुपये) में मिलेगा। राजधानी, शताब्दी तथा दुरंतो ट्रेनों में खानपान की कीमतों को साल 2013 में संशोधित किया गया था। 
29 मार्च, 2020 से नया किराया होगा लागू 
आदेश के मुताबिक, रेल मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, प्री-पेड ट्रेनों में किराये में कुल 3 प्रतिशत से लेकर 9 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी, जो मील का चयन करेंगे। कैटरिंग की संशोधित दरें 29 मार्च, 2020 से लागू होंगी। जनता मील की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और यह 20 रुपये ही रहेगी। ला कार्टे मील के नाम पर ओवरचार्जिंग को रोकने के लिए मेल तथा एक्सप्रेस ट्रेनों में इस तरह के खाने को परोसने की मंजूरी नहीं होगी। हालांकि, ला-कार्टे स्नैक्स जैसे समोसा, पकौड़ा और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री की अनुमति होगी। 
यह भी फैसला किया गया है कि खाने में बिरयानी की लोकप्रियता को मद्देनजर, आईआरसीटीसी तीन तरह की बिरयानी- वेज, एग और चिकन उपलब्ध कराएगी, जिनकी कीमत क्रमश: 80 रुपये, 90 रुपये और 110 रुपये होगी। (नवभारत टाईम्स)
 


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