विचार / लेख

भूखी बैठी महिलाओं को सब्र, हौसला और खुशी मिले
01-Nov-2023 10:31 PM
भूखी बैठी महिलाओं को सब्र, हौसला और खुशी मिले

- कनुप्रिया
आज के दिन महज करवाचौथ ही नही स्त्रीवादियों को भी गरियाने का प्रचलन है।

क्यों गरियाया जाता है स्त्रीवादियों को? कि वो दूसरी स्त्रियों को त्योहारों के बहाने नीचा दिखाती हैं? Superiority complex से भरी हैं? पुरुष द्वेष की मारी हैं? अगर ऐसा है तो वो स्त्रीवादी हैं ही नहीं, अगर कोई स्त्री अपने अधिकार, सम्मान और उससे बढक़र अपने अस्तित्व के महत्व को समझ लेती हैं और उनके लिए खड़ी होती है तो वो महज विद्रोही है, साहसी है, मगर यदि वो सभी स्त्रियों के अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व के महत्व को समझ लेती है बिना जाति और धर्म की बाधा के तो वो स्त्रीवादी हो सकती है। इससे बढक़र यदि वो स्त्रियों के ही नही है बाकी कमजोर तबकों के अधिकारों और सम्मान के महत्व को भी समझ लेती है तो मुझे लगता है कि वो स्त्रीवादी है, नही तो वो स्त्रीवाद अधूरा है। 

ऐसा ही दलित वादियों या अल्पसंख्यक वादियों के लिए भी है, अगर बाकी कमजोर तबकों के संघर्ष को आप नही समझ सकते तो फिर ये पावर स्ट्रगल है, आपका वाद अधूरा है।

ऐसे व्रतों का विरोध करने का ख़तरा आखिऱ क्यों उठाया जाए, नही ये किसी को नीचा दिखाने के लिये है ही नहीं। यह बस इस बात को underline करना है कि इन व्रतों का रिश्ते से कोई लेना देना नही है, ये बस पितृसत्तावादी ब्राह्मणों का बनाया धार्मिक अनुष्ठान है जैसे कि कई अन्य व्रत त्योहार।

जिन्हें व्रत त्योहारों में रस हो वो इसे करें मगर किन्ही दो लोगों के रिश्ते में प्रेम, परस्पर सम्मान, भरोसा और ईमानदारी ऐसे व्रतों की मोहताज नही है, अगर ये सब दो लोगों के बीच है तो कोई फर्क नही पड़ता कि आप इस अनुष्ठान को करें न करें और अगर ये दो लोगों के बीच नही है तो भी फर्क नहीं पड़ता कि आप इसे करें न करें। कुल मिलाकर दो लोगों के बीच के रिश्ते की मजबूती का इन अनुष्ठानों से लेना देना नहीं है।

इसलिये विरोध इन अनुष्ठानों का भर नही है, इनको प्रेम और रिश्ते से जोड़ देने का है, उस दबाव का है जो कहता है कि ये धार्मिक अनुष्ठान ही आपके रिश्ते को, उसकी गठन और मजबूती को परिभाषित करते हैं। बस इतना ही।

आज के दिन व्रत कर रही भूखी बैठी महिलाओं को सब्र, हौसला और ख़ुशी मिले, और वो प्रेम भी जिसकी वो कामना करती हैं। व्रत आपके शरीर को स्वस्थ करें और आपकी उम्र बढ़ाएँ।


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